आपका एआई एजेंट जल्द ही यूपीआई के जरिए कर सकेगा भुगतान, जानिए यह कैसे काम करेगा
यूपीआई पर आ रहा है एजेंटिक पेमेंट्स का दौर। प्रस्तावित ढांचा एआई एजेंट्स को पहले से तय नियमों और खर्च सीमाओं के तहत कम मूल्य के डिजिटल भुगतान करने की अनुमति देगा। जानिए कैसे बदलेगा अब आपकी ऑनलाइन खरीदारी का तरीका?
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कल्पना कीजिए कि आप अपने एआई एजेंट से हफ्ते भर का राशन खरीदने के लिए कहते हैं और वह हर बार आपसे मंजूरी मांगे बिना खुद ही यूपीआई भुगतान पूरा कर देता है। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) पर एजेंटिक एआई पेमेंट्स का एक राष्ट्रीय ढांचा तैयार कर रहा है। अगले हफ्ते मुंबई में आयोजित होने वाले ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में यूनिफाइड एजेंट प्रोटोकॉल को आधिकारिक तौर पर पेश किया जा सकता है।
ऐतिहासिक होगा बदलाव
यह बदलाव इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि अगस्त महीने में 29.82 लाख करोड़ रुपये के 24.51 अरब ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने वाला यूपीआई दुनिया का सबसे बड़ा रिटेल फास्ट-पेमेंट नेटवर्क है। अमेरिका, यूरोप और सिंगापुर में निजी वित्तीय कंपनियों ने ऐसे प्रयोग किए हैं, लेकिन राष्ट्रीय डिजिटल भुगतान इंफ्रास्ट्रक्चर के स्तर पर इसे लागू करने वाला भारत दुनिया का पहला देश बन सकता है।
एआई एजेंट कैसे करेंगे भुगतान?
प्रस्तावित नया सिस्टम उपयोगकर्ता को हर लेनदेन के लिए मंजूरी मांगने के बजाय एआई एजेंट को भुगतान करने का सीमित अधिकार सौंपने की अनुमति देगा। उपयोगकर्ता ऐसे नियम निर्धारित कर सकते हैं कि एजेंट कब भुगतान कर सकता है, कितना खर्च कर सकता है और संभावित रूप से किस प्रकार का लेनदेन कर सकता है।
उदाहरण के लिए, किसी एआई एजेंट को एक निश्चित बजट के भीतर किराने का सामान खरीदने का निर्देश दिया जा सकता है। शर्तें पूरी होते ही एजेंट उस विशेष लेनदेन को उपयोगकर्ता द्वारा मैन्युअल रूप से अधिकृत किए बिना ही भुगतान पूरा कर सकता है।
क्या होगा पूरा सिस्टम?
यह पूरा सिस्टम एनपीसीआई के दो मौजूदा दो तंत्रों पर खड़ा होगा। पहला, यूपीआई सर्कल, जिस तरह यूपीआई सर्कल में प्राथमिक खाताधारक अपने परिवार के किसी सदस्य को सीमित भुगतान की मंजूरी देता है, ठीक उसी तरह एआई एजेंट को सेकेंडरी यूजर के रूप में भुगतान का सीमित अधिकार मिलेगा।
और दूसरा, फंड ब्लॉक सुविधा, इसके तहत ग्राहक अपने खाते में एक तय रकम ब्लॉक कर सकेगा, जिससे एआई बार-बार पैसे काट सके। वर्तमान में बैंक 90 दिनों के लिए अधिकतम 10,000 रुपये को ब्लॉक करने की अनुमति देते हैं। एजेंटिक पेमेंट्स के लिए इस सीमा और समय-अवधि में ढील देने पर विचार चल रहा है।
इतना ही नहीं उपयोगकर्ता पहले से तय करेगा कि एआई किन मर्चेंट्स पर, किस बजट में और किस छूट पर खरीदारी कर सकता है। तय शर्तें पूरी होते ही भुगतान बिना किसी ओटीपी या यूपीआई पिन के स्वतः पूरा हो जाएगा।
कहां होगा शुरुआत में इस्तेमाल?
किराने का सामान जैसी कम कीमत की और बार-बार होने वाली खरीदारी इस प्रणाली के शुरुआती अनुप्रयोगों में शामिल हो सकती है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म भी इसे सबसे पहले अपनाने वालों में शामिल हो सकते हैं, क्योंकि एआई एजेंट ऑनलाइन शॉपिंग में अधिक सक्रिय रूप से भाग लेने लगे हैं।
समय के साथ इसके उपयोग के मामले नियमित खरीदारी से कहीं आगे तक बढ़ सकते हैं। एआई एजेंट सेल ऑफर्स और छूट की पहचान कर सकते हैं, यूजर के निर्देशों के आधार पर ऑर्डर दे सकते हैं और शेयर एवं म्यूचुअल फंड में तय मूल्य सीमा पूरी होने पर संभावित रूप से निवेश भी कर सकते हैं।
सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?
हालांकि, सबसे बड़ा पेंच सुरक्षा का है। यदि एआई किसी गलत खाते में पैसे ट्रांसफर कर दे, एल्गोरिदम की चूक से ज्यादा खरीदारी हो जाए या सिस्टम हैक हो जाए, तो नुकसान की भरपाई कौन करेगा? एनपीसीआई इसके लिए ऑडिट ट्रेल्स, पहचान सत्यापन और एक सख्त लायबिलिटी फ्रेमवर्क पर काम कर रहा है, ताकि विवाद की स्थिति में जवाबदेही बैंक, प्लेटफॉर्म या उपयोगकर्ता के बीच स्पष्ट रूप से तय हो सके।