वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के साथ खर्च बढ़ाए सरकार : उदय कोटक
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भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के नए अध्यक्ष उदय कोटक ने गुरुवार को कहा कि कोविड-19 संकट से उबरने के लिए भारत को सार्वजनिक खर्च बढ़ाने की जरूरत है चाहे राजकोषीय घाटा भले ही क्यों न बढ़े। इससे मांग और खपत में सुधार होगा। इसके अलावा, वित्तीय और राजकोषीय स्थिरता बनाए रखने पर भी ध्यान देना होगा।
मूडीज की ओर से भारत की सॉवरेन रेटिंग घटाए जाने पर उन्होंने कहा कि विश्लेषकों का कहना है कि राजकोषीय घाटा बढ़कर जीडीपी के 11.5 फीसदी के स्तर पर पहुंच जाएगा, जबकि कोरोना संकट से पहले इसके 6.5 फीसदी रहने का अनुमान था।
राजकोषीय घाटे का बढ़ना सरकार के लिए 100 खरब डॉलर (10 ट्रिलियन डॉलर) के नुकसान के बराबर हो सकता है। कोटक ने कहा कि सरकार को नागरिकों, कारोबार और वित्तीय क्षेत्र को उबारने के लिए वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के साथ साहसपूर्वक खर्च करना चाहिए।
संरक्षणवाद पर आधारित न हो आत्मनिर्भरता
कोटक ने कहा कि महामारी के प्रभाव को अभी समझा जा रहा है। लंबे लॉकडाउन के कारण मौजूदा वित्त वर्ष में सकारात्मक वृद्धि की उम्मीद नहीं है। उन्होंने कहा कि ‘आत्मनिर्भरता’ के लिए प्रधानमंत्री का आह्वान एक जरूरत है। लेकिन यह भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा पर आधारित होनी चाहिए न कि संरक्षणवाद पर। चीन से व्यापार के मोर्चे पर उन्होंने कहा कि भारत को पड़ोसी देश से व्यापार के लिए तैयार रहना चाहिए।
ब्याज में राहत पर बैंकों पर सवाल उठाना गलत
ईएमआई भुगतान में राहत के सवाल पर उन्होंने कहा कि बैंकों पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि बैंकों को मूलधन और ब्याज दोनों पर राहत देनी चाहिए। लेकिन अगर आप ईएमआई पर राहत की मांग कर रहे हैं तो ध्यान रखें कि आप कहीं-न-कहीं जमाकर्ता भी होंगे।
इससे पहले आरबीआई भी सुप्रीम कोर्ट में कह चुका है कि अगर बैंकों की तरफ से 6 महीने का ब्याज माफ कर दिया जाए तो इससे बैंकों पर 2 लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा, जो जीडीपी का एक फीसदी है।
सरकार ने सही समय पर लिया फैसला: अडानी
अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने कहा है कि कोविड-19 महामारी को देखते हुए सरकार निश्चित समय पर उपलब्ध बेहतर सूचना और नई जानकारी के आधार पर सही समय पर फैसला लेती रही। अगर वह फैसले लेने में देरी करती तो देश को बड़े स्तर पर नुकसान उठाना पड़ता, जिसका वैश्विक प्रभाव होता।
इसके लिए भारत सरकार और अधिकारी सराहना के पात्र हैं। इसके अलावा, हमें यह एहसास होना चाहिए कि वास्तव में निरपेक्ष रूप से कोई सही या गलत विचार नहीं होता है। उन्होंने कहा कि यह समय भारत में दांव लगाने के लिए उपयुक्त है, क्योंकि देश स्थिर लोकतांत्रिक संचालन व्यवस्था के साथ दुनिया के शीर्ष उपभोक्ता केंद्रों, विनिर्माण और सेवा केंद्रों में से एक होगा।