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Hindi News ›   Business ›   Chairman of Vedanta Gorup Anil Agarwal says, ban on export and relief packages will be a boon to domestic industries

आयात पर प्रतिबंध और राहत पैकेज से पुनर्जीवित होंगे घरेलू उद्योग : वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल

Thu, 09 Apr 2020 09:01 PM IST
गौरव पाण्डेय शरद गुप्ता, अमर उजाला
शरद गुप्ता, अमर उजाला Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 09 Apr 2020 09:01 PM IST
सार

कोरोना वायरस की वजह से हुए लॉकडाउन से उद्योग जगत से लेकर मजदूर तक सभी प्रभावित हैं। ऐसे में बड़े कारपोरेट घरानों को प्रतिदिन हो रही आर्थिक हानि के बावजूद वे अपनी-अपनी तरह से सरकार और जनता की मदद कर रहे हैं। इन्हीं विषयों पर वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने लंदन से अमर उजाला के शरद गुप्ता से चर्चा की। प्रस्तुत है इस बातचीत के मुख्य अंश...

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Chairman of Vedanta Gorup Anil Agarwal says, ban on export and relief packages will be a boon to domestic industries
वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल - फोटो : ट्विटर

विस्तार

इस लॉकडाउन से आपका कितना नुकसान हो रहा है?

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पिछले साल हमारी कंपनी की आय एक लाख करोड़ रुपयों की थी। इसमें से 50 प्रतिशत हिस्सा रॉयल्टी और टैक्स के जरिए सरकार को गया था। हमारी कंपनियों में परोक्ष और अपरोक्ष रूप से एक लाख कर्मचारी काम कर रहे हैं। अब आप स्वयं अंदाजा लगा सकते हैं कि लॉकडाउन से हमें तो नुकसान पहुंचा ही है सरकार का राजस्व भी कम हुआ है।

ऐसे में आप की सरकार से क्या अपेक्षा है?

चूंकि देश के कामगारों में 80 फीसदी हिस्सेदारी असंगठित क्षेत्र की है, इसलिए सरकार को प्राथमिकता पर उन्हें राहत पहुंचानी चाहिए। मोदी सरकार ने कोरोना पर काबू पाने में अभूतपूर्व सफलता दिखाई है। किसानों और मजदूरों को राहत भी दी है। लेकिन उनकी जरूरत से यह अभी काफी कम है। सरकार द्वारा खेतिहर मजदूर, रेहड़ी-खोमचे लगाने वाले लोगों को तीन महीने तक अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए 8000 रुपए प्रतिमाह देना चाहिए। बाकी यथासंभव मदद तो हम लोग भी कर ही रहे हैं।

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आपकी कंपनी ने ऐसे लोगों के लिए क्या किया है?

हमने पीएम केयर्स फंड में 101 करोड़ रुपए दिए हैं। इसके अलावा जरूरतमंदों को राहत पहुंचाने के लिए 100 करोड़ रुपयों का अतिरिक्त प्रबंध किया है। इनसे अपने कर्मचारियों, व्यापारिक सहयोगियों और स्थानीय लोगों को राहत पहुंचाई जा रही है। पीपीई बनाने के लिए 23 मशीनों का आयात किया है। वेदांता के कर्मचारियों ने अपनी एक दिन की तनख्वाह मुख्यमंत्री राहत कोष में दी है। हम बेगारी झेल रहे 10 लाख दिहाड़ी मजदूरों को रोज भोजन करा रहे हैं। साथ ही पचास हजार जानवरों के चारे और 10000 छुट्टा कुत्तों के भोजन का भी प्रबंध कर रहे हैं। हमने फैक्ट्री के आस-पास के गांव वालों में एक लाख मास्क और 15500 साबुन बांटे हैं।

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लॉक डाउन की वजह से बंद पड़े उद्योगों को सरकार से क्या अपेक्षा है?

हम चाहते हैं कि सरकार उद्योगों को बिजली में और किराए में राहत दे, कर्ज पर ब्याज में माफी दे और रॉयल्टी वह टैक्स की वसूली कुछ दिनों के लिए स्थगित कर दी जाए। हमें लगता है कि स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कुछ समय के लिए आयात पर प्रबंध लगाना भी उचित होगा। साथ ही अमेरिका और ब्रिटेन की तरह हमारे देश में भी उद्योगों के लिए राहत पैकेज की घोषणा होनी चाहिए।

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