फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Will agriculture be the silver lining of our economy

कठिन परिस्थितियों में क्या अर्थव्यवस्था के लिए उम्मीद की किरण है कृषि क्षेत्र?

Tue, 05 May 2020 04:07 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Tue, 05 May 2020 04:07 PM IST
विज्ञापन
Will agriculture be the silver lining of our economy
कृषि क्षेत्र - फोटो : PTI

कोरोना वायरस महामारी से दुनियाभर में आर्थिक गतिविधियां धीमी पड़ी हैं, जिसका असर भारत में भी दिखा। देश में विनिर्माण गतिविधियों में अप्रैल 2020 में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। अप्रैल में विनिर्माण गतिविधियां अब तक के उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। 

विज्ञापन


आईएचएस मार्किट ने निक्केई विनिर्माण पीएमआई इंडेक्स जारी किया, जिसके अनुसार भारत का मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई घटकर 27.4 पर आ गया, जो मार्च महीने में 51.8 के स्तर पर था। इस सर्वे की शुरुआत मार्च 2005 में हुई थी। रिपोर्ट में इनपुट और आउटपुट कीमतों में रिकॉर्ड गिरावट देखने को मिली है। इससे मुद्रास्फीति में भारी गिरावट के संकेत मिल रहे हैं।
विज्ञापन


प्रतिबंध हटने के साथ अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद है, लेकिन भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के सर्वे के अनुसार, 45 फीसदी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) का मानना है कि लॉकडाउन खुलने के एक साल बाद भी स्थिति समान्य नहीं हो पाएगी। वहीं 36 फीसदी का मानना है कि छह महीने से एक साल तक स्थिति पटरी पर आ सकती है।  
विज्ञापन
विज्ञापन


नीति आयोग के सदस्य और अर्थशास्त्री रमेश चंद का कहना है कि मंद अनुमान भारत के कृषि क्षेत्र में अपेक्षित वृद्धि को नजरअंदाज करते हैं, जिसका सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 16 फीसदी और रोजगार में 50 फीसदी से अधिक का योगदान होता है। उनका कहना है कि प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद इस साल कृषि क्षेत्र में तीन फीसदी वृद्धि हो सकती है। इसका साल 2020-21 में जीडीपी में 0.5 फीसदी योगदान होगा।

इस साल भारत को 2983 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन होने की उम्मीद है। खरीफ के मौसम में 1499.2 लाख टन और रबी सीजन के दौरान 1484 लाख टन उत्पादन होने की उम्मीद है। पिछले साल की तुलना में यह आंकड़ा 2 फीसदी अधिक है।

इसके अतिरिक्त सरकार को गैर-खाद्यान्न उत्पाद में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है। भारत मौसम विभाग (आईएमडी) का अनुमान है कि जून से सितंबर के दौरान दक्षिण-पश्चिमी मानसून के कारण होने वाली बारिश कुल मिलाकर सामान्य रह सकती है। यह वर्षा पर निर्भर खरीफ फसलों के लिए उम्मीदें बढ़ाता है।

कृषि क्षेत्र में बढ़ोतरी का एक संकेत यह भी है कि जहां अप्रैल में दिग्गज ऑटो कंपनियां एक भी गाड़ी नहीं बेच पाईं, वहीं इस दौरान महिंद्रा एंड महिंद्रा ने 4716 ट्रैक्टर बेचे। हालांकि पिछले साल के मुकाबले यह आंकड़ा 83 फीसदी कम है, लेकिन यह बिक्री 20 अप्रैल के बाद हुई जब इस क्षेत्र में दोबारा काम शुरू हुआ। 


इस बीच स्टोरेज, खरीद और वितरण जैसे कारक उत्पादन को अब भी प्रभावित कर सकते हैं। देश में मंडी खुली हुई हैं, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए वहां प्रतिबंधित प्रवेश के साथ बेहद कम लोग काम कर रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed