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Pakistan: मुसीबत में क्या-क्या कर रहा है पड़ोसी, कराची बंदरगाह के टर्मिनल बेचेगा यूएई को
Thu, 22 Jun 2023 04:50 PM IST
कुमार विवेक
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Thu, 22 Jun 2023 04:50 PM IST
सार
Pakistan Crisis: पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने हाल में एक आपात समिति का गठन किया, जिसे बंदरगाह के टर्मिनलों के सौदे पर बातचीत आगे बढ़ाने का काम सौंपा गया है। उसके पहले पाकिस्तान सरकार और यूएई सरकार के बीच बातचीत हुई थी। मीडिया रिपोर्टों के बारे में अभी इस बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
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कराची शिपयार्ड (सांकेतिक तस्वीर)।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
खबर है कि पाकिस्तान कराची बंदरगाह पर स्थित टर्मिनलों को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को सौंप देने पर विचार कर रहा है। ऐसा वह यूएई से आर्थिक सहायता पाने के लिए करेगा। पाकिस्तान सरकार ने पिछले साल एक कानून पारित कराया था, जिसमें सरकारी संपत्तियों को किसी अन्य देश को सौंपने का अधिकार उसे मिल गया। समझा जाता है कि उस कानून के तहत यह पहला सौदा होगा।
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पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने हाल में एक आपात समिति का गठन किया, जिसे बंदरगाह के टर्मिनलों के सौदे पर बातचीत आगे बढ़ाने का काम सौंपा गया है। उसके पहले पाकिस्तान सरकार और यूएई सरकार के बीच बातचीत हुई थी। मीडिया रिपोर्टों के बारे में अभी इस बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस बारे में भ्रम बना हुआ है। कुछ खबरों में कहा गया है कि पाकिस्तान यूएई को टर्मिनलों का सिर्फ संचालन अधिकार बेचेगा। जबकि कुछ खबरों में कहा गया है कि टर्मिनलों की पूरी बिक्री की जाएगी।
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कराची बंदरगाह अरब सागर में स्थित है। यह ओमान की खाड़ी के पूरब में स्थित है। पाकिस्तान का यह सबसे बड़ा बंदरगाह है, जहां से समुद्री मार्ग से होने वाला पाकिस्तान का लगभग 60 फीसदी आयात-निर्यात होता है। यह सौदा होने के बाद पाकिस्तान के साथ यूएई का संभार-तंत्र (लॉजिस्टिक्स) संबंधी रिश्ता काफी मजबूत हो जाएगा। यूएई के एक अधिकारी ने कहा है कि संचालन यूएई के हाथ में जाने के बाद ओमान की खाड़ी के रास्ते आने-जाने वाले जहाज अधिक तेज गति से यात्रा पूरी कर पाएंगे।
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पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था ढहने के कगार पर है। देश में महंगाई आसमान पर है और विदेशी मुद्रा का भंडार गिरता जा रहा है। अगर चीन से मदद ना मिली होती, तो पाकिस्तान अब तक डिफॉल्ट करने (कर्ज चुकाने में अक्षम) के लिए मजबूर हो चुका था। इसी आर्थिक संकट के कारण पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने अपनी नीति में बड़ा बदलाव करते हुए रूस से कच्चे तेल का आयात शुरू कर दिया है। यह तेल उसे विश्व बाजार की तुलना में रियायती दर पर मिल रहा है।
इसी महीने रूसी तेल की पहली खेप पाकिस्तान पहुंची। बताया जाता है कि पहली खेप में तीन लाख 30 हजार बैरल तेल पाकिस्तान आया। इसी महीने एक और खेप पाकिस्तान पहुंचने वाली है। रूस से यह तेल पाकिस्तान को असल में किस भाव पर मिल रहा है, उसको लेकर रहस्य बना हुआ है। इस बारे में दोनों ही देशों की तरफ से कोई जानकारी नहीं दी गई है।
रूस से तेल खरीदने का फैसला पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार ने लिया था। पिछले साल अप्रैल में सत्ता में आने के बाद शहबाज शरीफ सरकार ने उस फैसले को पलट दिया। लेकिन अब उसे अपने ही निर्णय को पलटना पड़ा है। रूस से कच्चे तेल की पहली खेप आने के बाद शरीफ ने उस पर खुशी जताई। उन्होंने कहा- ‘यह रूस से पाकिस्तान आई तेल की पहली खेप है और इसके साथ ही दोनों देशों के बीच रिश्तों की एक नई शुरुआत हुई है।’