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अर्थ जगत: 560 करोड़ की बिजली ट्रांसमिशन परियोजना, SPV हस्तांतरित; आरईसी ने पहला टोकन कॉरपोरेट बॉन्ड जारी किया

Mon, 14 Sep 2026 09:53 AM IST
ज्योति भास्कर बिजनेस डेस्क, अमर उजाला।
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला। Published by: ज्योति भास्कर Updated Mon, 14 Sep 2026 09:53 AM IST
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शेयर बाजार, कारोबार और वाणिज्य जगत की अहम खबरें - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

आरईसी पावर डेवलपमेंट एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड (आरईसीपीडीसीएल) ने महाराष्ट्र की राज्यांतर्गत बिजली ट्रांसमिशन परियोजना की कंपनी मुसलगांव पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड को सफल बोलीदाता महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड को सौंप दिया है। यह हस्तांतरण नौ सितंबर को किया गया। करीब 560 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना को 12 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है। परियोजना के तहत, मुसलगांव में 220/132/33 केवी का नया बिजली उपकेंद्र बनाया जाएगा। इसके अलावा मुसलगांव से बाबलेश्वर और रेमंड तक करीब 111 किलोमीटर लंबी 220 केवी डबल सर्किट लाइन तथा मुसलगांव से सिन्नर तक करीब 13 किलोमीटर लंबी 132 केवी डबल सर्किट लाइन बिछाई जाएगी। परियोजना के लिए आरईसीपीडीसीएल ने टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया कराई थी। इसमें महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड सफल बोलीदाता रही। परियोजना को बिल्ड, ओन, ऑपरेट एंड ट्रांसफर (बीओओटी) आधार पर विकसित किया जाएगा।

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आरईसी ने देश में पहला टोकन वाला कॉरपोरेट बॉन्ड जारी किया
आरईसी लिमिटेड ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के रेगुलेटरी सैंडबॉक्स के तहत देश में पहला टोकनाइज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड जारी किया है। इस पायलट योजना के तहत कंपनी ने 500 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इस बॉन्ड के लिए निवेशकों से 796 करोड़ रुपये की बोलियां मिलीं। आरईसी ने 1 साल 9 महीने की अवधि वाले बॉन्ड के लिए 7.30 प्रतिशत सालाना ब्याज तय किया है। इसके लिए एनएसई के इलेक्ट्रॉनिक बोली मंच पर प्रक्रिया पूरी की गई। कंपनी के अनुसार, टोकन वाली व्यवस्था से बॉन्ड के भुगतान, आवंटन और शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया एक ही दिन में पूरी हो गई। इन बॉन्ड को एनएसई और बीएसई पर सूचीबद्ध किया गया है। कंपनी के मुताबिक, यह कदम देश के बॉन्ड बाजार में नई तकनीक के इस्तेमाल की दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआत है।

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2030 तक दो लाख करोड़ रुपये का हो सकता है देश का पुस्तक बाजार
भारत का पुस्तक प्रकाशन बाजार 2030-31 तक बढ़कर करीब दो लाख करोड़ रुपये का हो सकता है। फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स (एफआईपी) ने नीलसनआईक्यू बुकडाटा के साथ मिलकर 'इंडिया बुक मार्केट रिपोर्ट 2026-2030' जारी की है। रिपोर्ट में देश के तेजी से बढ़ते प्रकाशन क्षेत्र का आकलन किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पुस्तकों और प्रकाशन से जुड़ी सेवाओं की बढ़ती मांग से बाजार को गति मिल रही है। इसमें छपी पुस्तकों के साथ डिजिटल और शैक्षणिक प्रकाशन, भारतीय भाषाओं की पुस्तकों और शिक्षा क्षेत्र की भूमिका का भी अध्ययन किया गया है। इसके साथ ही लेखकों और प्रकाशकों के अधिकारों की रक्षा तथा पुस्तकों की सामग्री पर अधिकार को सुरक्षित रखना भी जरूरी होगा। वहीं, नीलसनआईक्यू बुकडाटा के कार्यकारी निदेशक विक्रांत माथुर ने बताया कि रिपोर्ट से देश के प्रकाशन बाजार के आकार, विकास और इसमें मौजूद अवसरों को समझने में मदद मिलेगी।

चालान के लिए खारिज नहीं कर सकते क्लेम, बीमा कंपनी को देने होंगे 8 करोड़
दक्षिणी मुंबई के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा दावे को गलत तरीके से खारिज करने के मामले में न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी को 8.06 करोड़ रुपये भुगतान करने का आदेश दिया है। उपभोक्ता आयोग ने आदेश में कहा कि विक्टोरिनाक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के जायज दावे को सिर्फ तकनीकी आधार पर और मशीनी तरीके से खारिज कर दिया गया। स्विट्जरलैंड की कंपनी विक्टोरिनाक्स एजी की पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी विक्टोरिनाक्स इंडिया के कस्टम बांडेड गोदाम में फरवरी 2019 में आग लग गई थी, जिसमें काफी सामान जलकर राख हो गया था। बीमा कंपनी ने जनवरी, 2021 में कुछ आंतरिक समझौते और चालान उपलब्ध नहीं कराने का हवाला देते हुए दावा खारिज कर दिया था। आयोग ने ई-मेल रिकॉर्ड के आधार पर पाया कि कंपनी ने सर्वेक्षक द्वारा मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराए थे और उसके सवालों का जवाब देने के लिए ऑनलाइन बैठकों में भी हिस्सा लिया था। आयोग ने कहा कि नुकसान का आकलन हो जाने और उस पर किसी पक्ष द्वारा विवाद नहीं किए जाने के बावजूद केवल प्रक्रियागत और तकनीकी आधार पर दावा खारिज करना अनुचित और कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं था। आयोग ने बीमा कंपनी को शिकायत दायर किए जाने की तारीख से दावे की राशि पर नौ प्रतिशत ब्याज के साथ मानसिक परेशानी के लिए 50,000 रुपये और मुकदमा खर्च के तौर पर 50,000 रुपये का भुगतान 45 दिन के भीतर करने का आदेश दिया।
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