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Oil Reserve: दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार वेनेजुएला के पास, अमेरिका की कार्रवाई से बाजार पर कितना असर जानें

Mon, 05 Jan 2026 11:31 AM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Mon, 05 Jan 2026 11:31 AM IST
सार

दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले वेनेजुएला में अमेरिक की कार्रवाई के बाद सवाल यह है कि क्या इससे तेल बाजार हिलेगा? या फिर कमजोर उत्पादन, भारी तेल और जर्जर ढांचा बाजार को फिलहाल शांत ही रखेगा? आइए विस्तार से जानते हैं। 

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Venezuela has the world's largest oil reserves. Find out how much the US action will affect the market
वेनेजुएला पर अमेरिका की कार्रवाई - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

वेनेजुएला को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में इशारा किया है कि पूरा मामला तेल से जुड़ा है। यह टिप्पणी उस घटनाक्रम के एक दिन बाद आई, जब अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में लिया। 

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कई महीनों तक धमकियों और दबाव की रणनीति के बाद अमेरिका ने शनिवार को वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई की और वामपंथी राष्ट्रपति निकोलस मादुरो औको सत्ता से बेदखल कर दिया। इस कार्रवाई के बाद मादुरो को न्यूयॉर्क ले जाया गया, जहां उन्हें ड्रग्स और हथियारों से जुड़े मामलों में मुकदमे का सामना करना होगा।
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इस अमेरिकी ऑपरेशन के साथ मादुरो के 12 साल लंबे शासन का अंत हो गया। मादुरो पर अमेरिका ने 5 करोड़ डॉलर का इनाम घोषित कर रखा था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें मादुरो कैरेबियन सागर में तैनात एक अमेरिकी नौसैनिक जहाज पर हथकड़ी लगाए और आंखों पर पट्टी बंधे नजर आ रहे हैं।
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वेनेजुएला में हुए इन घटनाक्रमों ने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है, इसका वैश्विक तेल बाजार पर क्या असर पड़ेगा? दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल भंडार रखने वाले देश में राजनीतिक उथल-पुथल की खबरें आते ही निवेशकों की नजर आपूर्ति, निर्यात और कीमतों पर टिक गई है।

ये भी पढ़ें: Tobacco Taxes: सिगरेट पर बढ़े टैक्स से अवैध कारोबार बढ़ने का खतरा, वैध उद्योग और सरकार दोनों को होगा नुकसान

वेनेजुएला के पास वैश्विक तेल भंडार का कुल पांचवा हिस्सा

बता दें कि वेनेजुएला के पास करीब 303 अरब बैरल कच्चे तेल का विशाल भंडार है, जो दुनिया के कुल तेल भंडार का लगभग पांचवां हिस्सा है। यह जानकारी अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (ईआईए) के आंकड़ों पर आधारित है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतना बड़ा तेल भंडार देश के भविष्य की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। 

तकनीकी खामियों और गलत नीतिगत फैसलों ने वेनेजुएला को किया पिछे

वेनेजुएला के पास विश्व के तेल भंडार के करीब 18 प्रतिशत हिस्सा है। लेकिन तकनीकी खामियों और वर्षों तक लिए गए गलत राजनीतिक व नीतिगत फैसलों के चलते वेनेजुएला अपने विशाल तेल भंडार का सिर्फ करीब एक प्रतिशत ही उत्पादन कर पा रहा है। इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल इसका वैश्विक तेल बाजार पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा। 

क्या अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला जाएंगी?

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका फिलहाल वेनेजुएला की सरकार के संचालन में भूमिका निभाएगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने कहा कि हमारी बेहद बड़ी अमेरिकी तेल कंपनियां,जो दुनिया में सबसे बड़ी हैं,वहां जाएंगी। वे अरबों डॉलर का निवेश करेंगी और पूरी तरह जर्जर हो चुकी तेल अवसंरचना को दुरुस्त करेंगी।

ट्रंप के इस बयान के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजारों की नजर वेनेजुएला पर टिक गई है। विश्लेषकों के अनुसार, अगर निवेश और उत्पादन में वाकई तेजी आती है, तो मध्यम अवधि में यह वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों के संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

गिरावट की वजहें: प्रतिबंध, निवेश की कमी और जर्जर ढांचा

2013 से 2020 के बीच वेनेजुएला का तेल उत्पादन 75 प्रतिशत से ज्यादा गिर गया। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध, गहरा आर्थिक संकट, निवेश और रखरखाव की भारी कमी ने तेल उद्योग को लगभग ठप कर दिया। सरकारी तेल कंपनी पीडीवीसीए के मुताबिक, देश की पाइपलाइनों को 50 साल से अपग्रेड नहीं किया गया है। उत्पादन को पुराने शिखर स्तर तक लाने के लिए करीब 58 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत होगी।

वेनेजुएला के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार चीन

वेनेजुएला के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार चीन है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, देश के कुल कच्चे तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा चीन को भेजा जाता है। इसके बावजूद संयुक्त राज्य अमेरिका वेनेजुएला का दूसरा सबसे बड़ा ग्राहक बना हुआ है, खासकर भारी क्रूड की जरूरत के चलते।

अमेरिका के नेतृत्व में बदलाव से क्या बदलेगा?

बता दें कि जब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला के तेल जहाजों से कच्चा तेल जब्त करना शुरू किया था, उस दौरान अमेरिका में तेल की कीमतें कुछ समय के लिए 60 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चली गई थीं। हालांकि यह तेजी टिक नहीं पाई और कीमतें फिर से गिरकर करीब 57 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं।

विश्लेषकों का मानना है कि अगर अमेरिका के नेतृत्व में वेनेजुएला के तेल क्षेत्र का पुनर्गठन होता है, तो लंबी अवधि में यह एक बड़ा आपूर्तिकर्ता बन सकता है। इससे पश्चिमी तेल कंपनियों के लिए नए अवसर खुलेंगे और वैश्विक आपूर्ति बढ़ने से कीमतों पर दबाव रह सकता है। हालांकि, विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय पहुंच तुरंत बहाल होने पर भी उत्पादन पूरी तरह लौटने में 5 से 10 साल लग सकते हैं।

भारी तेल है एक बड़ी चुनौती

वेनेजुएला का तेल भारी है, जिसे निकालने और रिफाइन करने के लिए उन्नत तकनीक चाहिए। अमेरिकी रिफाइनरियां इसी तरह के तेल के लिए डिजाइन की गई हैं और वेनेजुएला का तेल उनके लिए ज्यादा उपयुक्त है। लेकिन जब तक प्रतिबंध हटते नहीं और भारी निवेश नहीं होता, तब तक यह क्षमता कागजों तक ही सीमित रहेगी।

बाजार पर तत्काल असर क्यों नहीं?

तेल बाजार पहले से ही ओवरसप्लाई और कमजोर मांग की आशंकाओं से जूझ रहा है। ओपेक उत्पादन बढ़ा रहा है, जबकि वैश्विक अर्थव्यवस्था महंगाई के दबाव में है। ऐसे में विश्लेषकों का मानना है कि वेनेजुएला की मौजूदा स्थिति में कोई बड़ा झटका नहीं लगेगा।


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