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एक्सप्लेनर: जीडीपी आंकड़ों पर क्यों उठे सवाल? सरकार ने 7.8% की वृद्धि का दिया हिसाब; 2.6% के दावे को बताया गलत

Thu, 03 Sep 2026 06:45 AM IST
निर्मल कांत ब्यूरो, नई दिल्ली।
ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 03 Sep 2026 06:45 AM IST
सार

जीडीपी के नए आंकड़ों में 7.8% की तेज वृद्धि ने कई सवाल खड़े किए हैं। सरकार ने 2.6% वृद्धि के दावे को गलत बताते हुए नई गणना पद्धति और 2022-23 के आधार वर्ष को वजह बताया है। विनिर्माण, महंगाई और खनन के आंकड़ों पर उठे सवालों का सरकार ने क्या जवाब दिया? पढ़िए रिपोर्ट

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gdp data questions govt rejects 2.6 growth claim backs 7.8 growth
जीडीपी (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

केंद्र सरकार ने हाल ही में जारी अप्रैल-जून 2026 तिमाही के जीडीपी आंकड़ों को लेकर उठ रहे सवालों पर स्पष्टीकरण जारी किया है। सरकार का कहना है कि 2011-12 आधार वर्ष वाले आंकड़ों की तुलना 2022-23 आधार वर्ष वाले आंकड़ों से करना पूरी तरह गलत है।
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क्या विनिर्माण सेक्टर में कीमतें घटी हैं?
जवाब है नहीं। पहली तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का इम्प्लिसिट जीवीए डिफ्लेटर 1.5% रहा। यह सभी वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में होने वाले बदलावों को मापने का पैमाना है। कई लोगों ने इसे कीमतों में कमी मान लिया। सरकार अब डबल डिफ्लेशन पद्धति इस्तेमाल कर रही है, जिसमें तैयार व कच्चे माल दोनों की कीमतों का अलग-अलग हिसाब लगाया जाता है। अगर कच्चे माल की कीमतें तैयार माल की कीमतों से ज्यादा तेजी से बढ़ती हैं, तो जीवीए डिफ्लेटर नकारात्मक दिख सकता है।
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  • जीडीपी आंकड़ों में हैरान करने वाले आंकड़ों का मुख्य कारण नई गणना पद्धति और नया आधार वर्ष है।
  • विनिर्माण में नरमी का मतलब कीमतों में गिरावट से नहीं है।  

क्या सरकार ने पुराने जीडीपी आंकड़े घटाकर नई वृद्धि दर बढ़ा दी
पहले जीडीपी की गणना 2011-12 आधार वर्ष पर होती थी। बाद में इसे 2022-23 कर दिया गया। नए डाटा, पद्धति और नए इंडेक्स शामिल किए गए। 2011-12 आधार वर्ष वाले आंकड़ों की तुलना 2022-23 आधार वर्ष वाले आंकड़ों से करना सही नहीं है।
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जीडीपी मुद्रास्फीति सिर्फ 2.5% कैसे
  • जीडीपी मुद्रास्फीति: अर्थव्यवस्था में कीमतों का प्रभाव दिखाती है। इसमें उपभोग, निवेश, सरकारी खर्च, निर्यात, बैंकिंग, आईटी और रियल एस्टेट जैसी सेवाएं भी शामिल होती हैं। अगर कच्चा तेल और धातुएं तेजी से बढ़ रही हों, लेकिन कुछ सेवा क्षेत्रों में महंगाई कम हो, तो जीडीपी मुद्रास्फीति, खुदरा व थोक महंगाई से अलग दिख सकता है। जब बैंकों के पास सस्ती विदेशी मुद्रा आई तो उन्होंने थोक जमा ब्याज दरों में कटौती कर दी।
  • खनन क्षेत्र में उत्पादन घटा, फिर आय कैसे बढ़ी: सरकार ने कहा, उत्पादन बहुत ज्यादा नहीं बढ़ा, लेकिन खनिजों की कीमतों में भारी उछाल आया। धातु कीमतें भी 20% से ज्यादा बढ़ीं। इसलिए कम उत्पादन होने के बावजूद मूल्य बढ़ गया।
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