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क्या नेटवर्किंग से कतराते हैं भारत के जेन-जी?: 83% युवा पेशेवरों ने बनाई दूरी, जानिए वजह
Thu, 03 Sep 2026 07:36 AM IST
निर्मल कांत
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 03 Sep 2026 07:36 AM IST
सार
भारत के 83 फीसदी जेन-जी पेशेवर नेटवर्किंग से कतराते हैं। आखिर नए लोगों से जुड़ने में उन्हें किस बात का डर सता रहा है? आश्चर्य की बात है कि यही झिझक उन्हें नौकरी और करियर के कई बड़े मौकों से दूर कर रही है। पढ़िए रिपोर्ट
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जेन-जी को नेटवर्किंग से परहेज क्यों?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
यूं तो जेन-जी को इंटरनेट फ्रेंडली माना जाता है, लेकिन एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत के 83 फीसदी जेन-जी पेशेवर नेटवर्किंग से कतराते हैं, यानी वे उन लोगों को नहीं जुड़ते जो कॅरिअर बनाने में उनकी मदद कर सकते हैं। इसके सबसे बड़े कारण युवा पेशेवरों का यह सोचना है कि उन्हें गलत आंका जाएगा या दूसरों को क्यों नाहक परेशान करें। लिंक्डइन की रिपोर्ट के मुताबिक, 44 फीसदी जेन-जी पेशेवरों को गलत आंके जाने का डर, 39% को दूसरों को परेशान करने की चिंता और 37 फीसदी को बनावटी लगने का डर जरूरी सलाह लेने, लोगों से जुड़ने और नए मौकों का फायदा उठाने से रोक रहा है। एजेंसी
रिपोर्ट में सामने आया है कि 79 फीसदी युवा पेशेवर रिश्तों की अहमियत समझते हैं, लेकिन 52 फीसदी को बात शुरू करने का तरीका ही नहीं पता।
59 फीसदी जेन-जी का कहना है कि उन्हें किसी ने पेशेवर रिश्ते बनाना नहीं सिखाया, जिससे यह तय करना मुश्किल होता है कि किससे, कब और क्या कहकर संपर्क किया जाए।
जान-पहचान से नौकरी पाना आसान
आंकड़ों के अनुसार, जेन-जी को नौकरी मिलने की संभावना उन लोगों के मुकाबले 8.5 गुना अधिक होती है, जिनकी कंपनी के भीतर जान-पहचान होती है। इसके बावजूद, सही मार्गदर्शन न मिलने के कारण युवा इस बड़े लाभ से वंचित रह जाते हैं।
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ये भी पढ़ें: एक्सप्लेनर: जीडीपी आंकड़ों पर क्यों उठे सवाल? सरकार ने 7.8% की वृद्धि का दिया हिसाब; 2.6% के दावे को बताया गलत
छोटी बातों से बनता है भरोसा
नेटवर्किंग का मतलब सिर्फ अनजान लोगों से संपर्क करना नहीं है। समय के साथ, छोटी-छोटी बातचीत से भरोसा बनता है, आपका दायरा बढ़ता है। इससे आपको मौके, नई जानकारी और जरूरत के समय मदद मिल सकती है। -निराजिता बनर्जी, कॅरिअर एक्सपर्ट, लिंक्डइन
44% जेन-जी को दूसरों के आंके जाने डर है
39% लोग इस चिंता से पीछे हट जाते हैं कि वे दूसरों को परेशान कर रहे हैं
37% लोगों को बनावटी लगने का सताता है डर
मदद के लिए तैयार
92% मिलेनियल्स और 95% जेन-एक्स मदद को तैयार रहते हैं। चाहे वह अंजान ही क्यों ना हो।
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रिपोर्ट में सामने आया है कि 79 फीसदी युवा पेशेवर रिश्तों की अहमियत समझते हैं, लेकिन 52 फीसदी को बात शुरू करने का तरीका ही नहीं पता।
59 फीसदी जेन-जी का कहना है कि उन्हें किसी ने पेशेवर रिश्ते बनाना नहीं सिखाया, जिससे यह तय करना मुश्किल होता है कि किससे, कब और क्या कहकर संपर्क किया जाए।
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जान-पहचान से नौकरी पाना आसान
आंकड़ों के अनुसार, जेन-जी को नौकरी मिलने की संभावना उन लोगों के मुकाबले 8.5 गुना अधिक होती है, जिनकी कंपनी के भीतर जान-पहचान होती है। इसके बावजूद, सही मार्गदर्शन न मिलने के कारण युवा इस बड़े लाभ से वंचित रह जाते हैं।
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छोटी बातों से बनता है भरोसा
नेटवर्किंग का मतलब सिर्फ अनजान लोगों से संपर्क करना नहीं है। समय के साथ, छोटी-छोटी बातचीत से भरोसा बनता है, आपका दायरा बढ़ता है। इससे आपको मौके, नई जानकारी और जरूरत के समय मदद मिल सकती है। -निराजिता बनर्जी, कॅरिअर एक्सपर्ट, लिंक्डइन
44% जेन-जी को दूसरों के आंके जाने डर है
39% लोग इस चिंता से पीछे हट जाते हैं कि वे दूसरों को परेशान कर रहे हैं
37% लोगों को बनावटी लगने का सताता है डर
मदद के लिए तैयार
92% मिलेनियल्स और 95% जेन-एक्स मदद को तैयार रहते हैं। चाहे वह अंजान ही क्यों ना हो।