सोने-चांदी में गिरावट: ईटीएफ पर बढ़ा दबाव, पश्चिम एशिया में तनाव से क्रूड में उछाल कितना अहम समझिए
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट आई, जिससे ईटीएफ पर बिकवाली का दबाव बढ़ा। ऊर्जा कीमतों में वृद्धि से महंगाई की चिंता बढ़ी है, लेकिन त्योहारों के मौसम में यह गिरावट ग्राहकों और निवेशकों के लिए खरीदारी का अवसर भी है।
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अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श की टिप्पणी ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ा दी है। इसके चलते सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी आई, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी दिखा। अगस्त महीने के आखिरी दिन और सितंबर के दो दिनों में सोने और चांदी के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में बिकवाली का दबाव देखा गया।
कारोबार के दौरान चांदी ईटीएफ में तेज गिरावट दर्ज की गई। वस्तु विशेषज्ञों का कहना है कि फेड द्वारा ब्याज दरों में वृद्धि के संकेत से बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी हुई। इसी वजह से सोने और चांदी की चमक कम हुई और ईटीएफ में चार फीसदी तक की गिरावट आई। सभी बड़े गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ पर दबाव बना रहा। जानकारों के अनुसार, यह गिरावट मुनाफावसूली, कमजोर वैश्विक संकेतों और अमेरिकी बॉन्ड में वृद्धि के कारण हुई है। वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते नए तनावों ने ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ा दी है। इससे महंगाई की चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। बाजार और निवेशक बुधवार को नॉन-फार्म एम्प्लॉयमेंट चेंज और शुक्रवार को नॉन-फार्म पेरोल्स व बेरोजगारी के आंकड़ों पर ध्यान देंगे। इस हफ्ते सोने की कीमत 1,52,000 रुपये से 1,57,000 रुपये के दायरे में रह सकती है।
सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट क्यों आई?
यह बिकवाली वैश्विक कीमती धातुओं की कीमतों में तेज गिरावट के बाद हुई। वॉर्श ने फेडरल रिजर्व के वार्षिक जैक्सन होल सम्मेलन में नीति निर्माताओं के मुद्रास्फीति को 2 फीसदी के लक्ष्य पर वापस लाने पर जोर दिया। इन टिप्पणियों से अमेरिकी मौद्रिक नीति में सख्ती की आशंकाएं बढ़ गईं। सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार, बाजार सितंबर में फेड द्वारा ब्याज दरों में 60 फीसदी बढ़ोतरी की संभावना जता रहे हैं। अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड लगातार चार सत्रों में बढ़कर 4.74 फीसदी पर पहुंच गई। 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड लगातार तीसरे सत्र में अपनी बढ़त जारी रखते हुए 5.22 फीसदी पर बनी रही।
भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा कीमतें बाजार पर क्या असर डाल रहीं?
सेबी पंजीकृत रिसर्च एनालिस्ट फर्म एचएटी वेल्थ के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरिसेल्वन के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव ने अनिश्चितता फिर से बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता से निर्मित वीडियो पोस्ट की। इसमें उन्होंने ईरान के तेल केंद्र, खारग द्वीप के पूरी तरह नष्ट होने का दावा किया। अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष सोने के लिए एक नकारात्मक कारक है। इसने ऊर्जा की कीमतों को बढ़ाया है और अमेरिकी डॉलर की मांग को भी बढ़ाया है। इससे मुद्रास्फीति में तेजी आने का खतरा बढ़ा है, जिसके परिणामस्वरूप ब्याज दरों में और वृद्धि हो सकती है। कच्चे तेल की कीमतों में भी 2 फीसदी से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।
क्या यह गिरावट ग्राहकों और निवेशकों के लिए मौका है?
एलकेपी सिक्योरिटीज के वस्तु और करेंसी रिसर्च विशेषज्ञ जतिन त्रिवेदी ने बताया कि सोने में कमजोरी देखी गई। इसकी कीमत लगभग 1,100 रुपये से गिरकर 1,55,150 रुपये प्रति दस ग्राम हो गई। एमसीएक्स पर सोने को 1,53,800 रुपये के आसपास सपोर्ट मिला। यह 1,55,200 रुपये की ओर सुधरा, जिससे इसमें और गिरावट सीमित रही। कामा ज्वैलरी के प्रबंध निदेशक कॉलिन शाह कहते हैं कि यह गिरावट संरचनात्मक मंदी के बजाय समेकन का एक चरण है। त्योहारों और शादियों का मौसम शुरू होने वाला है, इसलिए यह गिरावट ग्राहकों के लिए एक अच्छा मौका है। खुदरा विक्रेताओं के लिए भी यह भंडार फिर से भरने का आकर्षक अवसर है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, बुलियन की कीमतों में नरमी से विनिर्माताओं को राहत मिली है, जिससे उत्पादन लागत कम हुई है और विदेशी बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता बढ़ी है।