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Tobacco Taxes: सिगरेट पर बढ़े टैक्स से अवैध कारोबार बढ़ने का खतरा, वैध उद्योग और सरकार दोनों को होगा नुकसान

Mon, 05 Jan 2026 08:11 AM IST
शुभम कुमार बिजनेस डेस्क, अमर उजाला।
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला। Published by: शुभम कुमार Updated Mon, 05 Jan 2026 08:11 AM IST
सार

सिगरेट पर 28-40% जीएसटी और नए एक्साइज ड्यूटी ढांचे से कीमतें बढ़ीं, जिससे अवैध कारोबार का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ता महंगी वैध सिगरेट छोड़ अवैध विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं। लंबी अवधि में वैध उद्योग और सरकार की टैक्स आमदनी भी प्रभावित हो सकती है।

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Raising taxes will lead to a significant increase in the illegal cigarette trade News In Hindi
सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर बढेगा टैक्स - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

तंबाकू पर 28 से 40 प्रतिशत जीएसटी दर करने से टैक्स में 40 से 50 प्रतिशत की वृद्धि और नए एक्साइज ड्यूटी ढांचे ने सिगरेट के अवैध कारोबार बढ़ने का डर पैदा कर दिया है। कई ब्रोकरेज हाउस ने टैक्स दरों में बढ़ोतरी के बाद भारत में अवैध सिगरेट के बढ़ते खतरे पर चिंता जताई है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने कहा, सिगरेट पर टैक्स में यह अप्रत्याशित बढ़ोतरी पिछले आठ साल से अवैध कारोबार से निपटने में वैध उद्योग की मदद करने और स्थायित्व बढ़ाने के लिए अपनाई जा रही टैक्स रणनीति के विपरीत है।

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रिपोर्ट के अनुसार, टैक्स में इस बढ़ोतरी से अवैध कारोबार में वृद्धि हो सकती है। 35 प्रतिशत से ज्यादा की अप्रत्याशित बढ़ोतरी से कीमतों पर असर पड़ेगा। इससे अवैध व्यापार एवं उत्पादों की ओर लोगों का रुझान बढ़ेगा। इससे लंबी अवधि में वैध उद्योग की विकास की संभावनाओं पर दुष्प्रभाव पड़ेगा।
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कीमतों में बहुत ज्यादा अंतर से खर्च के प्रति ग्राहकों का विचार बदलता है। खर्च का ध्यान रखने वाले उपभोक्ताओं के मामले में कीमतों में बड़ा अंतर अवैध उत्पादों को ज्यादा आकर्षक विकल्प बना देता है। जेफरीज ने टोबैको इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (टीआईआई) का हवाला देते हुए कहा, कीमतों में अंतर से टैक्स नहीं चुकाने वाले सिगरेट को फायदा पहुंच सकता है। इससे सरकार को टैक्स का नुकसान होगा। तंबाकू उपभोग में वैध सिगरेट की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत है, जबकि कुल टैक्स में इसकी हिस्सेदारी 80 प्रतिशत है। ऐसे में अवैध सिगरेट को बढ़ावा मिलने से टैक्स का बड़ा नुकसान होगा।

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टैक्स बढ़ाने से भी राजस्व समान ही रहा
नोमुरा ने भी कहा, 'सिगरेट पर ज्यादा टैक्स का लक्ष्य इसका उपभोग कम करना होता है, लेकिन इससे अवैध सिगरेट को बढ़ावा मिलता है और उपभोक्ता ज्यादा सस्ते और टैक्स नहीं चुकाने वाले तस्करी कर लाए हुए सिगरेट की ओर रुख करते हैं। 2012-13 से 2017-18 के दौरान टैक्स दरों में बढ़ोतरी के बावजूद राजस्व लगभग समान ही रहा, क्योंकि वैध सिगरेट की बिक्री कम हुई और अवैध सिगरेट की बिक्री बढ़ गई। 2017-18 के बाद से टैक्स में स्थिरता देखने को मिली, जिससे अवैध कारोबार के बढ़ने की गति थोड़ा धीमी पड़ी। ऐसे में टैक्स में इस तरह अचानक बढ़ोतरी से फिर अवैध कारोबार को बढ़ावा मिलेगा।

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