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Crisil Report: पर्सनल लोन लेने से परहेज कर रहे लोग; उपभोग खर्च घटने की आशंका, क्रिसिल की रिपोर्ट में दावा
Sat, 09 Nov 2024 10:30 AM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Sat, 09 Nov 2024 10:30 AM IST
सार
अक्तूबर में कुल बैंक ऋण वृद्धि सितंबर की तुलना में 13 प्रतिशत से घटकर 11.5 प्रतिशत हो गई, जो एक महत्वपूर्ण गिरावट को दर्शाता है। सितंबर के लिए क्षेत्र विशेष के आंकड़ों से पता चलता है कि कई श्रेणियों में ऋण वृद्धि में कमी आई। ऋण वृद्धि में कमी से अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता खर्च घटने की आशंका गहरा गई है। आइए जानें इस बारे में क्रिसिल की रिपोर्ट में क्या गया गया है।
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भारतीय अर्थव्यवस्था।
- फोटो : amarujala
विस्तार
देश में लोग पर्सनल लोन लेने से परहेज करने लगे हैं। इससे अर्थव्यवस्था में उपभोग खर्च घटने की आशंका बढ़ गई है। बैंक ऋण खासकर व्यक्तिगत ऋणों (पर्सनल लोन) की वृद्धि में हाल ही में आई मंदी, शहरी क्षेत्रों में खपत को प्रभावित कर सकता है। क्रिसिल की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी का विलंबित प्रभाव व्यापक अर्थव्यवस्था में दिखाई देने लगा है, पिछले तीन महीनों में बैंक ऋण वृद्धि में कमी आई है।
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यह मंदी विशेष रूप से पर्सलन लोन के मामले में है, जो चिंताजनक है। इसका शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ता खर्च से सीधा संबंध है। रिपोर्ट में कहा गया है, "RBI की पिछली दर वृद्धि का विलंबित प्रभाव धीरे-धीरे व्यापक अर्थव्यवस्था में महसूस किया जा रहा है। पिछले तीन महीनों में बैंक ऋण वृद्धि धीमी रही है, जिसमें व्यक्तिगत ऋण भी शामिल हैं। इससे खपत, खासकर शहरी क्षेत्रों में प्रभावित होने की संभावना है।"
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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अक्तूबर में कुल बैंक ऋण वृद्धि सितंबर की तुलना में 13 प्रतिशत से घटकर 11.5 प्रतिशत हो गई, जो एक महत्वपूर्ण गिरावट को दर्शाता है। सितंबर के लिए क्षेत्र विशेष के आंकड़ों से पता चलता है कि कई श्रेणियों में ऋण वृद्धि में कमी आई। उदाहरण के लिए, कृषि ऋण की वृद्धि दर 17.7 प्रतिशत से घटकर 16.4 प्रतिशत हो गई, जबकि औद्योगिक क्षेत्र को दिया जाने वाला ऋण 9.7 प्रतिशत से घटकर 8.9 प्रतिशत हो गया।
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इसी तरह, सेवा क्षेत्र में ऋण वृद्धि 13.9 प्रतिशत से थोड़ी कम होकर 13.7 प्रतिशत हो गई, और उपभोक्ता खर्च के एक महत्वपूर्ण चालक, व्यक्तिगत ऋण में 13.9 प्रतिशत से 13.4 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। रिपोर्ट के अनुसार, व्यक्तिगत ऋण श्रेणी में करीब से देखने पर पता चलता है कि क्रेडिट कार्ड की वृद्धि, जो खर्च को काफी हद तक बढ़ावा देती है, 19.9 प्रतिशत से तेजी से घटकर 18 प्रतिशत हो गई।
सेवा क्षेत्र के एक घटक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के लिए ऋण वृद्धि भी 11.9 प्रतिशत से काफी कम होकर 9.5 प्रतिशत हो गई, जिसका आंशिक कारण RBI की ओर से हाल ही में जोखिमपूर्ण ऋण प्रथाओं पर की गई कार्रवाई है। ऋण में यह मंदी शहरी खपत पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है, क्योंकि कई शहरी परिवार आवश्यक और गैर-आवश्यक दोनों तरह की खरीदारी के लिए व्यक्तिगत ऋण और क्रेडिट कार्ड पर निर्भर हैं।
ऋण वृद्धि पर अंकुश लगने से, शहरी उपभोक्ताओं को ऋण तक पहुंच में कमी का सामना करना पड़ सकता है, जिससे संभावित रूप से उनके खर्च में कटौती हो सकती है और समग्र आर्थिक गति प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि आरबीआई दरों में कटौती पर विचार करने से पहले क्रेडिट ग्रोथ में मंदी से उत्पन्न जोखिमों की सीमा पर और स्पष्टता का इंतजार कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, "आरबीआई दरों में कटौती करने से पहले इन जोखिमों के बारे में स्पष्टता प्राप्त करना चाहेगा। कुल मिलाकर, हम इस वित्तीय वर्ष में आरबीआई की ओर से एक दर कटौती की उम्मीद करते हैं"।