सर्राफा बाजार: चार दिन की गिरावट के बाद सोने में 200 रुपये की तेजी; जानें कमजोर डॉलर और कच्चे तेल का क्या असर
कमजोर अमेरिकी डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के कारण शुक्रवार को सोने की कीमतों में 200 रुपये प्रति 10 ग्राम की वृद्धि हुई, जिससे चार सत्रों की गिरावट का सिलसिला थम गया। हालांकि, साप्ताहिक आधार पर सोने और चांदी दोनों में गिरावट दर्ज की गई।
विस्तार
राष्ट्रीय राजधानी में शुक्रवार को सोने की कीमतों में 200 रुपये प्रति 10 ग्राम की मामूली वृद्धि दर्ज की गई। कच्चे तेल की दरों में नरमी और अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने से निवेशकों को राहत मिली। एक उतार-चढ़ाव भरे सप्ताह के बाद यह सुधार आया है। 99.9 फीसदी शुद्धता वाला सोना 1,52,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।
पिछले सत्र में यह 1,52,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। स्थानीय कारोबारियों के अनुसार, चांदी की कीमतें सभी करों सहित 2.37 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर अपरिवर्तित रहीं। निवेशकों द्वारा निचले स्तरों पर खरीदारी करने से सोने की कीमतों में लगातार चार सत्रों की गिरावट के बाद सुधार देखा गया। हालांकि, बहुमूल्य धातु सोने ने सप्ताह का अंत 4,000 रुपये या 2.5 फीसदी की गिरावट के साथ किया। चांदी को भी 10,000 रुपये या 4 फीसदी का नुकसान हुआ। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक - कमोडिटीज, सौमिल गांधी ने बताया कि शुक्रवार को सोने की कीमतों में सुधार हुआ। यह कच्चे तेल की दरों और अमेरिकी डॉलर के हाल के उच्च स्तरों से नीचे आने के कारण हुआ। गांधी ने यह भी कहा कि इस सुधार के बावजूद, सप्ताह की शुरुआत में डॉलर में महत्वपूर्ण वृद्धि के कारण सोना अभी भी साप्ताहिक गिरावट की ओर अग्रसर है।
सोने की कीमतों में सुधार क्यों हुआ?
सौमिल गांधी ने कहा कि बहुमूल्य धातुओं के लिए कुछ प्रमुख चुनौतियां कम हो गईं। विदेशी बाजारों में भी यह उछाल समान रूप से दिखाई दिया। हाजिर सोना 27.73 अमेरिकी डॉलर या करीब 1 फीसदी बढ़कर 4,301.40 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस हो गया। चांदी 1.4 फीसदी बढ़कर 64.72 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। कोटक सिक्योरिटीज की एवीपी कमोडिटी रिसर्च, कायनात चैनवाला ने बताया कि नरम अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड बाजारों में स्थिरीकरण ने उछाल का समर्थन किया।
साप्ताहिक गिरावट का कारण क्या रहा?
कायनात चैनवाला ने कहा कि शुक्रवार के सुधार के बावजूद, बुलियन साप्ताहिक गिरावट की ओर अग्रसर रहा। बढ़ी हुई ऊर्जा कीमतें और लगातार मुद्रास्फीति की चिंताएं बनी हुई हैं। मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़े फेडरल रिजर्व द्वारा और सख्ती की उम्मीदों को मजबूत कर रहे हैं। डॉलर सूचकांक 101.40 के करीब दो महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया था। 10-वर्षीय ट्रेजरी प्रतिफल 5.18 फीसदी पर चढ़ गया, जो 2007 के बाद का उच्चतम स्तर है।
आगे क्या उम्मीद की जा सकती है?
कायनात चैनावाला ने आगे कहा कि तेल, डॉलर और प्रतिफल में और नरमी बुलियन का समर्थन कर सकती है। हालांकि, मजबूत आंकड़े और फेड के सख्त संकेत बाधाएं बने रहेंगे। निवेशकों को इन वैश्विक कारकों पर नजर रखनी होगी।