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बाजार से 1.20 लाख करोड़ कम कर्ज लेगी सरकार; दूसरी छमाही में जुटाएगी 7.86 लाख करोड़, तैयार किया नया प्लान

Sat, 26 Sep 2026 06:22 AM IST
प्रशांत तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sat, 26 Sep 2026 06:22 AM IST
सार

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बाजार से उधारी का लक्ष्य 17.20 लाख करोड़ रुपये से घटाकर 15.99 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। दूसरी छमाही में 7.86 लाख करोड़ रुपये सरकारी बॉन्ड के जरिए जुटाए जाएंगे, जिसमें 15,000 करोड़ रुपये के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड शामिल हैं। पूरी उधारी 23 साप्ताहिक नीलामियों के जरिए होगी।

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Government borrow 1.20 lakh crore less from market to raise 7.86 lakh crore in second half plan for exchequer
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 में बाजार से लिए जाने वाले कर्ज का लक्ष्य घटा दिया है। सरकार अब पूरे वित्त वर्ष में 15.99 लाख करोड़ रुपये की बाजार उधारी करेगी। बजट में इसके लिए 17.20 लाख करोड़ रुपये का अनुमान रखा गया था। इस तरह सरकार ने सालाना उधारी के लक्ष्य में 1,20,494 करोड़ रुपये यानी करीब 1.20 लाख करोड़ रुपये की कटौती की है।

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दूसरी छमाही में 7.86 लाख करोड़ रुपये की उधारी
वित्त मंत्रालय ने बताया कि वित्त वर्ष की दूसरी छमाही यानी अक्तूबर 2026 से मार्च 2027 के बीच सरकार 7.86 लाख करोड़ रुपये बाजार से उधार लेगी। यह रकम सरकारी बॉन्ड जारी करके जुटाई जाएगी। इसमें 15,000 करोड़ रुपये के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड भी शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा, दूसरी छमाही की पूरी उधारी 23 साप्ताहिक नीलामियों के जरिये जुटाई जाएगी।
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पहली छमाही में लक्ष्य से 13,500 करोड़ ज्यादा उधारी
चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर के दौरान सरकार करीब 8.13 लाख करोड़ रुपये की बाजार उधारी जुटाएगी। यह पहले तय 8 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य से लगभग 13,500 करोड़ रुपये अधिक है। पहली और दूसरी छमाही की उधारी को मिलाकर पूरे वित्त वर्ष के लिए संशोधित बाजार उधारी 15,99,506 करोड़ रुपये बैठती है। एजेंसी
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क्या होता है सरकारी बाजार उधार?
सरकार की आमदनी और खर्च के बीच अंतर होने पर उसे अतिरिक्त धन की जरूरत पड़ती है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए सरकार बाजार से पैसा उधार लेती है। इसके लिए वह सरकारी बॉन्ड या प्रतिभूतियां जारी करती है। इन बॉन्ड को बैंक, बीमा कंपनियां, म्यूचुअल फंड और दूसरे निवेशक खरीदते हैं। तय अवधि पूरी होने पर सरकार मूल रकम लौटाती है और ब्याज भी देती है।

ग्रीन बॉन्ड से क्या होगा?
दूसरी छमाही की उधारी में 15,000 करोड़ रुपये सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड के जरिए जुटाए जाएंगे। इस रकम को सरकार पर्यावरण और हरित परियोजनाओं से जुड़े कामों में लगाने के लिए इस्तेमाल करती है। सरकार की पहली छमाही की उधारी योजना में भी सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड शामिल थे। वित्त मंत्रालय ने मार्च में बताया था कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में 8.20 लाख करोड़ की उधारी योजना में 15,000 करोड़ के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड शामिल थे।

ब्याज चुकाने में भी खर्च होता है उधारी का हिस्सा
सरकार की उधारी का एक बड़ा हिस्सा पुराने कर्ज पर ब्याज चुकाने में भी जाता है। वित्त मंत्रालय के जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने इस अवधि में 4.27 लाख करोड़ रुपये ब्याज भुगतान पर खर्च किए थे। कुल सरकारी खर्च 17.62 लाख करोड़ रुपये रहा।


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3 साल से 50 साल तक के बॉन्ड होंगे जारी
दूसरी छमाही में सरकार अलग-अलग अवधि के सरकारी बॉन्ड जारी करेगी। इनमें 3, 5, 7, 10, 15, 30, 40 और 50 साल की अवधि वाले बॉन्ड शामिल हैं। कुल उधारी में 10 साल की अवधि वाले बॉन्ड की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 26% होगी। इसके बाद 15 साल वाले बॉन्ड की हिस्सेदारी 17.6% और 5 साल के बॉन्ड की 12.1% होगी।

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