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Defence Budget 2024: जानें इस बार बजट में रक्षा क्षेत्र के हाथ क्या लगा? क्या खरीद पाएंगे ज्यादा गोला-बारूद?
Tue, 23 Jul 2024 02:51 PM IST
निर्मल कांत
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली।
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 23 Jul 2024 02:51 PM IST
सार
Defence Budget 2024: सरकार ने 2024-25 के लिए रक्षा बजट का हिस्सा 2023-24 (संशोधित) में 4,55,897 करोड़ रुपये से घटाकर 4,54,773 करोड़ रुपये कर दिया है। जबकि 2023-24 में बजट अनुमान 4,32,720 करोड़ रुपये था।
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केंद्रीय बजट 2024-25
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मोदी सरकार 3.0 के पहले बजट में रक्षा क्षेत्र को कुछ खास फायदा नहीं दिया है। रक्षा क्षेत्र को इस बजट से काफी आशा थी कि सरकार रक्षा खरीद को बढ़ाने के लिए रक्षा क्षेत्र की झोली भरेगी। वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए रक्षा सेक्टर के लिए 4.54 लाख करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है, जो कि पिछले आवंटन 4.55 लाख करोड़ रुपये से मामूली कम है। ऐसे वक्त में जब भारतीय सेना अपने हथियारों को अपग्रेड करने में जुटी है, ऐसे में ये बजट बेहद कम माना जा रहा है। जबकि चीन और पाकिस्तान ने अपने रक्षा बजट में बड़ा इजाफा किया है।
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रक्षा बजट के तीन हिस्से होते हैं। इनमें राजस्व, पूंजीगत परिव्यय और पेंशन के लिए राशि आवंटित की जाती है। रेवेन्यू में सैलरी बांटी जाती है। वहीं पूंजीगत परिव्यय में हथियार और दूसरा जरूरी उपकरण खरीदे जाते हैं।
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रक्षा क्षेत्र में पूंजीगत बजट में ही बढ़ोतरी
सरकार ने 2024-25 के लिए रक्षा बजट का हिस्सा 2023-24 (संशोधित) में 4,55,897 करोड़ रुपये से घटाकर 4,54,773 करोड़ रुपये कर दिया है। जबकि 2023-24 में बजट अनुमान 4,32,720 करोड़ रुपये था। रक्षा बजट 2024 के लिए 6,21,940 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। जिसमें निर्धारित राजस्व खर्च (रेवेन्यू) 4,39,700 करोड़ रुपये, पूंजीगत खर्च (कैपिटल एक्सपेंडिचर) 1,82,240 करोड़ रुपये है। फरवरी में जारी किए गए अंतरिम बजट के कुल आवंटन में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अंतरिम बजट से पूंजीगत परिव्यय में केवल 10,000 करोड़ की वृद्धि हुई है। देखा जाए, तो केवल रक्षा क्षेत्र में पूंजीगत बजट में ही बढ़ोतरी हुई है। यह पहले 1,72,000 करोड़ रुपये (लगभग 21.5 बिलियन डॉलर) था। यह पिछले वर्ष के बजट अनुमान से लगभग 10 हजार करोड़ रुपये (1.250 बिलियन डॉलर) अधिक है।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के 7वें केंद्रीय बजट में वित्त वर्ष 2025 में रक्षा के लिए 4.54 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो फरवरी में जारी किए गए अंतरिम बजट 6.22 लाख करोड़ रुपये से काफी कम है। रक्षा के लिए पूंजीगत व्यय 1.72 ट्रिलियन रुपये है। भारत का रक्षा उत्पादन 2023-24 में रिकॉर्ड 1.27 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जिसमें बड़ा हिस्सा घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग का है। वहीं सरकार का लक्ष्य 2028-29 तक मिलिट्री हार्डवेयर एक्सपोर्ट को 50,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाने की योजना है।
सरकार ने पिछले साल रक्षा बजट के लिए 5.93 लाख करोड़ रुपये दिए थे। वित्त वर्ष 2024-25 के अंतरिम बजट में सबसे ज्यादा रक्षा क्षेत्र को ही मिला था। कुल बजट में इसकी हिस्सेदारी 8 फीसदी थी। इस साल जब अंतरिम बजट जारी किया था, तो अपने भाषण में निर्मला सीतारमण ने बताया था कि रक्षा क्षेत्र के लिए डीप-टेक टेक्नोलॉजी को मजबूत किया जाएगा। इसका मकसद हथियारों के लिए देश को आत्मनिर्भर बनाना है। डीप टेक स्टार्ट अप के जरिए मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में रिसर्च को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि रक्षा में इसका इस्तेमाल किया जा सके।
चीन का बजट हमसे ज्यादा
अप्रैल 2024 को स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की रक्षा खर्च पर जो रिपोर्ट आई थी, उसके आंकड़ों के मुताबिक 2023 में सबसे अधिक सैन्य खर्च वाले टॉप 10 देशों में 83.6 बिलियन डॉलर के खर्च के साथ भारत चौथे नंबर है। वहीं इसके मुकाबले में चीन के रक्षा खर्च की बात करें, तो 296 बिलियन डॉलर के साथ चीन दूसरे नंबर पर है। भारत का रक्षा बजट चीन के रक्षा बजट से एक-तिहाई कम है।
रक्षा क्षेत्र में रिसर्च पर बजट दोगुना करने की जरूरत
संसदीय कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की थी देश को आने वाले सालों में रक्षा क्षेत्र में रिसर्च पर बजट दोगुना करने की जरूरत है। फिलहाल रक्षा अनुसंधान का जितना बजट है, वह सिर्फ देश को आत्मनिर्भर बनाने या उसकी रक्षा करने के लिए ही काफी है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आवंटन पर क्या कहा
रक्षा मंत्री सिंह ने एक्स पर लिखा, जहां तक रक्षा मंत्रालय को आवंटन का सवाल है। मैं 6,21,940.45 करोड़ रुपये का आवंटन देने के लिए वित्त मंत्री को धन्यवाद देता हूं। यह 2024-25 के लिए भारत सरकार के कुल बजट का 12.9 फीसदी है। 1,720,000 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय सशस्त्र बलों की क्षमताओं को और मजबूत करेगा। घरेलू पूजीगत खरीद के लिए 1,05,518.43 करोड़ रुपये निर्धारित करने से आत्मनिर्भरता को और गति मिलेगी। उन्होंने आगे कहा, मुझे खुशी है कि सीमा सड़कों को पूंजीगत मद के तहत पिछले बजट की तुलना में आवंटन में 30 फीसदी वृद्धि की गई है। बीआरओ को 6,500 करोड़ रुपये का यह आवंटन हमारी सीमाओं के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर को और गति देगा।