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बजट 2019: लोगों को ऐसे घर बैठे मिलेगी तनख्वाह, दो दिन बाद होगा एलान

Wed, 30 Jan 2019 01:55 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Wed, 30 Jan 2019 01:55 PM IST
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union budget 2019 farmers, unemployed will get salary while sitting in home

1 फरवरी को पेश होने वाले बजट का मुंह अबकी बार किसानों व बेरोजगारों की तरफ होगा। केंद्र सरकार अपने आखिरी बजट में सबसे ज्यादा इन्हीं को खुश करने की कोशिश करेगी। इसके लिए सरकार ने सारी तैयारियां भी कर लीं हैं।  

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खर्च करेगी 9.8 बिलियन डॉलर

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार किसानों को खुश करने के लिए 70 हजार करोड़ रुपये (9.8 बिलियन डॉलर) की राशि को खर्च करने का एलान कर सकती है। हालांकि किसानों को इस सुविधा के बाद अन्य तरह की सब्सिडी को वापस लिया जा सकता है।

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खाते में एकमुश्त ट्रांसफर होगी रकम

सरकार सभी तरह के किसानों, बेरोजगारों और गरीब लोगों को एकमुश्त 30 हजार रुपये की मदद देने का एलान कर सकती है। यह रकम सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक इस मदद को यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम (यूबीआई) के तहत दिया जाएगा। 

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खत्म हो जाएगी सब्सिडी

हालांकि इस स्कीम के लागू होने के बाद लोगों को राशन और एलपीजी सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी का फायदा नहीं मिलेगा। इसमें वो किसान भी शामिल होंगे, जो दूसरों के यहां मजदूरी करते हैं। नए प्रस्ताव के मुताबिक किसानों को खेती के लिए अब सरकार सीधे खाते में पैसे देगी। खास बात यह है कि जिन किसानों के पास अपनी जमीन नहीं है, सरकार उन्हें भी इस स्कीम में शामिल करके फायदा पहुंचाएगी। 

किया गया बड़े पैकेज का प्रावधान

इस बजट में किसानों के लिए एक बड़े राहत पैकेज का एलान हो सकता है। इस पैकेज के तहत किसानों के खाते में सीधा पैसा पहुंचा जाएगा। केंद्र सरकार अप्रैल-मई में होने वाले आम चुनाव से पहले यह पैकेज लागू करेगी। बताया जा रहा है इस पैकेज के लिए बड़े बजट का प्रावधान किया गया है। 

यह हो सकती है राशि

केंद्र सरकार प्रति एकड़ 4 हजार से लेकर के 12 हजार रुपये की राशि की मदद दे सकती है। हालांकि कई लोगों का मानना है कि यह राशि 30 हजार रुपये सालाना भी हो सकती है। छोटे व सीमांत किसानों की आय में कमी की समस्या के समाधान के उपायों को लेकर कृषि मंत्रालय का एक प्रस्ताव बैठक के एजेंडे में है। सूत्रों ने कहा कि कृषि मंत्रालय ने क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने के लिए अल्पावधि और दीर्घकालिक दोनों समाधान प्रदान करने के लिए कई विकल्पों की सिफारिश की है।

सूत्रों के अनुसार इस संबंध में अंतिम निर्णय मंत्रिमंडल की बैठक में होना है क्योंकि इसमें भारी भरकम राशि शामिल है। सूत्रों ने कहा कि मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित विकल्पों में समय पर फसल ऋण चुकाने वाले किसानों का ब्याज माफ करने का प्रस्ताव भी शामिल है। इससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त 15,000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा।.

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बीमा पॉलिसी का प्रीमियम हो सकता है माफ

खाद्य फसलों के लिए बीमा पॉलिसी लेने वालों किसानों के लिए पूरी तरह से प्रीमियम माफ करने का भी प्रस्ताव है। सरकार तेलंगाना और ओडिसा सरकारों द्वारा अपनाई गई योजनाओं का मूल्यांकन कर रही है, जिसके तहत एक निर्धारित रकम सीधे किसानों के खातों में डाली जाती है।

मालूम हो कि 2019-20 के लिए अंतरिम बजट एक फरवरी को पेश होना है। कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने हाल ही में संकेत दिया था कि सरकार 2019-20 के बजट से पहले किसानों के लिए राहत पैकेज की घोषणा करेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के पास किसी भी नई योजाना के क्रियान्वयन के लिए कम समय है। इसलिए उपाय ऐसा होना चाहिए जिसकी चुनाव के दौरान तेजी से राजनीतिक लाभ उठाया जा सके। कहा जा रहा है कि हाल में तीन राज्यों- मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में हुए विधानसभा चुनावों में हार के बाद भाजपा किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर गंभीर है।

इस स्कीम को किया जा सकता है लागू

तेलंगाना सरकार की ‘रितु बंधु’ की तरह किसान केंद्रित योजना जो कि किसानों को प्रत्यक्ष नगदी सहयोग के तौर पर 4,000 रुपये प्रति एकड़ प्रति सीजन मुहैया कराती है, को लागू किया जा सकता है। तेलंगाना की योजना सभी किसानों को कवर करती है फिर उनके पास कितनी भी भूमि हो।

भाजपा सरकार उड़ीसा में यह स्कीम ला सकती है जो कि छोटे एवं सीमांत किसानों (जिनके पास 5 एकड़ या 2 हेक्टेयर से कम जमीन है) को सुविधा मुहैया कराती है। 10वीं कृषि गणना 2015-16 के अनुसार, छोटे एवं सीमांत किसान जिनके पास दो हेक्टेअर से कम भूमि है, का भारत में समस्त किसानों में 86.2 प्रतिशत योगदान है और इनके पास 47.3 प्रतिशत फसल क्षेत्र है।

2014-15 तक, सकल बुवाई क्षेत्र 198.36 मिलियन हेक्टेयर अथवा लगभग496 मिलियन एकड़ था। इस तरह, छोटे एवं सीमांत किसानों के पास 234 मिलियन एकड़ की जमीन थी और 4000 रुपये प्रति एकड़ के नगदी सहयोग पर विचार करें तो कुल खर्च 93,600 करोड़ रह सकता है।

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