फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Trump plans hefty tax on imported drugs, risking higher prices, shortages, Indian tea industry US tariff

US Tariffs: टैरिफ के कारण महंगी हो सकती हैं जरूरी दवाएं, भारत से चाय निर्यात पर भी असर की आशंका, बढ़ी चिंता

Mon, 01 Sep 2025 05:08 PM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन/ कोलकाता
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन/ कोलकाता Published by: पवन पांडेय Updated Mon, 01 Sep 2025 05:08 PM IST
सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से दुनिया भर के देशों पर लगाए गए टैरिफ ने वैश्विक व्यापार की दिशा ही बदल दी है। पहले उन्होंने इस्पात, एल्युमीनियम और गाड़ियों पर कर लगाया, अब बारी है दवाओं और भारतीय चाय की। ट्रंप के इस फैसले सभी की चिंताएं बढ़ गई हैं।

विज्ञापन
Trump plans hefty tax on imported drugs, risking higher prices, shortages, Indian tea industry US tariff
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : ANI
loader

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने व्यापारिक कर नीतियों से हलचल मचा दी है। इस बार निशाने पर दवाइयां और भारतीय चाय उद्योग हैं। पहले से ही इस्पात, एल्युमीनियम और गाड़ियों पर भारी शुल्क लगाने वाले ट्रंप अब फार्मास्यूटिकल्स और भारतीय चाय पर भी सख्त कर लगाने की तैयारी में हैं। इससे अमेरिका के उपभोक्ताओं को महंगी दवाइयां और भारतीय चाय उद्योग को झटका लग सकता है।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें - Price Drop Alert: ₹51 कम हुए वाणिज्यिक LPG के दाम, अप्रैल से लगातार छठी कटौती; विमान टरबाइन ईंधन के दाम भी घटे
विज्ञापन


दवाओं पर कर और संभावित असर
अब तक अमेरिका में आयातित दवाओं पर ज्यादातर कोई शुल्क नहीं लगता था। लेकिन ट्रंप ने यूरोप से आने वाली कुछ दवाओं पर 15% टैरिफ लगा दिया है और संकेत दिए हैं कि अन्य देशों से आयातित दवाओं पर 200% तक शुल्क लगाया जा सकता है। फार्मा क्षेत्र का तर्क है कि अगर इतने ऊंचे कर लगाए गए तो दवाओं की कीमतें अमेरिका में और तेजी से बढ़ेंगी। स्वास्थ्य अर्थशास्त्री डीडरिक स्टाडिग का मानना है कि सबसे ज्यादा बोझ बुजुर्गों और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ेगा। सीधे तौर पर उन्हें दवाइयों की दुकान पर कीमत चुकानी होगी और परोक्ष रूप से बीमा प्रीमियम भी बढ़ेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


कंपनियों को ट्रंप ने दिया एक से डेढ़ साल का समय
ट्रंप ने हालांकि यह कहा है कि टैरिफ तुरंत लागू नहीं होंगे। उन्होंने कंपनियों को एक से डेढ़ साल का समय दिया है ताकि वे दवाओं का स्टॉक कर सकें और कुछ उत्पादन अमेरिका में शिफ्ट कर सकें। यही कारण है कि कई दवा कंपनियाँ पहले से ही अतिरिक्त आयात कर रही हैं। विश्लेषकों का अनुमान है कि अमेरिका में छह से 18 महीने का दवा भंडार पहले से मौजूद है। इस वजह से टैरिफ का असली असर 2027-28 तक महसूस होगा, जब यह स्टॉक खत्म होगा।

कोरोना महामारी के दौरान अमेरिका ने भुगता था खामियाजा
फार्मा उद्योग में कई कंपनियों ने दवाओं का उत्पादन चीन, भारत, आयरलैंड और स्विट्जरलैंड जैसे देशों में शिफ्ट किया हुआ है। अमेरिका में दवाओं और फार्मास्यूटिकल उत्पादों का व्यापार घाटा 150 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। कोरोना महामारी के समय जब देशों ने दवाओं और मेडिकल सप्लाई रोक ली थी, तब अमेरिका को विदेशों पर निर्भरता का खामियाजा भुगतना पड़ा था। इसी को देखते हुए ट्रंप अब दवा उत्पादन को अमेरिका में लाने की बात कर रहे हैं।

अमेरिका में गंभीर हो सकती है स्थिति
हालांकि, अमेरिका में नई फैक्टरियां बनाना महंगा और लंबा प्रोसेस है। साथ ही 97% एंटीबायोटिक्स और 92% एंटीवायरल जैसी दवाओं के मुख्य तत्व विदेशों में ही बनते हैं। ऐसे में सिर्फ टैरिफ लगाने से समस्या हल नहीं होगी। ब्रांडेड कंपनियां मोटे मुनाफे के कारण खर्च झेल सकती हैं, लेकिन जेनरिक दवा कंपनियां शायद बाजार से बाहर हो जाएं। अमेरिका में 92 फीसदी प्रिस्क्रिप्शन दवाएं जेनरिक ही हैं, इसलिए स्थिति गंभीर हो सकती है।

यह भी पढ़ें - Market Closing Bell: भारतीय शेयर बाजार पर लौटा निवेशकों का भरोसा; सेंसेक्स 554 अंक चढ़ा, निफ्टी 24600 के पार


भारतीय चाय पर अमेरिकी टैरिफ
इधर, भारतीय चाय उद्योग भी चिंता में है। अमेरिकी सरकार ने हाल ही में भारत से आने वाले उत्पादों पर कुल 50% शुल्क लागू कर दिया है। यह निर्णय रूस से भारत की तेल खरीद के कारण लिया गया।  भारतीय चाय संघ (आईटीए) ने कहा कि अमेरिका भारत की चाय के लिए एक अहम बाजार है। 2024 में अमेरिका ने भारत से 17 मिलियन किलोग्राम चाय खरीदी थी। मई 2025 तक यह आंकड़ा 6.26 मिलियन किलोग्राम तक पहुंच चुका है। अब नए टैरिफ से निर्यात को झटका लग सकता है।

पहले से संकट में चाय उद्योग
पश्चिम बंगाल और असम की चाय कंपनियां पहले से ही घटती कीमतों, आयातित सस्ती चाय और अस्थिर निर्यात बाजार से जूझ रही हैं। आईटीए ने सरकार से न्यूनतम स्थायी मूल्य लागू करने, परंपरागत चाय उत्पादन को बढ़ावा देने और निम्न गुणवत्ता वाली चाय के आयात को रोकने की मांग की है। भारतीय चाय उद्योग को श्रीलंका और इंडोनेशिया जैसे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। इन देशों की सरकारें अपने उद्योगों को सब्सिडी और प्रोत्साहन देती हैं। आईटीए का कहना है कि भारत सरकार को भी समान स्तर का समर्थन देना चाहिए, वरना भारत का बाजार हिस्सा धीरे-धीरे घटता जाएगा।

टैरिफ से दो मोर्चों पर दबाव
डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति से एक ओर अमेरिकी उपभोक्ताओं को महंगी दवाओं का खतरा है, वहीं दूसरी ओर भारतीय चाय किसानों और निर्यातकों पर संकट गहराने की आशंका है। दवा उद्योग कह रहा है कि सिर्फ कर लगाने से नहीं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन को अमेरिका में खड़ा करने की जरूरत है। वहीं चाय उद्योग का कहना है कि अगर सरकार ने सहारा नहीं दिया तो वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिक पाना मुश्किल होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed