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GTRI: रूसी तेल आयात पर ट्रंप का दोहरा रवैया; भू-राजनीतिक हितों के लिए चीन की भूमिका को कर रहे नजरअंदाज

Tue, 05 Aug 2025 01:56 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Tue, 05 Aug 2025 01:56 PM IST
सार

जीटीआरआई की रिपोर्ट के अनुसार चीन रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार है लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति चीन की आलोचना करने से बच रहे हैं। वे भारत पर अनुचित तरीके से निशाना साध रहे हैं और गलत आरोप लगा रहे हैं। 

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Trump double standards on Russian oil imports; ignoring China role for geopolitical interests
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

चीन रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार है, बावजूद इसके अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप गलत तरीके से भारत को निशाना बना रहे हैं। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) की हालिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका चीन की आलोचना करने से बच रहा है और भारत पर रूसी तेल आयात को लेकर अनुचित आरोप लगा रहा है।

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भू-राजनीतिक हितों के लिए ट्रंप चीन को कर रहे नजरअंदाज
इसमें कहा गया है कि ट्रंप का यह चयनात्मक रवैया भू-राजनीतिक हितों से प्रेरित हो सकता है। आंकड़ों के अनुसार, चीन ने 2024 में 62.6 अरब डॉलर मूल्य का रूसी तेल आयात किया। वहीं भारत ने 52.7 अरब डॉलर का आयात किया। इसके बावजूद, ट्रंप ने चीन की बड़ी भूमिका को नजरअंदाज करते हुए अपनी आलोचना भारत पर केंद्रित की है। 
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जीटीआरआई ने ट्रंप के दावे को किया खारिज
रिपोर्ट में ट्रंप के ट्रूथ सोशल पर हाल ही में किए गए उस दावे को भी खारिज किया गया है। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत भारी मात्रा में रूसी तेल खरीद रहा है और बड़े मुनाफे पर बेच रहा है। जीटीआरआई ने स्पष्ट किया कि यह बयान तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक है। 

भारत किसी भी देश को कच्चे तेल का निर्यात नहीं करता
थिंक टैंक ने यह भी साफ किया कि भारत रूस या अन्य किसी देश को कच्चा तेल निर्यात नहीं करता है। भारत कच्चे तेल का शुद्ध आयातक है और इसका कुल कच्चा तेल निर्यात शून्य है। भारत केवल परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करता है। इनमें डीजल और जेट ईंधन शामिल हैं। इनमें से कुछ रूसी कच्चे तेल से संसाधित होते हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि ऊर्जा आयातक देशों में यह एक मानक प्रथा है। 

भारत की रिफाइनरियां स्वतंत्र रूप से करती हैं काम
इसमें आगे कहा गया कि भारत की सार्वजनिक और निजी दोनों तेल रिफाइनरियां कच्चे तेल का स्रोत कहां से तय करना है, इसके लिए वे स्वतंत्र रूप से काम करते हैं। इन कंपनियों को रूस या किसी अन्य देश से तेल खरीदने के लिए सरकारी अनुमति की जरूरत नहीं होती। उनके निर्णय व्यावसायिक पहलुओं जैसे कीमत, आपूर्ति की विश्वसीयता और निर्यात स्थलों के नियमों पर आधारित होते हैं। 


भारत जोखिम भरे रास्तों से रहता है दूर
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर भारतीय रिफाइनरियां यह पाती हैं कि रूसी कच्चे तेल के आयात में जोखिम शामिल है, जैसे कि द्वितीयक प्रतिबंध या वैश्विक बाजारों तक सीमित पहुंच, तो वे स्वेच्छा से ऐसे आयात को कम कर सकते हैं या बंद कर सकते हैं।

रूसी तेल आयात घटकर 9.2 अरब डॉलर रह गया
उदाहरण के लिए, भारत ने वित्त वर्ष 2025 में यूरोपीय संघ को डीजल और विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) का निर्यात किया था, लेकिन रूसी कच्चे तेल से परिष्कृत उत्पादों पर यूरोपीय संघ के प्रतिबंध के कारण अब ये निर्यात बंद हो जाएंगे। ऐसे में, रिफाइनर बिना किसी सरकारी आदेश के रूसी तेल से दूर हो जाएंगे। यह प्रवृत्ति पहले से ही दिखाई दे रही है। मई 2025 में, रूस से भारत का आयात मई 2024 की तुलना में 9.8 प्रतिशत घटकर 9.2 अरब डॉलर रह गया।

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