आर्थिक मंदी के 10 सालः विश्व के कई बैंक हो गए थे तबाह, क्या अब भी है खतरा बरकरार?
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आगामी 15 सितंबर को विश्व प्रसिद्ध आर्थिक मंदी को 10 साल पूरे हो जाएंगे। इस मंदी की उपज तो अमेरिका में हुई थी, लेकिन इसका असर पूरी दुनिया में 2-3 सालों तक देखने को मिला था। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 10 साल बाद भी ऐसी आर्थिक मंदी होने का खतरा बरकरार है या नहीं।
अमेरिका ने शुरू किया व्यापार युद्ध
अमेरिका ने भारत और चीन सहित कई देशों से आयातित होने वाले सामान पर अतिरिक्त ड्यूटी लगाने का फैसला किया है। वहीं ईरान जैसे देश पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने से वहां से पेट्रोल भी आयात नहीं हो पाएगा। इससे कई देशों से अमेरिका का व्यापार युद्ध होने की आशंका फिर से दिखने लगी है। अगर व्यापार युद्ध होता है तो यह कुछ-कुछ फिर से विश्व को आर्थिक मंदी की और ले जाएगा।
अमेरिका को लगा था तब इतना झटका
10 साल पहले आर्थिक मंदी के दौरान अमेरिका की अर्थव्यवस्था को 6 से 14 ट्रिलियन डॉलर को नुकसान हुआ था इसके साथ ही देश के दो सबसे बड़े बैंक भी पूरी तरह से दिवालिया होकर समाप्त हो गए थे। मेरिल लिंच का बैंक ऑफ अमेरिका ने अधिग्रहण कर लिया था, वहीं लेहमैन ब्रदर्स ने अपने बैंकिंग व्यापार को बार्कलेज व नोमुरा को बेच दिया था।
इन छह लोगों पर दोष हो पाया था सिद्ध
इतनी बड़ी आर्थिक मंदी का जिम्मेदार करीब एक दर्जन से अधिक लोगों को बताया गया था, लेकिन आरोप केवल 6 पर ही सिद्ध हो पाए थे। इन छह लोगों में एंगलो-आइरिश बैंक के पूर्व सीईओ डेविड ड्रम, गिल्टनिर के पूर्व सीईओ लॉरस वेल्डिंग, लैंड्सबैंकी के सिगुरजोन अरणासन, कोपथिंग के पूर्व चेयरमैन सिगुरडर इनारसन व पूर्व सीईओ हरिडर मार सिगुरडर व क्रेडिट सुसे के पूर्व ग्लोबल चीफ करीम सेराजेलडिन शामिल हैं।
अभी भी खतरा है बरकरार
हालांकि इस आर्थिक मंदी के बाद भी खतरा बरकरार है। डाओ जोंस मार्च 2009 के बाद चार गुणा बढ़ चुका है। वहीं रेटिंग एजेंसी के बाजार पर आज भी पूरे विश्व में केवल 3 कंपनियों का कब्जा है। यह तीन कंपनियां ही रेटिंग व्यापार में प्रत्येक 10 डॉलर में से 9 डॉलर कमा रही हैं।
एक साल पहले भी अमेरिका के 10 बड़े बैंकों के पास आधी से ज्यादा संपत्ति थी और वो आज भी है। वहीं राष्ट्रपति ट्रंप भी 2010 में बने उस कानून को खत्म करने पर लगे हैं, जिसको इस मंदी के बाद लागू किया गया था।