द बोनस मार्केट अपडेट: रेपो रेट बढ़ने के बाद लाल निशान पर बंद हुआ बाजार; सेंसेक्स 429 अंक टूटा, निफ्टी भी पस्त
7 अक्तूबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट में 25 आधार अंक की वृद्धि के बाद सेंसेक्स 429 अंक और निफ्टी 173 अंक गिरकर बंद हुआ। धातु और ऑटो शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई, जबकि वैश्विक बाजार भी कमजोर रहे।
विस्तार
शेयर बाजार में बुधवार को दो दिन की तेजी पर विराम लग गया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा प्रमुख नीतिगत दर में बढ़ोतरी के बाद बाजार नीचे बंद हुए। बेंचमार्क सेंसेक्स 429 अंक गिरकर 72,638.70 पर आ गया। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी पूंजी की लगातार निकासी ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया।
30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 429.11 अंक या 0.59 फीसदी की गिरावट के साथ 72,638.70 पर बंद हुआ। इसके 26 घटक निचले स्तर पर और चार ऊंचे स्तर पर बंद हुए। दिन के कारोबार में सेंसेक्स 599.09 अंक या 0.81 फीसदी गिरकर 72,468.72 के निचले स्तर पर पहुंच गया था। पचास शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 173.05 अंक या 0.76 फीसदी गिरकर 22,603.05 पर समाप्त हुआ।
विश्लेषकों ने बताया कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी कोषों की लगातार निकासी ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया। सेंसेक्स की 30 कंपनियों में टाइटन, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, एशियन पेंट्स, इंफोसिस, लार्सन एंड टुब्रो और अदाणी पोर्ट्स प्रमुख रूप से गिरने वाले शेयरों में शामिल थे। कोटक महिंद्रा बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फाइनेंस लाभ में रहे। वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट कच्चा तेल 1.41 फीसदी बढ़कर 102 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गया।
आरबीआई ने क्यों बढ़ाई ब्याज दरें?
भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को अपनी बेंचमार्क ब्याज दर 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50 फीसदी कर दी। यह लगभग चार साल में पहली बढ़ोतरी है। आरबीआई ने संकेत दिया कि बढ़ती मुद्रास्फीति और कमजोर होती मुद्रा के कारण आगे भी दरें बढ़ाई जा सकती हैं। छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति ने रेपो दर बढ़ाने के लिए सर्वसम्मति से मतदान किया। दिसंबर 2024 में गवर्नर संजय मल्होत्रा के पदभार संभालने के बाद यह पहली ऐसी वृद्धि है।
नीतिगत रुख में बदलाव का क्या मतलब है?
हालांकि इस कदम की व्यापक रूप से उम्मीद थी, केंद्रीय बैंक ने "कैलिब्रेटेड टाइटनिंग" की ओर रुख करके एक आश्चर्य पैदा किया। इस बदलाव ने निकट भविष्य में दर में कटौती की संभावना को प्रभावी ढंग से खारिज कर दिया है। मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति के निर्णयों की घोषणा करते हुए कहा कि निकट अवधि में दर में कटौती संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि आगे की नीतिगत कार्रवाई केवल दर वृद्धि या विराम हो सकती है। यह सब मौजूदा स्थितियों और भविष्य के दृष्टिकोण पर निर्भर करेगा।
विदेशी निवेशक और वैश्विक बाजार का क्या हाल रहा?
एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मंगलवार को 2,961.30 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि आरबीआई की दर वृद्धि के बाद घरेलू बाजार ने नीतिगत रुख में बदलाव पर अधिक तेजी से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वृद्धि अनुमानों में संशोधन ने घरेलू बुनियादी बातों की ताकत की पुष्टि की। हालांकि, उच्च मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण और आरबीआई के मूल्य स्थिरता पर जोर ने बाजार की भावना को प्रभावित किया। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225 सूचकांक और हैंग सेंग सूचकांक निचले स्तर पर बंद हुए। यूरोप के बाजार भी गिरावट में कारोबार कर रहे थे, जबकि अमेरिकी बाजार मंगलवार को ऊंचे स्तर पर बंद हुए थे।