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टाटा विवाद: समूह और ट्रस्ट्स के बीच विवाद पर वित्त मंत्री की दोटूक, बोलीं- आपसी बातचीत से जल्द सुलझाएं मतभेद

Mon, 02 Nov 2026 10:48 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Mon, 02 Nov 2026 10:48 PM IST
सार

टाटा समूह और टाटा ट्रस्ट्स के बीच मतभेदों पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दोनों पक्षों को आपसी बातचीत से विवाद सुलझाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि टाटा समूह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है और विवाद सार्वजनिक नहीं होना चाहिए। वित्त मंत्री ने विदेशी निवेश और निजी निवेश की स्थिति पर भी बात की। आखिर सरकार इस विवाद में हस्तक्षेप करेगी या दोनों पक्ष खुद समाधान निकालेंगे? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
 

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Tata Dispute: Finance Minister Urges Tata Group and Trusts to Resolve Differences Amicably Through Dialogue
बजट से पहले अर्थव्यवस्था और विदेशी निवेश को लेकर क्या बोलीं वित्त मंत्री? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

टाटा समूह और टाटा ट्रस्ट्स के बीच चल रहे मतभेदों को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दोनों पक्षों को आपसी बातचीत से मामला सुलझाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि टाटा समूह भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और देश के कारोबार, उद्योग तथा वैश्विक पहचान में उसका बड़ा योगदान है। ऐसे में समूह के भीतर चल रहा विवाद सार्वजनिक मंचों पर नहीं आना चाहिए। वित्त मंत्री ने साफ किया कि सरकार इस संवेदनशील मामले में जल्दबाजी में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहती। उनका मानना है कि दोनों पक्षों को व्यावसायिक समझ और परिपक्वता दिखाते हुए जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल करनी चाहिए।

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को फाइनेंशियल एक्सप्रेस लीडरशिप अवॉर्ड्स 2026 के दौरान टाटा समूह और टाटा ट्रस्ट्स के बीच मतभेदों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इस मामले को सुलझाने के लिए संबंधित पक्षों के बीच संवाद जरूरी है। आइए, पहले  बयान की प्रमुख बातें जानते हैं-

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  • टाटा समूह और टाटा ट्रस्ट्स को अपने मतभेद आपसी बातचीत से सुलझाने चाहिए।
  • सरकार इस मामले में जल्दबाजी में टिप्पणी नहीं करना चाहती।
  • टाटा समूह भारतीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • विवाद को सार्वजनिक मंचों पर बढ़ने के बजाय जल्द सामान्य स्थिति में लाना चाहिए।
  • सरकार चाहती है कि दोनों पक्ष जल्द समाधान पर पहुंचें।
  • वित्त मंत्री ने सरकार की ओर से दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने के सवाल पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।


वित्त मंत्री ने टाटा समूह के विवाद को लेकर क्या कहा?
निर्मला सीतारमण ने कहा कि टाटा समूह और टाटा ट्रस्ट्स के बीच मतभेद बेहद संवेदनशील मामला है। इसे सुलझाने के लिए व्यावसायिक समझ और परिपक्वता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में कारोबार से जुड़ी समझ रखने वाले लोगों को मिलकर रास्ता निकालना चाहिए। वित्त मंत्री के मुताबिक, सरकार इस मामले पर जल्दबाजी में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहती, क्योंकि इसका समाधान संबंधित पक्षों को आपस में बैठकर निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को बातचीत करनी चाहिए, ताकि विवाद जल्द खत्म हो और स्थिति सामान्य हो सके। सीतारमण ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह के मतभेदों का सार्वजनिक रूप से सामने आना उचित नहीं है।

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टाटा समूह को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अहम क्यों मानती हैं सीतारमण?
वित्त मंत्री ने टाटा समूह की ब्रांड वैल्यू, दुनिया भर में उसकी पहचान और भारतीय अर्थव्यवस्था में उसके योगदान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि टाटा समूह कई क्षेत्रों में काम करता है और देश की आर्थिक गतिविधियों में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। सीतारमण ने समूह को स्थापित करने में पारसी समुदाय के योगदान को भी रेखांकित किया। उनके मुताबिक, टाटा समूह की वैश्विक प्रतिष्ठा और देश के लिए उसके महत्व को देखते हुए इस विवाद को सावधानी से सुलझाने की जरूरत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि समूह का नेतृत्व परिपक्वता दिखाएगा और जल्द ही दोनों पक्ष किसी समाधान पर पहुंचेंगे। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि सरकार दोनों पक्षों को समझौते के लिए आमने-सामने बैठाने की पहल करेगी या नहीं।

बजट से पहले अर्थव्यवस्था और विदेशी निवेश को लेकर क्या बोलीं वित्त मंत्री?
कार्यक्रम के दौरान निर्मला सीतारमण ने आगामी केंद्रीय बजट से पहले अर्थव्यवस्था की चुनौतियों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि सरकार विदेशी निवेश में हो रही निकासी और देश की विकास गति बनाए रखने के लिए पूंजी की जरूरत को लेकर चिंतित है। भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर सात प्रतिशत से ऊपर बनाए रखने के लिए निवेश जरूरी है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार खुदरा निवेशकों और शेयर बाजार में निवेश करने वालों की चिंताओं से परिचित है। उन्होंने माना कि कर व्यवस्था भी निवेश से जुड़े फैसलों को प्रभावित करने वाला एक कारण है, लेकिन वैश्विक हालात और चुनौतियां भी बदल रही हैं। उनके मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से शुद्ध निकासी बढ़ी है, हालांकि अब निवेश का पैसा वापस आना भी शुरू हुआ है।


निजी निवेश और जीएसटी सुधारों को लेकर सरकार को क्या उम्मीद है?
सीतारमण ने कहा कि सरकार निजी क्षेत्र के निवेश में तेजी के संकेत देख रही है। उनके मुताबिक, अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों के बाद बाजार में मांग को लेकर स्थिति बेहतर हुई है। मांग की स्पष्टता बढ़ने से निजी कंपनियों को निवेश के फैसले लेने में मदद मिल रही है। सरकार का मानना है कि निजी क्षेत्र का निवेश बढ़ना अर्थव्यवस्था की रफ्तार बनाए रखने के लिए जरूरी है। वित्त मंत्री ने विदेशी निवेश की निकासी, शेयर बाजार की चिंताओं और घरेलू निवेश की स्थिति को एक साथ जोड़कर अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार इन परिस्थितियों पर नजर रख रही है और विकास की गति बनाए रखने के लिए निवेश को महत्वपूर्ण मानती है।
 

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