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परिवहन: बीएस-7 मानकों की समय-सीमा में वाहन निर्माताओं को मिल सकती है राहत, जानिए क्या है अपडेट

Mon, 02 Nov 2026 06:16 PM IST
द बोनस शरद पाण्डेय , द बोनस, नई दिल्ली
शरद पाण्डेय , द बोनस, नई दिल्ली Published by: द बोनस Updated Mon, 02 Nov 2026 06:16 PM IST
सार

  • 1 अप्रैल 2029 से निर्मित होने वाली सभी नई यात्री कारों के मॉडलों पर बीएस-7 उत्सर्जन मानक लागू करने का प्रस्ताव है। 1 अप्रैल 2030 से एन1 श्रेणी के हल्के मालवाहक वाहनों के लिए यह नियम लागू होगा।
  • 1 अप्रैल 2031 से एम2, एम3, एन2 और एन3 श्रेणी के भारी वाहनों व बसों के लिए पहली समय-सीमा तय की गई है, जिसमें कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर जैसे प्रदूषकों को नियंत्रित किया जाना है।

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Vehicle manufacturers will get relief in BS7 gudilines timeline Know what is the updates
BS7 कार (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : AI

विस्तार

देश में बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए लाए जा रहे कड़े बीएस-7 उत्सर्जन मानकों को लेकर वाहन निर्माताओं को राहत मिलने की उम्मीद है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस संबंध में संकेत दिए हैं। हालांकि यह राहत कितनी मिलेगी और वाहन निर्माताओं को कितना फायदा होगा, इस संबंध में अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने नए नियमों पर प्रतिभागियों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। 

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वाहन निर्माताओं की क्या है मांग?

वाहन निर्माताओं के संगठन सियाम ने मंत्रालय को पत्र लिखकर भारी वाहनों (जैसे बस और ट्रक) के टायरों तथा ब्रेक से निकलने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने वाले नियमों को अप्रैल 2031 के बजाय अप्रैल 2035 से लागू करने का सुझाव दिया है।

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मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि सरकार पर्यावरण और भविष्य को ध्यान में रखते हुए बीएस-7 को हर हाल में लागू करना चाहती है, लेकिन वाहन निर्माताओं की चिंताओं पर बातचीत के रास्ते खुले हैं।

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बीएस-7 लागू होने का समय 

  • 1 अप्रैल 2029 से निर्मित होने वाली सभी नई यात्री कारों के मॉडलों पर बीएस-7 उत्सर्जन मानक लागू करने का प्रस्ताव है। 1 अप्रैल 2030 से एन1 श्रेणी के हल्के मालवाहक वाहनों के लिए यह नियम लागू होगा।
  • 1 अप्रैल 2031 से एम2, एम3, एन2 और एन3 श्रेणी के भारी वाहनों व बसों के लिए पहली समय-सीमा तय की गई है, जिसमें कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर जैसे प्रदूषकों को नियंत्रित किया जाना है।
  • 1 अप्रैल 2032 जो दूसरा चरण है, इसमें एन1 श्रेणी के वाहनों के लिए ब्रेक पार्टिकल सीमा, बैटरी की लाइफ और टायर से होने वाले उत्सर्जन के नियम शामिल होंगे। 1 अप्रैल 2033 से भारी वाहनों के लिए ब्रेक पार्टिकल नियम और उन्नत 'ऑन-बोर्ड मॉनिटरिंग सिस्टम' लगाना अनिवार्य होगा, जो चलते समय वास्तविक उत्सर्जन पर नजर रखेगा।
  • 1 अप्रैल 2035 जो अंतिम चरण होगा, सभी संबंधित श्रेणियों के लिए ब्रेक पार्टिकल और टायर से जुड़े अंतिम प्रावधान लागू किए जाएंगे।
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