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निर्मला सीतारमण: पूंजीगत व्यय, एआई और बैंकिंग सुधारों पर क्या रोडमैप? वित्त मंत्री ने बताई प्राथमिकता

Mon, 02 Nov 2026 05:03 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Mon, 02 Nov 2026 05:03 PM IST
सार

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक वृद्धि और राजकोषीय अनुशासन के संतुलन पर जोर देते हुए पूंजीगत व्यय, एआई प्रशिक्षण और 2047 तक शत-प्रतिशत बीमा कवरेज का रोडमैप पेश किया है। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए अभी क्लिक करें।

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Fiscal Discipline Meets Growth: FM Sitharaman Outlines India's Capex, AI Skills, and Banking Roadmap
निर्मला सीतारमण - फोटो : amarujala.com

विस्तार

देश की आर्थिक वृद्धि की गति को बनाए रखने और वित्तीय संतुलन साधने के बीच केंद्र सरकार ने पूंजीगत व्यय को अपनी प्राथमिकता घोषित किया है। सोमवार को एचएसबीसी इंडिया के तीसरे वार्षिक वित्तीय समावेशन सम्मेलन में एचएसबीसी इंडिया के सीईओ हितेंद्र दवे के साथ बातचीत के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ किया कि आर्थिक विस्तार और जनकल्याणकारी योजनाओं का समर्थन करते हुए भी सार्वजनिक व्यय को जिम्मेदार और नियंत्रित रखा जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि जब तक निजी क्षेत्र अपनी क्षमता विस्तार या नई इकाइयां स्थापित करने के लिए आगे नहीं आता, तब तक सरकार पूंजीगत व्यय के जरिए विकास को गति देती रहेगी।

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आर्थिक वृद्धि और राजकोषीय घाटे के बीच कैसे संतुलन बनाएगी सरकार?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार, पिछले चार से पांच वर्षों में पूंजीगत व्यय ने अपने 'मल्टीप्लायर इफेक्ट' के माध्यम से उत्कृष्ट परिणाम दिए हैं, इसलिए यह सरकार की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहेगा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वृद्धि को बनाए रखने के साथ-साथ राजकोषीय घाटे पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा, "हमें राजकोषीय रूप से विवेकपूर्ण होने की आवश्यकता है; अन्यथा यह लाभ की स्थिति नहीं होगी"। उन्होंने रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राजकोषीय अनुशासन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी और खर्च रचनात्मक व जिम्मेदार तरीकों से किया जाएगा।

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टैक्स से जुड़ी चिंताओं पर क्या बोलीं वित्त मंत्री?

आगामी बजट में विदेशी डॉलर निवेश और निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल बनाने से जुड़े सवालों के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बड़ा बयान दिया है। मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री ने स्वीकार किया कि बाजार की मौजूदा परिस्थितियों, FII (विदेशी संस्थागत निवेशकों) की निकासी और बदलती चुनौतियों के कारण खुदरा और इक्विटी निवेशकों के बीच चिंता तथा संवेदनशीलता बढ़ी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि देश की विकास दर को 7 प्रतिशत से ऊपर बनाए रखने के लिए आवश्यक पूंजी और निवेशकों की इन तमाम चिंताओं पर सरकार बजट से पहले ध्यानपूर्वक विचार करेगी।

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गरीबी उन्मूलन पर वित्त मंत्री ने क्या कहा?

वित्त मंत्री ने राजकोषीय समेकन और जनकल्याणकारी प्रतिबद्धताओं के बीच संतुलन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सरकारी योजनाओं ने बुनियादी सेवाओं तक आम जनता की पहुंच को मजबूत किया है। इनमें खाद्य सुरक्षा, आवास, स्वच्छता, पेयजल और स्वास्थ्य बीमा योजनाएं शामिल हैं।

  • विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला: सीतारमण ने विश्व बैंक की एक रिपोर्ट का जिक्र किया, जिसके अनुसार भारत में गरीबी का स्तर वित्तीय वर्ष 2023 के अंत तक लगभग 25 प्रतिशत से घटकर मात्र 2 प्रतिशत पर आ गया है।
  • सुधार के मुख्य कारक: उन्होंने इस सुधार का श्रेय लक्षित कल्याणकारी योजनाओं की कुशल डिलीवरी, व्यापक वित्तीय समावेशन और आवश्यक सेवाओं की आसान पहुंच को दिया।

 बैंकिंग सुधारों के अगले चरण की क्या रणनीति है?

वित्तीय समावेशन के अगले चरण में सरकार ने तीन मुख्य क्षेत्रों- ऋण तक पहुंच, बीमा और पेंशन- को अपनी प्राथमिकता तय किया है। 

  • बीमा लक्ष्य: सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक देश में सभी के लिए बीमा कवरेज हासिल करना है।
  • व्यवसाय के लिए ऋण: नया कारोबार शुरू करने या उसका विस्तार करने के इच्छुक लोगों के लिए सस्ती और आसान क्रेडिट पहुंच को आवश्यक बताया गया है।
  • बैंकिंग समिति: 'विकसित भारत' के विजन को सहयोग देने के लिए भारतीय बैंकिंग प्रणाली की आवश्यकताओं की समीक्षा करने के उद्देश्य से एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो उद्योगपतियों और विशेषज्ञों से परामर्श कर अपनी सिफारिशें सौंपेगी।

रोजगार और युवाओं के कौशल विकास के लिए क्या योजना है?

उद्योग जगत की आवश्यकताओं और स्नातकों के कौशल के बीच के अंतर को समाप्त करने के लिए सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर विशेष ध्यान दे रही है। वित्त मंत्री ने घोषणा की कि सरकार देश के प्रत्येक जिले में एआई प्रशिक्षण-सक्षम केंद्र स्थापित करना चाहती है। इन केंद्रों के माध्यम से युवाओं को एआई-सक्षम नौकरियों के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे युवाओं के रोजगार की संभावनाओं को नई मजबूती मिलेगी।

वित्त मंत्री का यह संबोधन दर्शाता है कि सरकार आर्थिक विकास को गति देने के लिए पूंजीगत व्यय पर निर्भरता बनाए रखते हुए राजकोषीय अनुशासन से कोई समझौता नहीं करेगी। 2047 तक शत-प्रतिशत बीमा, हर जिले में एआई प्रशिक्षण और विकसित भारत के लिए बैंकिंग ढांचे का पुनर्गठन जैसे कदम भारत की दीर्घकालिक अर्थव्यवस्था की ठोस नींव तैयार करने का संकेत देते हैं।

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