निवेश-बचत: खर्च की आदत में छोटे बदलाव से वित्तीय सेहत में बड़ा परिवर्तन; छोटी कमाई पर भी कर सकते हैं बड़ी बचत
बचत आपकी सुरक्षित वित्तीय जीवन की बुनियाद है। केवल बड़े-बड़े कदमों से नहीं, बल्कि पैसे की बर्बादी रोकने और रोजमर्रा की छोटी-छोटी गलतियों पर काबू पाने से भी आप आसानी से बचत कर सकते हैं। आपके खर्च की आदतों में एक छोटा सा बदलाव आपकी वित्तीय सेहत में बड़ा परिवर्तन ला सकती हैं।
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वॉरेन बफे ने एक बार कहा था, खर्च करने के बाद जो बचे उसे मत बचाओ, बचाने के बाद जो बचे उसे खर्च करो। जब पैसों की समझ यानी वित्तीय साक्षरता की बात होती, तो आमतौर पर लोग सिर्फ शेयर, सोना, म्यूचुअल फंड और रियल एस्टेट जैसे निवेशों की ही बात करते हैं। हालांकि, पैसा बढ़ाने के लिए निवेश जरूरी है, लेकिन एक सुरक्षित वित्तीय जीवन की बुनियाद तो बचत ही है। बचत का मतलब सिर्फ खर्च में कटौती करना नहीं है। इसमें समझदारी से फैसले लेना, अच्छी आदतें डालना और जिंदगी के अचानक झटकों के लिए सुरक्षा कवच बनाना शामिल है। आइए बचत के उन पहलुओं को समझते हैं, जिनकी बात कम की जाती है।
मासिक बजट बनाने से करें शुरुआत
मासिक बजट बनाने से आपको अपनी आय और खर्चों पर नजर रखने में मदद मिलती है। शुरुआत करने के लिए अपने खर्चों को दो श्रेणियों में बांटें। पहला...जरूरतें जैसे किराया, किराने का सामान, बिजली-पानी बिल और दूसरा...इच्छाएं जैसे बाहर खाना, शॉपिंग, ओटीटी सब्सक्रिप्शन। इसके लिए 50-30-20 का नियम अपना सकते हैं। यानी कमाई का 50 फीसदी जरूरतों पर, 30 फीसदी इच्छाओं और 20 फीसदी बचत-निवेश पर खर्च करना चाहिए। इससे आपको स्पष्टता मिलेगी और आय में से खर्च को घटाने के बाद शेष बचने वाली राशि को बचत मानने वाली आम गलती से बच जाएंगे।
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जानें...वेतन का कितना करें बचत
आमतौर पर, आपको अपने वेतन का कम से कम 20 फीसदी हिस्सा बचत के लिए अलग रखना चाहिए। इसमें से 10-15 फीसदी रकम लंबी अवधि के निवेश (जैसे म्यूचुअल फंड, पीपीएफ और रिटायरमेंट प्लान) और 5-10 फीसदी राशि लिक्विड सेविंग या अगले कुछ समय में होने वाले खर्चों के लिए आवश्यक रूप से अलग रखें।
- अगर आप 50,000 रुपये प्रति माह कमाते हैं, तो 10,000 रुपये का निवेश या बचत करनी चाहिए।
- बचत का 50-30-20 का नियम...इसके तहत अपनी कमाई का 50 फीसदी हिस्सा जरूरतों और 30 फीसदी राशि इच्छाओं पर खर्च करें। 20 फीसदी राशि बचत एवं निवेश के साधनों में लगाएं।
100-उम्र...नियम का करें पालन
संपत्ति का सही आवंटन बचत और निवेश की मजबूत बुनियाद होती है। इसके लिए एक आसान नियम है...100 में से अपनी उम्र घटा दें। शेष जो बचेगा, अपने पोर्टफोलियो का उतना फीसदी पैसा इक्विटी में निवेश करें। इसे एक उदाहरण से समझते हैं... अगर आप 30 साल के हैं, तो इस फॉर्मूले के साथ 100 में से 30 घटाने पर 70 बचता है। इस प्रकार, आपको 70 फीसदी राशि इक्विटी यानि शेयर और म्यूचुअल फंड में एवं शेष 30 फीसदी डेट यानि एफडी/पीपीएफ और बॉन्ड में निवेश करना चाहिए। जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, आपका ध्यान आक्रामक ग्रोथ के बजाय पूंजी को सुरक्षित रखने पर केंद्रित होना चाहिए।
पैसे की बर्बादी पर नजर न होना बड़ी चुनौती
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि हमारे पास बचत के लायक पैसे नहीं हैं। लेकिन ऐसा है नहीं। असली मुश्किल आय नहीं बल्कि पैसे की बर्बादी पर नजर न होना है। फिजूलखर्जी के तीन प्रमुख स्रोतों की बात करें तो ऑनलाइन शॉपिंग की लत, अक्सर बाहर खाने जाना, बेवजह के सब्सक्रिप्शन। इसके समाधान की बात करें तो आपको हर हफ्ते अपने खर्चों की निगरानी करनी होगी। किसी भी खरीदारी से पहले खुद से पूछें कि क्या आपको वाकई उस चीज की जरूरत है या बस यूं ही खरीद रहे हैं।
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इमरजेंसी फंड बनाएं, पहले से तय करें बचत
इमरजेंसी फंड विषम हालात में वित्तीय रूप से सुरक्षित रखता है। तीन से छह महीने के बुनियादी खर्चों को किसी लिक्विड और सुरक्षित निवेश में जमा करना चाहिए। 2024 के आरबीआई हाउसहोल्ड सर्वे के अनुसार, सिर्फ 22 फीसदी भारतीय परिवारों के पास ठीक ठाक इमरजेंसी फंड है। यानी 78 फीसदी परिवार वित्तीय झटकों को झेलने की स्थिति में नहीं हैं। इसके अलावा, आजकल कई निवेश में मंथली ऑटो-डेबिट की सुविधा है। इससे जैसे ही आपकाे वेतन मिले, एक निश्चित राशि बचत खाते या व्यवस्थित निवेश योजना (एसआईपी) में भेज दी जाए। इसके लिए कुछ टूल्स की बात करें तो इसमें सैलरी-बेस्ड स्वीप-इन एफडी, विभिन्न बचत खातों में ऑटो ट्रांसफर और रेकरिंग डिपॉजिट (आरडी) शामिल हैं।
छोटे बदलावों से दिखेंगे बड़े नतीजे
बचत के लिए पूरी जिंदगी बदलने की जरूरत नहीं है। छोटे बदलावों से शुरुआत करें। जैसे चावल, दाल, तेल जैसी चीजें थोक में खरीदें, इससे 10-15 फीसदी की बचत कर पाएंगे। कर्ज को कम करने पर अधिक ध्यान दें। फोन या अप्लायंसेस जैसे सामान ईएमआई पर लेने से बचें। साथ ही, अधिक ब्याज वाले कर्ज जैसे क्रेडिट कार्ड के बकाये का सबसे पहले भुगतान करें। कर्ज कम करना एक प्रकार से छिपी हुई बचत है।