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एसएंडपी ने बरकरार रखी भारत की 'बीबीबी' रेटिंग: विकास दर इस साल रह सकती है 6.6%; जानिए क्या हैं इसके मायने

Thu, 27 Aug 2026 07:17 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Thu, 27 Aug 2026 07:17 PM IST
सार

वैश्विक चुनौतियों के बावजूद एसएंडपी ने भारत की 'बीबीबी' सॉवरेन रेटिंग और 'स्थिर' आउटलुक को बरकरार रखा है। जानिए इस साल 6.6% विकास दर रहने का अनुमान क्यों है और आगे की क्या है राह। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

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S&P Affirms India’s 'BBB' Sovereign Rating on Robust Growth and Policy Stability; Forecasts FY27 GDP at 6.6%
भारतीय अर्थव्यवस्था - फोटो : amarujala.com

विस्तार

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच अमेरिकी रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को 'बीबीबी' पर बरकरार रखा है। इसके साथ ही देश के आर्थिक आउटलुक को भी 'स्थिर' श्रेणी में बनाए रखा है। यह भरोसा दर्शाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है और नीतिगत निरंतरता के चलते देश आगे भी तेज विकास दर दर्ज करेगा। यह निर्णय ऐसे समय आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं उच्च ब्याज दरों और भू-राजनीतिक तनावों से जूझ रही हैं।

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एसएंडपी ने भारत को कौन सी रेटिंग दी है और इसके मायने क्या हैं?

एसएंडपी ने भारत की दीर्घकालिक (लॉन्ग-टर्म) सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को 'बीबीबी' और अल्पकालिक (शॉर्ट-टर्म) रेटिंग को 'ए-2' पर बरकरार रखा है। 'बीबीबी' रेटिंग निवेश-ग्रेड (इन्वेस्टमेंट-ग्रेड) के तहत आती है, जो यह दर्शाती है कि देश पर कर्ज डिफॉल्ट होने का जोखिम बेहद कम है और वह विदेशी निवेशकों के लिए एक सुरक्षित गंतव्य है। एजेंसी ने भारत के दीर्घकालिक दृष्टिकोण को 'स्थिर' रखा है। इसका मतलब है कि अगले 24 महीनों में देश की नीतियां और आर्थिक स्थिति इस रेटिंग को बनाए रखेंगी।

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रेटिंग को किन मजबूत आर्थिक आधारों से सहारा मिला है?

रेटिंग एजेंसी के अनुसार, भारत की सॉवरेन रेटिंग को सबसे बड़ा सहारा देश की गतिशील और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था से मिला है। भारत ने वित्त वर्ष 2022 से वित्त वर्ष 2026 के बीच औसतन 7.9 प्रतिशत की वार्षिक जीडीपी वृद्धि दर्ज की है। रेटिंग के प्रमुख आधार इस प्रकार हैं:

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  • नीतिगत निरंतरता: स्थिर लोकतांत्रिक संस्थान और मजबूत नीतियां बाजार में अनिश्चितता को कम करती हैं।
  • मजबूत बाहरी खाता (एक्सटर्नल बैलेंस शीट): देश का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार बाहरी झटकों से सुरक्षा देता है।
  • बुनियादी ढांचा निवेश: बुनियादी ढांचे में सरकार का भारी निवेश देश के दीर्घकालिक विकास को गति दे रहा है।

इस साल विकास दर घटने की क्या वजहें हैं और किस सेक्टर पर असर पड़ा है?

मजबूत बुनियाद के बावजूद, एसएंडपी ने चेतावनी दी है कि चालू वित्त वर्ष में भारत की विकास दर धीमी पड़कर 6.6 प्रतिशत रह सकती है। इसका मुख्य कारण वैश्विक ऊर्जा संकट (एनर्जी शॉक) और कृषि क्षेत्र की चुनौतीपूर्ण स्थितियां हैं। हालांकि, एजेंसी का मानना है कि यह सुस्ती अस्थायी है और अगले तीन वर्षों में देश की औसत जीडीपी वृद्धि दर 7 प्रतिशत सालाना रहने का अनुमान है। यह मध्यम-अवधि की वृद्धि राजकोषीय घाटे के बावजूद सरकारी कर्ज-टू-जीडीपी अनुपात को नियंत्रित रखने में मदद करेगी।

एजेंसी ने किन कमजोरियों पर चिंता जताई है?

भारत की मजबूतियों को सराहने के साथ ही रेटिंग एजेंसी ने कुछ कमजोरियों की ओर भी इशारा किया है जो रेटिंग को और ऊपर जाने से रोकती हैं:

  • कमजोर राजकोषीय प्रदर्शन: उच्च वित्तीय घाटा सरकारी खजाने पर दबाव बनाता है।
  • भारी कर्ज का बोझ: देश पर कर्ज का भारी बोझ और ब्याज चुकाने की उच्च लागत एक बड़ी चुनौती है।
  • प्रति व्यक्ति कम जीडीपी: यह देश के आर्थिक विकास की तुलना में व्यक्तिगत आय के स्तर को कम दर्शाता है।

भविष्य का परिदृश्य कैसा है और दूसरी एजेंसियां क्या कहती हैं?

एसएंडपी का यह निर्णय भारतीय नीति निर्माताओं के लिए राहत देने वाला है, जो देश की आर्थिक नीतियों को वैश्विक स्तर पर मान्यता देता है। इससे पहले इसी महीने रेटिंग एजेंसी 'फिच' (Fitch) ने भी भारत की रेटिंग को 'बीबीबी-' पर बरकरार रखा था। दोनों रेटिंग एजेंसियों का यह रुख स्पष्ट करता है कि वैश्विक चुनौतियों के बाद भी भारतीय बाजार की साख अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूत बनी हुई है और आने वाले दिनों में विदेशी निवेश का प्रवाह जारी रहने की उम्मीद है।

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