RBI: राज्य और केंद्र शासित प्रदेश लेंगे बाजार से कर्ज, जुलाई-सितंबर तिमाही में ₹2.86 लाख करोड़ जुटाने की योजना
भारतीय रिजर्व बैंक ने जानकारी दी कि राज्य और केंद्र शासित जुलाई-सितंबर 2025 की तिमाही में बाजारों से लगभग 2.86 लाख करोड़ रुपये उधारी लेने की तैयारी में है।1 जुलाई को बाजार से 18,100 करोड़ रुपए उधार लेने का प्रस्ताव है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राज्य और केंद्र शासित प्रदेश संयुक्त रूप से जुलाई-सितंबर 2025 की तिमाही में बाजारों से लगभग 2.86 लाख करोड़ रुपये जुटाने वाले हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने यह संकेत दिया है। आरबीआई ने राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ परामर्श के बाद अपेक्षित बाजार उधार योजना तय कर ली है।
ये भी पढ़ें: Industrial Production: मई 2025 में घटी औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार, नौ महीनों में सबसे कम 1.2 फीसदी की बढ़ोतरी
1 जुलाई को बाजार से जुटाए जाएंगे 18,100 करोड़ रुपए
1 जुलाई को बाजार से 18,100 करोड़ रुपए उधार लेने का प्रस्ताव है। इसमें आंध्र प्रदेश (2,000 करोड़ रुपए), असम (900 करोड़ रुपए), गुजरात (1,000 करोड़ रुपए), हिमाचल प्रदेश (1,200 करोड़ रुपए), केरल (2,000 करोड़ रुपए), महाराष्ट्र (6,000 करोड़ रुपए), राजस्थान (500 करोड़ रुपए), तमिलनाडु (2,000 करोड़ रुपए), तेलंगाना (1,500 करोड़ रुपए) और पश्चिम बंगाल (1,000 करोड़ रुपए) शामिल है।
आठ लाख करोड़ पहले छह महीनों में लिए जाएंगे
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बजट में निर्धारित 14.82 लाख करोड़ रुपये के सकल बाजार उधार में से सरकार ₹8 लाख करोड़ यानी 54% सरकार पहले छह महीनों में लेगी। यह कर्ज "डेटेड सिक्योरिटीज" यानी तय समय के लिए जारी किए गए सरकारी बॉन्ड के जरिए लिया जाएगा। सरकार यह ₹8 लाख करोड़ का कर्ज 26 हफ्तों में हर हफ्ते की नीलामी के जरिए जुटाएगी। ये बॉन्ड अलग-अलग समय अवधि के होंगे जैसे 3 साल, 5 साल, 7 साल, 10 साल, 15 साल, 30 साल, 40 साल और 50 साल के लिए।
अलग-अलग अवधि के जारी होंगे बॉन्ड
वित्त मंत्रालय ने मार्च में बताया कि सरकार 2025-26 में अलग-अलग अवधि की सरकारी प्रतिभूतियों (जिसमें SGrBs भी शामिल हैं) के जरिए उधारी लेगी। इसमें उधारी का बंटवारा इस तरह होगा:
- 3 साल की अवधि के 5.3%
- 5 साल के लिए 11.3%
- 7 साल के लिए 8.2%
- 10 साल के लिए 26.2%
- 15 साल के लिए 14.0%
- 30 साल के लिए 10.5%
- 40 साल के लिए 14.0%
- 50 साल के लिए 10.5%
राजकोषीय घाटा जीडीप का 4.5 प्रतिशत नीचे रखने का लक्ष्य
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए बताया कि 2025-26 के लिए सरकार का राजकोषीय घाटा लक्ष्य जीडीपी का 4.4% रहने का अनुमान है, जो 2024-25 में संशोधित अनुमान 4.8% से कम है। सरकार का लक्ष्य है कि 2025-26 के अंत तक राजकोषीय घाटा 4.5% से नीचे लाया जाए।
वित्त वर्ष 2025-26 में बाजार से 15.4 लाख करोड़ रुपये उधार लेने की योजना
सरकार के कुल राजस्व और कुल खर्च के बीच के अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है।यह बताता है कि सरकार को कितनी रकम उधार लेनी पड़ सकती है। 1 फरवरी को केंद्रीय बजट में घोषणा की गई थी, सरकार की वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान बाजार से 15.4 लाख करोड़ रुपये उधार लेने की योजना है। सरकार का लक्ष्य पूंजीगत व्यय के लिए बाजार उधार का उपयोग करना है, क्योंकि सरकार इस उधार का इस्तेमाल मुख्य रूप से पूंजीगत खर्च के लिए करेगी, क्योंकि यह खर्च अर्थव्यवस्था में महंगाई नहीं बढ़ाता।