Biz Updates: श्रीलंका में सरकारी कंपनियों के निजीकरण का विरोध, हाईकोर्ट से चेन्नई की कंपनी को मिली राहत
Biz Updates: श्रीलंका ने देश की दिवालिया अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के सुधारों के तहत घाटे में चल रहे सरकारी उद्यमों के निजीकरण की योजना बनाई है। अब बौद्ध धर्मगुरु एक असामान्य कदम उठाते हुए इस पर कड़ा विरोध जता रहे हैं। उधर चेन्नई में धन शोधन के आरोपों का सामना कर रही एक कंपनी को हाईकोर्ट से राहत मिली है।
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श्रीलंका में राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे नीत सरकार को अब शक्तिशाली बौद्ध धर्मगुरुओं के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने देश की दिवालिया अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए सुधारों के तहत घाटे में चल रहे सरकारी उद्यमों के निजीकरण की योजना बनाई है। अब बौद्ध धर्मगुरु एक आसामान्य कदम उठाते हुए इस पर कड़ा विरोध जता रहे हैं।
चार बौद्ध संप्रदायों के प्रमुखों ने राष्ट्रपति विक्रमसिंघे को लिखे एक पत्र में, जो वित्त मंत्री भी हैं को सलाह दी कि "राजनीतिक हस्तक्षेप, भर्ती, संसाधनों के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार विरोधी उपाय करके राज्य उद्यमों के बेहतर प्रबंधन के लिए कदम उठाए जाने चाहिए"। उन्होंने उन्हें सूचित किया कि समाज में, राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों के पुनर्गठन के कथित प्रयास पर व्यापक आलोचना की जा रही है।
बौद्ध बहुल देश में भिक्षु श्रीलंका के शासन का एक शक्तिशाली हिस्सा हैं। राजनीतिक नेताओं को परंपरा के अनुसार शासन पर उनकी सलाह पर ध्यान देने की आवश्यकता होती है। विक्रमसिंघे ने श्रीलंकन एयरलाइंस, दूरसंचार, राज्य बिजली प्रदाता, सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (सीईबी) और सरकारी बैंकों जैसी राज्य के स्वामित्व वाली संस्थाओं के पुनर्गठन की इच्छा व्यक्त की है। यह उन सुधारों का हिस्सा है, जिन्हें सरकार ने चार साल के लिए 2.9 अरब डॉलर की आईएमएफ सुविधा हासिल करने के लिए जरूरी बनाया है।
धन शोधन के मामले में चेन्नई की कंपनी को राहत
मद्रास उच्च न्यायालय ने धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज एक मामले में शहर की कंपनी ओशन लाइफस्पेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय के पास लंबित आगे की सभी कार्यवाही पर रोक लगा दी है।
न्यायमूर्ति एमएस रमेश और न्यायमूर्ति सुंदर मोहन की खंडपीठ ने अंतरिम रोक लगा दी और कंपनी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के लिए एक मार्च की तारीख तय की है। याचिका में पीएमएलए के तहत ईडी के समक्ष लंबित कार्यवाही को रद्द करने की मांग की गई थी। कंपनी के प्रबंध निदेशक सिल्वेनस किंग पीटर ने अपनी याचिका में कहा है कि कंपनी के पूर्व निदेशक बालासुब्रमण्यम श्रीराम ने गलतफहमी के कारण झूठे आरोपों के साथ आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है।
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पेटीएम के संस्थापक और सीईओ विजय शेखर शर्मा ने कहा कि क्यूआर कोड और साउंडबॉक्स सुविधा 15 मार्च के बाद भी काम करती रहेगी क्योंकि कंपनी आरबीआई के प्रतिबंधों के बाद संकट का सामना कर रही है। विजय शेखर शर्मा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "पेटीएम क्यूआर, साउंडबॉक्स और ईडीसी (कार्ड मशीन) 15 मार्च के बाद भी हमेशा की तरह काम करते रहेंगे। आरबीआई द्वारा जारी नवीनतम एफएक्यू इसे स्पष्ट करता है। पेटीएम के मुखिया ने कहा है कि किसी भी अफवाह में न फंसें और न ही किसी को डिजिटल इंडिया को चैंपियन बनाने से खुद को रोकने दें।