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SEBI : संस्थानों से 67228 करोड़ रुपये का बकाया नहीं वसूल सका सेबी, 70 फीसदी बकाया राशि फंसी

Thu, 03 Nov 2022 06:57 AM IST
योगेश साहू एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Thu, 03 Nov 2022 06:57 AM IST
सार

पूंजी बाजार नियामक ने अपनी रिपोर्ट में कहा, 2021-22 में जांच के लिए प्रतिभूति कानून के उल्लंघन से जुड़े नए मामलों की संख्या 59 थी। यह आंकड़ा 2020-21 के 94 मामलों से काफी कम है।

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SEBI could not recover dues of Rs 67228 crore from institutions, 70 percent dues stuck
सेबी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बाजार नियामक सेबी संस्थानों से 67,228 करोड़ रुपये का बकाया नहीं वसूल सका। इसलिए, इस रकम को अब अलग कर दिया गया है। 2021-22 की सालाना रिपोर्ट में नियामक ने कहा, 96,609 करोड़ का बकाया उन संस्थाओं से वसूले जाने की जरूरत है, जिन्होंने जुर्माने का भुगतान नहीं किया है। बाजार निगरानी के कारण जुर्माने का भुगतान करने में ये संस्थान विफल रहे और निवेशकों के पैसे वापस करने के निर्देशों का पालन नहीं किया।

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वसूली में आ रही मुश्किल पर भारतीय प्रतिभूति एवं विनियामक बोर्ड (सेबी) ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा, सभी तरीके अपनाने के बावजूद बकाया वसूली नहीं की जा सकी। साथ ही, उसने स्पष्ट किया कि इस तरह के बकाये को अलग करना एक प्रशासनिक अधिनियम है। आगे अगर किसी पैमाने में कोई बदलाव किया जाता है तो वह अधिकारियों को इन संस्थानों से इस रकम की वसूली से नहीं रोकेगा।
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सहारा और पीएसीएल पर सर्वाधिक बकाया 
96,609 करोड़ रुपये में 63,206 करोड़ यानी 65 फीसदी बकाया सामूहिक निवेश योजना (सीआईएस) से जुड़ा है। यह रकम पीएसीएल लि. व सहारा समूह की कंपनी सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड के सार्वजनिक निर्गमों से संबंधित है। साथ ही, कुल बकाये का 70% यानी 68,109 करोड़ विभिन्न अदालतों और नियुक्त समितियों के समक्ष समानांतर कार्यवाही के अधीन है।
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उल्लंघन के मामले घटे
पूंजी बाजार नियामक ने अपनी रिपोर्ट में कहा, 2021-22 में जांच के लिए प्रतिभूति कानून के उल्लंघन से जुड़े नए मामलों की संख्या 59 थी। यह आंकड़ा 2020-21 के 94 मामलों से काफी कम है। कुल 59 में से 38 मामले बाजार और कीमतों में हेराफेरी से संबंधित थे। भेदिया कारोबार (इनसाइडर ट्रेडिंग) के 17 और बाकी चार मामले प्रतिभूति कानून के उल्लंघन से जुड़े थे। पिछले वित्त वर्ष के दौरान कुल 169 मामलों की जांच पूरी की गई। 2019-20 में 94 नए मामले मिले थे और कुल 140 मामलों की जांच पूरी की गई।


जांच का मकसद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करना
जांच का उद्देश्य सबूत जुटाने के साथ अनियमितताओं और नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों व संस्थाओं की पहचान करना है ताकि उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके। जांच के दौरान बैंक खाते एवं केवाईसी विवरण, संस्थान के बारे में जानकारी, कॉल डाटा रिकॉर्ड व बाजार मध्यस्थों से प्राप्त जानकारी का भी विश्लेषण किया गया। 

  • 2021-22 में 176 मामलों में प्रवर्तन कार्रवाई शुरू हुई। 226 मामले निपटाए गए। मार्च, 2022 तक 426 मामले लंबित थे।
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