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एसबीआई रिसर्च का सुझाव: महंगे ईंधन में खर्च हो रहा स्वास्थ्य और रसोई का पैसा
Wed, 14 Jul 2021 06:11 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, मुंबई
एजेंसी, मुंबई
Published by: देव कश्यप
Updated Wed, 14 Jul 2021 06:11 AM IST
सार
- एसबीआई रिसर्च का सुझाव...तेल पर तत्काल टैक्स घटाए सरकार
- 40 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा टैक्स व उत्पाद शुल्क में जा रहा
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पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : pixabay
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विस्तार
पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों की वजह से लोग स्वास्थ्य और रसोई के खर्च में कटौती करने को मजबूर हैं। एसबीआई रिसर्च ने मंगलवार को बताया कि महंगे ईंधन की वजह से किराना, स्वास्थ्य व अन्य उपयोगी वस्तुओं पर होने वाला खर्च कम होता जा रहा है।
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एसबीआई रिसर्च की मुख्य अर्थशास्त्री सौम्य कांति घोष ने कहा, सरकार को तेल पर टैक्स में तत्काल कटौती करनी चाहिए। इसकी वजह से पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। देश के अधिकतर राज्यों में पेट्रोल 100 रुपये लीटर के पार हो गया है, जबकि डीजल भी तिहरे अंक के नजदीक है।
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केंद्र और राज्य सरकारें तेल पर 40 रुपये प्रति लीटर से भी ज्यादा का टैक्स व उत्पाद शुल्क वसूल रही हैं। 2020 में महामारी के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम में बड़ी गिरावट आई थी, तब सरकार ने उत्पाद शुल्क बढ़ाकर अतिरिक्त कमाई की। अब वैश्विक बाजार में कच्चा तेल कोविड पूर्व स्तर से भी ऊपर पहुंच गया है। बावजूद इसके सरकारों ने टैक्स बढ़ोतरी को वापस नहीं लिया।
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ईंधन पर ज्यादा खर्च महंगाई बढ़ाएगा
घोष ने कहा, ईंधन पर खर्च बढ़ने से न सिर्फ स्वास्थ्य, किराना व अन्य सुविधा उत्पादों की बिक्री पर असर पड़ेगा, बल्कि इससे खुदरा महंगाई भी बढ़ने का जोखिम है। एसबीआई कार्ड के विश्लेषकों का दावा है कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से इन उत्पादों की मांग लगातार घटती जा रही है। इतना ही नहीं ईंधन के दाम 10 फीसदी बढ़ते हैं, तो खुदरा महंगाई में 0.50 फीसदी का इजाफा होता है। यही कारण है कि मई और जून में लगातार खुदरा महंगाई आरबीआई के तय 6 फीसदी के दायरे से ऊपर रही।
खत्म हो रही लोगों की बचत
एसबीआई रिसर्च के मुताबिक, केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने मई में 6.30 फीसदी खुदरा महंगाई बताई थी, जबकि देश के कई इलाकों में लॉकडाउन था। लिहाजा ये आंकड़े वास्तविक तस्वीर नहीं दिखाते और जून में खाद्य व अखाद्य उत्पादों की खपत भी घटी है। महंगाई लगातार बढ़ने से लोगों की बचत का पैसा भी खत्म हो रहा। जून, 2021 में बचत खर्च करने वाले जिलों की संख्या मार्च, 2021 के मुकाबले दोगुने से भी अधिक हो गई है। जून में माल ढुलाई, यातायात, विनिर्माण पीएमआई, स्टील खपत सहित कई क्षेत्रों में बड़ी गिरावट दिखी है।