{"_id":"67d2310fd3a3e86c2d028f9d","slug":"sbi-report-vegetable-prices-fall-sharply-due-to-consumption-reduction-of-non-vegetarian-food-due-to-maha-kumbh-2025-03-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Report: महाकुंभ के कारण मांसाहारी खाने की खपत घटी, सब्जियों की महंगाई में तेज गिरावट; RBI 1% घटा सकता है दर","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
Report: महाकुंभ के कारण मांसाहारी खाने की खपत घटी, सब्जियों की महंगाई में तेज गिरावट; RBI 1% घटा सकता है दर
Thu, 13 Mar 2025 06:42 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अजीत सिंह, अमर उजाला
अजीत सिंह, अमर उजाला
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Thu, 13 Mar 2025 06:42 AM IST
सार
एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य एवं पेय पदार्थों की महंगाई में भारी नरमी (मासिक आधार पर 1.85 फीसदी घटकर 3.84%) के कारण फरवरी में खुदरा महंगाई 7 महीने के निचले स्तर 3.6% पर आ गई। यह गिरावट सब्जियों के दाम में कमी के कारण हुई, जो 20 महीनों के बाद नकारात्मक 1.07 फीसदी पर आ गई।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला/ एजेंसी
विस्तार
खुदरा महंगाई में तेज गिरावट के पीछे इस बार महाकुंभ का योगदान है। एसबीआई की रिपोर्ट कहती है कि महाकुंभ के दौरान लोगों ने मांसाहारी खाना से परहेज किया। इससे लहसुन और प्याज की खपत में भारी कमी आई। सब्जियों में इन दोनों का योगदान सबसे ज्यादा होता है। इसलिए इनकी खपत घटने से सब्जियों की महंगाई घटी है।
विज्ञापन
एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य एवं पेय पदार्थों की महंगाई में भारी नरमी (मासिक आधार पर 1.85 फीसदी घटकर 3.84%) के कारण फरवरी में खुदरा महंगाई 7 महीने के निचले स्तर 3.6% पर आ गई। यह गिरावट सब्जियों के दाम में कमी के कारण हुई, जो 20 महीनों के बाद नकारात्मक 1.07 फीसदी पर आ गई। इसमें 80 फीसदी गिरावट केवल तीन सब्जियों (लहसुन, आलू, टमाटर) के कारण हुई। दिलचस्प यह है कि सबसे अधिक गिरावट लहसुन में हुई है, जो संभवतः महाकुंभ के दौरान मांसाहारी वस्तुओं की कम खपत को दर्शाती है।
विज्ञापन
फलों की महंगाई 10 साल के शीर्ष पर
फलों की महंगाई 10 साल के शीर्ष 14.82 फीसदी पर पहुंच गई है। कारण यह है कि महाकुंभ में लोगों ने उपवास रखा और फलों का सेवन किया। मांसाहारी वस्तुओं (अंडा/मांस/मछली) की खपत में कमी भी इसी पवित्र मेले के कारण हुई है। खुदरा महंगाई जनवरी से मार्च तिमाही के दौरान 3.9 फीसदी और 2024-25 में औसतन 4.7 फीसदी तक रह सकती है। वित्त वर्ष 2026 में यह 4 से 4.2 फीसदी के बीच रह सकती है।
विज्ञापन
- रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल और जून के बीच दो बार रेपो दर घट सकती है। हालांकि, अगस्त में कटौती का चक्र रुकने के बाद अक्तूबर से फिर से शुरू हो सकता है। रुपये में लगातार गिरावट का असर आने वाले महीनों में दिख सकता है।