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Rupee: डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमत का असर, आयात-विदेश में पढ़ाई-यात्रा महंगी; निर्यातकों को फायदा

Sun, 25 Jan 2026 02:49 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Sun, 25 Jan 2026 02:49 PM IST
सार

डॉलर के मुकाबला भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है और बीती 23 जनवरी को यह रिकॉर्ड निचले स्तर 92 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया। आइए जानते हैं कि रुपये की कीमत के लगातार नीचे जाने का अर्थव्यवस्था और हमारे आयात-निर्यात पर क्या असर पड़ेगा। 

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डॉलर के मुकाबले रुपया निचले स्तर पर पहुंचा - फोटो : पीटीआई

विस्तार

बीती 23 जनवरी को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर ऐतिहासिक निचले स्तर 92 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया। इसके चलते कच्चे तेल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक सामान तक के आयात, विदेश में पढ़ाई और विदेश यात्रा महंगी होने की आशंका है, जिससे महंगाई बढ़ सकती है। लेकिन निर्यातकों को कुछ राहत मिल सकती है।
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इस महीने अब तक स्थानीय मुद्रा में 202 पैसे, या 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है। 2025 में, लगातार विदेशी फंड के बाहर जाने और डॉलर की मजबूती के कारण इसमें 5 प्रतिशत की गिरावट आई थी। रुपये के कमजोर होने का सीधा असर आयातकों पर पड़ेगा, जिन्हें उतनी ही मात्रा और कीमत के लिए ज्यादा पैसे देने होंगे। भारत पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल जैसे ईंधनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए 85 प्रतिशत विदेशी तेल पर निर्भर है। हालांकि, यह भारतीय निर्यातकों के लिए राहत की बात है क्योंकि उन्हें डॉलर के बदले ज्यादा रुपये मिलते हैं।
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आइए जानते हैं कि लगातार कमजोर होता रुपया खर्च को कैसे प्रभावित कर सकता है
  • भारत, कच्चा तेल, कोयला, प्लास्टिक सामग्री, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक सामान, वनस्पति तेल, उर्वरक, मशीनरी, सोना, मोती, कीमती और अर्ध-कीमती पत्थर, और लोहा और स्टील आयात करता है। आयातकों को आयात की गई चीजों का भुगतान करने के लिए अमेरिकी डॉलर खरीदने पड़ते हैं। रुपये में गिरावट के साथ, चीजों का आयात करना और महंगा हो जाएगा। न सिर्फ तेल बल्कि मोबाइल फोन के पुर्जे, कुछ कारें और उपकरण जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान भी महंगे होने की आशंका है।
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  • अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपये का मतलब है कि विदेश में पढ़ाई और महंगी हो जाएगी, क्योंकि छात्रों को विदेशी संस्थानों द्वारा चार्ज किए जाने वाले हर डॉलर के लिए ज़्यादा रुपये देने होंगे।
  • कमजोर स्थानीय मुद्रा का मतलब है कि यात्रा खर्च के लिए एक अमेरिकी डॉलर खरीदने के लिए ज्यादा रुपये देने होंगे।
  • अनिवासी भारतीय (NRI) जो घर पैसे भेजते हैं, वे रुपये के मूल्य में ज्यादा पैसे भेजेंगे।
निर्यात में मिलेगा फायदा
  • रुपया कमजोर होने से निर्यातकों को फायदा मिल सकता है क्योंकि उन्हें एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ज्यादा रुपये मिलेंगे। हालांकि, आयात पर निर्भर निर्यातकों को भारतीय मुद्रा के कमजोर होने से फायदा नहीं हो सकता है।
  • ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में देश का आयात 8.7 प्रतिशत बढ़कर 63.55 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। व्यापार घाटा दिसंबर 2025 में 25.04 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि पिछले साल नवंबर में यह 24.53 अरब अमेरिकी डॉलर और दिसंबर 2024 में 22 अरब अमेरिकी डॉलर था।
  • कच्चे तेल का आयात, जिसकी कीमत ज्यादातर अमेरिकी डॉलर में होती है, दिसंबर 2025 में लगभग 6 प्रतिशत बढ़कर 14.4 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। चांदी का आयात भी लगभग 80 प्रतिशत बढ़कर 75 करोड़ अमेरिकी डॉलर हो गया। हालांकि, सोने का आयात 12 प्रतिशत घटकर 4.13 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया।
  • थिंक टैंक GTRI ने सुझाव दिया है कि भारत को लंबे समय तक आर्थिक स्थिरता हासिल करने के लिए विकास और महंगाई नियंत्रण के बीच सावधानी से संतुलन बनाना होगा। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) के अनुसार, एक तरफ, गिरते रुपये ने वैश्विक बाजारों में भारतीय उत्पादों की कीमत प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाया है, लेकिन रत्न और आभूषण और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उच्च आयात निर्भरता वाले क्षेत्रों के लिए मुद्रा लाभ कम हो सकता है।
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