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Retail Inflation: कृषि और ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े श्रमिकों के लिए जून में बढ़ी खुदरा मुद्रास्फीति

Thu, 21 Jul 2022 12:47 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Thu, 21 Jul 2022 12:47 AM IST
सार

श्रम मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान में कहा कि कृषि और ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति जून, 2022 में क्रमश: 6.43 प्रतिशत और 6.76 प्रतिशत रही। मई, 2022 में यह क्रमश: 6.67 और सात प्रतिशत थी।

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Retail inflation for farm workers and rural labourers rise in June
खुदरा महंगाई (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कुछ खाद्य पदार्थों की ऊंची कीमतों के कारण जून में कृषि और ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े श्रमिकों के लिए खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर क्रमशः 6.43 प्रतिशत और 6.76 प्रतिशत हो गई।

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पिछले वर्ष जून में कृषि श्रमिकों के लिए खुदरा मुद्रास्फीति 3.83 प्रतिशत और ग्रामीण मजदूरों के लिए चार प्रतिशत थी। जून 2022 में कृषि मजदूरों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई-एएल) 1,125 अंक पर था जबकि ग्रामीण श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई-आरएल) 1,137 अंक रहा। वार्षिक आधार पर, दोनों मामूली रूप से अधिक हैं। वहीं, मई में सीपीआई-एएल 1,119 अंक पर जबकि सीपीआई-आरएल 1,131 अंक पर था।
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श्रम मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान में कहा कि ‘‘कृषि और ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति जून, 2022 में क्रमश: 6.43 प्रतिशत और 6.76 प्रतिशत रही। मई, 2022 में यह क्रमश: 6.67 और सात प्रतिशत थी।’’
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ताजा आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जून में खेतिहर मजदूरों और ग्रामीण मजदूरों के लिए खाद्य महंगाई दर क्रमश: 5.09 फीसदी और 5.16 फीसदी थी। यह एक साल पहले की अवधि में दर्ज क्रमशः 2.67 प्रतिशत और 2.86 प्रतिशत की तुलना में अधिक है।

बयान के अनुसार, कृषि मजदूरों और ग्रामीण मजदूरों के सामान्य सूचकांक में वृद्धि की दिशा में प्रमुख योगदान क्रमशः 3.69 अंक और 3.79 अंक की सीमा तक खाद्य समूह से आया। यह मुख्य रूप से चावल, गेहूं-आटा, ज्वार, मक्का, दूध, मांस, ताजा मछली, मुर्गी, सूखी मिर्च, मिश्रित मसाले, सब्जियां और फलों सहित विभिन्न वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण हुआ।


कृषि मजदूरों के मामले में सूचकांक में 19 राज्यों में एक से 10 अंक की वृद्धि दर्ज की गई। तमिलनाडु 1,299 अंकों के साथ सूचकांक तालिका में शीर्ष पर रहा जबकि हिमाचल प्रदेश 884 अंकों के साथ सबसे नीचे रहा। ग्रामीण मजदूरों के संबंध में सूचकांक में 20 राज्यों में एक से 10 अंक की वृद्धि दर्ज की गई। तमिलनाडु 1,289 अंकों के साथ सूचकांक तालिका में सबसे ऊपर है जबकि हिमाचल प्रदेश 935 अंकों के साथ सबसे नीचे है। कृषि मजदूरों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में सबसे अधिक वृद्धि केरल में और ग्रामीण मजदूरों के लिए सबसे ज्यादा वृद्धि मध्यप्रदेश में रहा।

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