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Repo Rate Cut: रेपो दरों में कमी रणनीतिक फैसला, मांग बरकरार रखने में मिलेगी मदद
Wed, 09 Apr 2025 11:13 AM IST
अभिषेक दीक्षित
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Wed, 09 Apr 2025 11:13 AM IST
सार
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रेपो रेट कटौती का एलान कर दिया है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट में तत्काल प्रभाव से 0.25 फीसदी की कटौती का फैसला सर्वसम्मति से लिया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, 'मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्यों ने नीतिगत रेपो दर को तत्काल प्रभाव से 25 आधार अंकों से घटाकर 6% करने के लिए मतदान किया।'
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आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा
- फोटो : PTI
विस्तार
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने रेपो दरों में लगातार दूसरी बार 25 बेसिस अंकों की कटौती कर बाजार को बड़ी राहत दी है। इस कटौती के साथ रेपो दर 6.0 प्रतिशत पर आ गई है जो फरवरी के पहले 6.50 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। इससे बैंकों को आरबीआई से सस्ता कर्ज मिल सकेगा और इसका असर खुदरा कर्ज धारकों को होगा। लगातार दूसरी बार रेपो दरों में कटौती होने से बैंकों को यह लाभ अपने कर्जधारकों तक पहुंचाने का भी दबाव बढ़ेगा और इस कारण होम लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई में कुछ कमी आ सकती है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वार के बीच रेपो दरों की कटौती को एक रणनीतिक फैसला भी माना जा रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण यही है कि ट्रंप के टैरिफ वार से वैश्विक मंदी की आशंका गहरा गई है। माना जा रहा है कि इससे अमेरिका में भारतीय उत्पाद महंगे होंगे और उसकी खपत में कमी आ सकती है। ऐसे में भारतीय कंपनियों को झटका लग सकता है।
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लेकिन यदि अमेरिकी बाजार में कमी की कुछ भरपाई भारतीय उपभोक्ताओं के द्वारा की जा सके तो यह न केवल कंपनियों के लिए राहत भरी खबर होगी, बल्कि इससे बाजार को स्थिरता भी मिलेगी। रेपो दरों में कटौती होने से यदि कर्ज की दरों में कमी आती है तो इससे भारतीय बाजार में वस्तुओं की मांग बढ़ेगी। यही कारण है कि इसे एक समयोचित उचित निर्णय माना जा रहा है।
आर्थिक मामलों के जानकार डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि पिछले कुछ समय से खुदरा बाजार में महंगाई पर नियंत्रण लगा है। सब्जियां, फलों और अनाज की कीमतों में लगाम लगी है। इससे खुदरा महंगाई दर कंट्रोल में आई है। तभी से अनुमान लगाया जा रहा था कि आरबीआई रेपो दरों में कटौती कर सकता है। और उम्मीद के अनुसार आरबीआई ने पहले फरवरी में और अब अप्रैल में लगातार दो बार रेपो दरों में कटौती किया है।
ब्याज दरों में कमी से बाजार में खपत बढ़ाने में मदद मिलेगी। ईएमआई के कम होने से ग्राहकों को महंगाई की मार से बचाने और पचत को दूसरी वस्तुओं की खपत में लगाने में मदद मिलेगी। वैश्विक अनिश्चितता के बीच घरेलू मांग बढ़ाने के लिए यह कदम लाभकारी साबित हो सकता है।
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