पीएलआई : अमूल, आईटीसी समेत पैकेट बंद समान बेचने वाली 60 कंपनियों को मिली मंजूरी, पढ़ें बिजनेस की पांच खबरें
खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय ने 10,900 करोड़ रुपये की पीएलआई योजना के तहत लाभ पाने की इच्छुक खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों से रुचि पत्र (ईओआई) मांगे थे। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 24 जून, 2021 थी।
विस्तार
खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय ने उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत अमूल, आईटीसी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज, पारले एग्रो, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और नेस्ले इंडिया सहित पैकेटबंद खाद्य सामान बेचने वाली 60 कंपनियों के आवेदनों को मंजूरी दे दी है। मंत्रालय ने सोमवार को जानकारी दी।
अमूल, आईटीसी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, ब्रिटानिया और नेस्ले आदि के आवेदनों को मंजूरी
खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय ने 10,900 करोड़ रुपये की पीएलआई योजना के तहत लाभ पाने की इच्छुक खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों से रुचि पत्र (ईओआई) मांगे थे। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 24 जून, 2021 थी। कुल 91 आवेदन मिले थे। इस साल मार्च में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10,900 करोड़ के खर्च के साथ खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए पीएलआई योजना को मंजूरी दी थी। आइए जानते हैं बिजनेस की पांच महत्वपूर्ण खबरों के बारे में...
नए साल से 2.5 फीसदी महंगे होंगे टाटा मोटर्स के वाणिज्यिक वाहन
टाटा मोटर्स अपने वाणिज्यिक वाहनों की कीमतें एक जनवरी से 2.5% तक बढ़ाने जा रही है। कंपनी ने सोमवार को कहा कि कच्चे माल की लागत बढ़ने से यह कदम उठाना पड़ रहा है। वाणिज्यिक वाहनों की कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला सभी श्रेणियों पर लागू होगा। टाटा मोटर्स ने कहा, इस लागत वृद्धि का बड़ा बोझ वह खुद उठा रही है, लेकिन अब कुछ बोझ ग्राहकों पर डालना पड़ रहा है। मारुति सुजुकी भी दाम बढ़ाने वाली है।
संजीव मेहता फिक्की के अगले अध्यक्ष होंगे
हिंदुस्तान यूनिलीवर के चेयरमैन-एमडी संजीव मेहता उद्योग मंडल फिक्की के अगले अध्यक्ष होंगे। वह मौजूदा अध्यक्ष उदय शंकर की जगह लेंगे।
श्रमिक संगठनों का फरवरी में हड़ताल
केंद्रीय श्रमिक संगठनों के संयुक्त मंच ने अगले साल संसद के बजट सत्र के दौरान 23 और 24 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। बयान के मुताबिक, केंद्र की जनविरोधी और मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ हड़ताल करेंगे।
खाद सब्सिडी 1.30 लाख करोड़ पहुंचेगी
केंद्र सरकार की खाद सब्सिडी चालू वित्त वर्ष में 1.30 लाख करोड़ पहुंच सकती है, जो बजट प्रावधान से 62% ज्यादा है। क्रिसिल ने कहा कि कमजोर मांग के बावजूद लागत बढ़ने से खाद सब्सिडी खर्च 62 फीसदी या 50,000 करोड़ रुपये बढ़ सकता है।