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Nepal-China: पोखरा एयरपोर्ट के कारण चीन नेपाल पर हावी, ड्रैगन के कर्ज का भयानक जाल, भूराजनीतिक झगड़ा भी चिंता
Tue, 17 Oct 2023 09:44 PM IST
ज्योति भास्कर
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Tue, 17 Oct 2023 09:44 PM IST
सार
नेपाल का पोखरा एयरपोर्ट दुनियाभर में चर्चित है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इस एयरपोर्ट के पीछे चीन की चौंकाने वाली भूमिका सामने आई है। चीन से मिले कर्ज के बोझ तले नेपाल दबता जा रहा है। साथ ही भूराजनीतिक प्रतिद्वंद्विता भी चिंता का सबब है।
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नेपाल का पोखरा एयरपोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
नेपाल का पोखरा एयरपोर्ट अपनी सुंदरता के कारण दुनियाभर में चर्चित है। हिमालय की गोद में नेपाल के प्राकृतिक सौंदर्य के बीच तैयार किए गए इस इंटरनेशनल एयरपोर्ट को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार चीन ने नेपाल की आर्थिक मदद करने के बहाने उसे कर्ज के जाल में बुरी तरह फंसा लिया है। चीनी कंपनियों ने इस एयरपोर्ट में न केवल पैसे लगाए, बल्कि तेज गति से निर्माण, अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल की शुरुआत और पहली इंटरनेशनल फ्लाइट लैंड कराने के पीछे चीन की मंशा काफी चौंकाने वाली है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, बुनियादी ढांचे पर चीन के विवादास्पद प्रभाव और भारत के साथ भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के मद्देनजर पोखरा एयरपोर्ट काफी अहम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चार दशकों से अधिक समय से, नेपाल पोखरा में एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाने के सपने देख रहा था। इसे वैश्विक पर्यटन स्थल के तौर पर भी विकसित करने की योजना थी।
राजनीतिक अस्थिरता, नौकरशाही से जुड़ी चुनौतियों और वित्तीय कठिनाइयों के कारण पोखरा एयरपोर्ट आकार नहीं ले सका। इसी बीच चीन ने वैश्विक मंच पर अमेरिकी प्रभुत्व को चुनौती दी। नेपाल की मदद करने के बहाने चीन ने अमेरिकी चुनौती के सामने एक वैकल्पिक क्षेत्र बनाने की शुरुआत की। दरअसल, नेपाल, चीन के दक्षिण में स्थित है और भारत के साथ घनिष्ठ संबंध रखता है। ऐसे में भू-राजनीतिक मोर्चे पर पोखरा एयरपोर्ट काफी अहम हो जाता है।
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न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, पोखरा हवाई अड्डे का निर्माण चीन की महत्वाकांक्षाओं का एक हिस्सा था। चीन के साथ दुनिया के कई हिस्सों में बुनियादी ढांचा विकसित करने के नाम पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के तहत कई देशों में निवेश किए हैं। उन्होंने नेपाल में भी बीआरआई के तहत निवेश का प्रस्ताव रखा, लेकिन भारत के पड़ोसी ने चीन का प्रस्ताव ठुकरा दिया।
नेपाल के इनकार के बाद पोखरा हवाई अड्डा चीन और भारत के बीच कूटनीतिक रस्साकशी का कारण भी बना। दरअसल, नेपाल सहित दर्जनों देश बेल्ट एंड रोड पहल की 10वीं वर्षगांठ के जश्न के लिए बीजिंग में जमा हुए हैं। चीन के निवेश, एयरपोर्ट बनाने में अत्यधिक लागत और खराब गुणवत्ता वाले निर्माण के कारण पोखरा जांच के दायरे में है। रिपोर्ट का दावा है कि पोखरा हवाईअड्डे के लिए उधार लेने वाला नेपाल, इतने पैसे ले चुका है कि चीनी कंपनियों को असंगत रूप से लाभ हुआ।
सरकारी स्वामित्व वाले समूह सिनोमैच के निर्माण प्रभाग- चाइना सीएएमसी इंजीनियरिंग ने पोखरा हवाईअड्डा परियोजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नेपाल ने चीन से निर्माण सामग्री और मशीनरी का आयात किया। हवाई अड्डा बनाने में चीन की कंपनियां शामिल रही हैं। सुरक्षा और औद्योगिक प्रौद्योगिकी का भी भरपूर इस्तेमाल हुआ है। परियोजना की गुणवत्ता के बारे में चीन कई दावे कर चुका है।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक जांच के हवाले से दावा किया है कि हजारों दस्तावेजों की गहन जांच से चीन की सीएएमसी इंजीनियरिंग को बड़ा मुनाफा मिलने का संकेत मिलता है। मुनाफे को बढ़ाने और अपने हितों की रक्षा के लिए चीन ने लगातार शर्तें तय कीं। इसके साथ ही, इसने व्यवस्थित रूप से नेपाली निगरानी को ख़त्म कर दिया। परिणामस्वरूप, ऋण चुकाने के लिए यात्रियों की अपेक्षित आमद के बिना, नेपाल चीनी कर्ज में उलझता चला गया।
निर्माण शुरू होने से पहले, नेपाल के वित्त मंत्री ने आधिकारिक बोली प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही 2011 में सीएएमसी के प्रस्ताव का समर्थन किया था। समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद चीनी ऋण समझौते के तहत 305 मिलियन अमेरिकी डॉलर की बोली लगाई गई। CAMC ने शुरुआत में जितने अमाउंट की बोली लगाई वह राशि हवाई अड्डे के लिए नेपाल के लागत अनुमान से लगभग दोगुनी थी। नेपाली राजनेताओं ने इसकी कड़ी आलोचना की। प्रक्रिया में धांधली होने और कीमत बढ़ाने का आरोप लगा। आक्रोश के बाद, सीएएमसी ने अपनी बोली घटाकर 216 मिलियन अमेरिकी डॉलर कर दी। लागत लगभग 30 प्रतिशत कम हो गई।
2016 में चीन और नेपाल ने परियोजना के लिए 20 साल के समझौते को औपचारिक रूप दिया। एक चौथाई धनराशि ब्याज मुक्त ऋण के रूप में प्रदान की गई। नेपाल ने शेष राशि चीन के निर्यात-आयात बैंक से 2 प्रतिशत ब्याज दर पर उधार लेने का इरादा किया। इसका पुनर्भुगतान 2026 में शुरू होने वाला है।
जैसे-जैसे पोखरा एयरपोर्ट का निर्माण आगे बढ़ा, भयावह मुद्दे सामने आए। नेपाल का नागरिक उड्डयन प्राधिकरण चीनी ठेकेदार की देखरेख के लिए जिम्मेदार था, लेकिन अनुभवी कर्मियों की कमी के साथ-साथ सलाहकारों के लिए धन का पर्याप्त आवंटन न होने के कारण एयरपोर्ट की परियोजना खटाई में पड़ने का खतरा पैदा हो गया। शुरुआत में 2.8 मिलियन अमरीकी डॉलर के भुगतान का फैसला हुआ। बाद में अंतरराष्ट्रीय निर्माण मानकों के साथ सीएएमसी के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए सलाहकारों को नियुक्त करने का बजट घटाकर मात्र 10,000 अमरीकी डालर कर दिया गया। पैसा कहीं और ट्रांसफर कर दिया गया।
निरीक्षण की इस कमी के कारण सीएएमसी को सलाहकारों के आने से पहले ही काम शुरू करने और ऐसे निर्माण कार्य करने की छूट मिल गई, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा नहीं करते थे। रनवे की नींव के लिए मिट्टी के घनत्व परीक्षण जैसे प्रमुख घटकों की अनदेखी की गई। रनवे की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हुए। अन्य निरीक्षणों में हवाई अड्डे की जल निकासी प्रणाली के डिज़ाइन पर भी सवाल खड़े हुए। बाढ़ का खतरा बढ़ने की बात भी सामने आई है।
द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, चीन निर्मित निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और विक्रेताओं की पहचान के रिकॉर्ड नहीं रखे गए। ऐसा करना नेपाल के साथ सीएएमसी के अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन था। चीनी कंपनी सलाहकारों को दरकिनार करने और उन नेपाली अधिकारियों के साथ सीधे बातचीत करने में कामयाब रही जिनके पास निर्माण का सीमित अनुभव था।
परियोजना पर काम कर रहे चीनी इंजीनियरों ने दावा किया कि उन्हें सीएएमसी के काम की बारीकी से जांच नहीं करने का निर्देश दिया गया था। कंपनी ध्यान "चिकन फार्म" के बजाय एक हवाई अड्डा बनाने पर था। इसके अलावा, आरोप सामने आए कि पोखरा में कई अहम दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा किया गया था। कुछ मामलों में, कर्मचारियों की साख में भी हेराफेरी की गई।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ठेकेदार के परियोजना स्थल प्रबंधक झू झानफेंग ने हवाई अड्डे के "चीनी मानक" के पालन के बारे में दावा किया। 2019 में, झू ने एक रात शराब पीने के बाद पोखरा में एक पैदल यात्री- देउ कुमार तमांग को मार डाला। पुलिस को संदेह है कि जब उसने देउ कुमार तमांग को टक्कर मारी, तब वह नशे में था। तमांग की दुखद मौत के कारण CAMC की ओर से मुआवजे की पेशकश की गई। पहले 1 मिलियन नेपाली रुपये (लगभग 7,500 अमेरिकी डॉलर) का मुआवजा देने की बात कही गई। पीड़ित परिवार ने जब मना कर दिया, तो सीएएमसी ने भुगतान दोगुना करने और नए हवाई अड्डे के भीतर एक कॉफी शॉप के लिए जगह उपलब्ध कराने की पेशकश की। परिवार ने शर्तों के साथ प्रस्ताव स्वीकार किया।
जनवरी 2023 में पोखरा हवाई अड्डे का उद्घाटन भूराजनीतिक तनाव के कारण बाधित हुआ था। नेपाल में चीनी दूतावास ने पहले से मौजूद स्थिति के बावजूद, हवाई अड्डे को चीन और नेपाल के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत "प्रमुख परियोजना" घोषित किया। द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, इस घोषणा से राजनयिक विवाद शुरू हुआ। चीनी पहल के बारे में भारत के संदेह ने स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया।
दरअसल, पोखरा हवाईअड्डा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों, विशेषकर भारतीय एयरलाइनों के विमानों को आकर्षित करने के लिए संघर्ष कर रहा था, लेकिन चीन के कारण योजना अधर में लटक गई। नेपाल की सबसे बड़ी एयरलाइन, बुद्धा एयर ने भारत के लिए उड़ानों के लिए परमिट का अनुरोध किया था, लेकिन भारत सरकार से मंजूरी नहीं मिली। सीएएमसी के अध्ययन में यात्री संख्या का अनुमान लगाया गया था। माना गया कि हवाई अड्डे को होने वाले मुनाफे से नेपाल ऋण चुका लेगा, लेकिन अब तक, कोई अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू नहीं हो सकी है।
नेपाली अधिकारियों ने कथित तौर पर अनुरोध किया है कि हवाई अड्डे की वित्तीय चुनौतियों के कारण चीन ऋण को अनुदान में बदल दे। सितंबर के अंत में प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल की बीजिंग यात्रा के दौरान इस मामले पर चर्चा हुई थी। यात्रा के दौरान चीन और नेपाल ने संयुक्त बयान जारी किया। दोनों देशों ने पोखरा हवाई अड्डे के पूरा होने और संचालन को स्वीकार किया। हालांकि, दोनों देशों के बयान में ऋण माफी की योजना का कोई उल्लेख नहीं था।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल के पोखरा हवाई अड्डे का निर्माण मुख्य रूप से चीनी कंपनियों ने किया है। पैसे लगाने के अलावा बाकी कामों में भी चीन की अहम भूमिका रही है। इस कारण काम की गुणवत्ता, निगरानी में हेराफेरी और नेपाल पर कर्ज के बोझ को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। इसके अतिरिक्त, चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के साथ हवाई अड्डे के जुड़ाव की घोषणा से भारत के साथ राजनयिक तनाव बढ़ गया है। इस कारण पोखरा हवाई अड्डे से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन चुनौतीपूर्ण हो गया है।
द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पोखरा हवाईअड्डा चीन के बुनियादी ढांचे के विकास मॉडल और इसे अपनाने से होने वाले नुकसान का स्पष्ट उदाहरण है। वित्तीय स्थिरता और पारदर्शिता के बारे में चिंताओं को उजागर करने के साथ-साथ इस एयरपोर्ट के कारण क्षेत्र में भूराजनीतिक प्रतिद्वंद्विता भी बढ़ने की आशंका है।
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न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, बुनियादी ढांचे पर चीन के विवादास्पद प्रभाव और भारत के साथ भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के मद्देनजर पोखरा एयरपोर्ट काफी अहम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चार दशकों से अधिक समय से, नेपाल पोखरा में एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाने के सपने देख रहा था। इसे वैश्विक पर्यटन स्थल के तौर पर भी विकसित करने की योजना थी।
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राजनीतिक अस्थिरता, नौकरशाही से जुड़ी चुनौतियों और वित्तीय कठिनाइयों के कारण पोखरा एयरपोर्ट आकार नहीं ले सका। इसी बीच चीन ने वैश्विक मंच पर अमेरिकी प्रभुत्व को चुनौती दी। नेपाल की मदद करने के बहाने चीन ने अमेरिकी चुनौती के सामने एक वैकल्पिक क्षेत्र बनाने की शुरुआत की। दरअसल, नेपाल, चीन के दक्षिण में स्थित है और भारत के साथ घनिष्ठ संबंध रखता है। ऐसे में भू-राजनीतिक मोर्चे पर पोखरा एयरपोर्ट काफी अहम हो जाता है।
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न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, पोखरा हवाई अड्डे का निर्माण चीन की महत्वाकांक्षाओं का एक हिस्सा था। चीन के साथ दुनिया के कई हिस्सों में बुनियादी ढांचा विकसित करने के नाम पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के तहत कई देशों में निवेश किए हैं। उन्होंने नेपाल में भी बीआरआई के तहत निवेश का प्रस्ताव रखा, लेकिन भारत के पड़ोसी ने चीन का प्रस्ताव ठुकरा दिया।
नेपाल के इनकार के बाद पोखरा हवाई अड्डा चीन और भारत के बीच कूटनीतिक रस्साकशी का कारण भी बना। दरअसल, नेपाल सहित दर्जनों देश बेल्ट एंड रोड पहल की 10वीं वर्षगांठ के जश्न के लिए बीजिंग में जमा हुए हैं। चीन के निवेश, एयरपोर्ट बनाने में अत्यधिक लागत और खराब गुणवत्ता वाले निर्माण के कारण पोखरा जांच के दायरे में है। रिपोर्ट का दावा है कि पोखरा हवाईअड्डे के लिए उधार लेने वाला नेपाल, इतने पैसे ले चुका है कि चीनी कंपनियों को असंगत रूप से लाभ हुआ।
सरकारी स्वामित्व वाले समूह सिनोमैच के निर्माण प्रभाग- चाइना सीएएमसी इंजीनियरिंग ने पोखरा हवाईअड्डा परियोजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नेपाल ने चीन से निर्माण सामग्री और मशीनरी का आयात किया। हवाई अड्डा बनाने में चीन की कंपनियां शामिल रही हैं। सुरक्षा और औद्योगिक प्रौद्योगिकी का भी भरपूर इस्तेमाल हुआ है। परियोजना की गुणवत्ता के बारे में चीन कई दावे कर चुका है।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक जांच के हवाले से दावा किया है कि हजारों दस्तावेजों की गहन जांच से चीन की सीएएमसी इंजीनियरिंग को बड़ा मुनाफा मिलने का संकेत मिलता है। मुनाफे को बढ़ाने और अपने हितों की रक्षा के लिए चीन ने लगातार शर्तें तय कीं। इसके साथ ही, इसने व्यवस्थित रूप से नेपाली निगरानी को ख़त्म कर दिया। परिणामस्वरूप, ऋण चुकाने के लिए यात्रियों की अपेक्षित आमद के बिना, नेपाल चीनी कर्ज में उलझता चला गया।
निर्माण शुरू होने से पहले, नेपाल के वित्त मंत्री ने आधिकारिक बोली प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही 2011 में सीएएमसी के प्रस्ताव का समर्थन किया था। समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद चीनी ऋण समझौते के तहत 305 मिलियन अमेरिकी डॉलर की बोली लगाई गई। CAMC ने शुरुआत में जितने अमाउंट की बोली लगाई वह राशि हवाई अड्डे के लिए नेपाल के लागत अनुमान से लगभग दोगुनी थी। नेपाली राजनेताओं ने इसकी कड़ी आलोचना की। प्रक्रिया में धांधली होने और कीमत बढ़ाने का आरोप लगा। आक्रोश के बाद, सीएएमसी ने अपनी बोली घटाकर 216 मिलियन अमेरिकी डॉलर कर दी। लागत लगभग 30 प्रतिशत कम हो गई।
2016 में चीन और नेपाल ने परियोजना के लिए 20 साल के समझौते को औपचारिक रूप दिया। एक चौथाई धनराशि ब्याज मुक्त ऋण के रूप में प्रदान की गई। नेपाल ने शेष राशि चीन के निर्यात-आयात बैंक से 2 प्रतिशत ब्याज दर पर उधार लेने का इरादा किया। इसका पुनर्भुगतान 2026 में शुरू होने वाला है।
जैसे-जैसे पोखरा एयरपोर्ट का निर्माण आगे बढ़ा, भयावह मुद्दे सामने आए। नेपाल का नागरिक उड्डयन प्राधिकरण चीनी ठेकेदार की देखरेख के लिए जिम्मेदार था, लेकिन अनुभवी कर्मियों की कमी के साथ-साथ सलाहकारों के लिए धन का पर्याप्त आवंटन न होने के कारण एयरपोर्ट की परियोजना खटाई में पड़ने का खतरा पैदा हो गया। शुरुआत में 2.8 मिलियन अमरीकी डॉलर के भुगतान का फैसला हुआ। बाद में अंतरराष्ट्रीय निर्माण मानकों के साथ सीएएमसी के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए सलाहकारों को नियुक्त करने का बजट घटाकर मात्र 10,000 अमरीकी डालर कर दिया गया। पैसा कहीं और ट्रांसफर कर दिया गया।
निरीक्षण की इस कमी के कारण सीएएमसी को सलाहकारों के आने से पहले ही काम शुरू करने और ऐसे निर्माण कार्य करने की छूट मिल गई, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा नहीं करते थे। रनवे की नींव के लिए मिट्टी के घनत्व परीक्षण जैसे प्रमुख घटकों की अनदेखी की गई। रनवे की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हुए। अन्य निरीक्षणों में हवाई अड्डे की जल निकासी प्रणाली के डिज़ाइन पर भी सवाल खड़े हुए। बाढ़ का खतरा बढ़ने की बात भी सामने आई है।
द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, चीन निर्मित निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और विक्रेताओं की पहचान के रिकॉर्ड नहीं रखे गए। ऐसा करना नेपाल के साथ सीएएमसी के अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन था। चीनी कंपनी सलाहकारों को दरकिनार करने और उन नेपाली अधिकारियों के साथ सीधे बातचीत करने में कामयाब रही जिनके पास निर्माण का सीमित अनुभव था।
परियोजना पर काम कर रहे चीनी इंजीनियरों ने दावा किया कि उन्हें सीएएमसी के काम की बारीकी से जांच नहीं करने का निर्देश दिया गया था। कंपनी ध्यान "चिकन फार्म" के बजाय एक हवाई अड्डा बनाने पर था। इसके अलावा, आरोप सामने आए कि पोखरा में कई अहम दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा किया गया था। कुछ मामलों में, कर्मचारियों की साख में भी हेराफेरी की गई।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ठेकेदार के परियोजना स्थल प्रबंधक झू झानफेंग ने हवाई अड्डे के "चीनी मानक" के पालन के बारे में दावा किया। 2019 में, झू ने एक रात शराब पीने के बाद पोखरा में एक पैदल यात्री- देउ कुमार तमांग को मार डाला। पुलिस को संदेह है कि जब उसने देउ कुमार तमांग को टक्कर मारी, तब वह नशे में था। तमांग की दुखद मौत के कारण CAMC की ओर से मुआवजे की पेशकश की गई। पहले 1 मिलियन नेपाली रुपये (लगभग 7,500 अमेरिकी डॉलर) का मुआवजा देने की बात कही गई। पीड़ित परिवार ने जब मना कर दिया, तो सीएएमसी ने भुगतान दोगुना करने और नए हवाई अड्डे के भीतर एक कॉफी शॉप के लिए जगह उपलब्ध कराने की पेशकश की। परिवार ने शर्तों के साथ प्रस्ताव स्वीकार किया।
जनवरी 2023 में पोखरा हवाई अड्डे का उद्घाटन भूराजनीतिक तनाव के कारण बाधित हुआ था। नेपाल में चीनी दूतावास ने पहले से मौजूद स्थिति के बावजूद, हवाई अड्डे को चीन और नेपाल के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत "प्रमुख परियोजना" घोषित किया। द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, इस घोषणा से राजनयिक विवाद शुरू हुआ। चीनी पहल के बारे में भारत के संदेह ने स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया।
दरअसल, पोखरा हवाईअड्डा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों, विशेषकर भारतीय एयरलाइनों के विमानों को आकर्षित करने के लिए संघर्ष कर रहा था, लेकिन चीन के कारण योजना अधर में लटक गई। नेपाल की सबसे बड़ी एयरलाइन, बुद्धा एयर ने भारत के लिए उड़ानों के लिए परमिट का अनुरोध किया था, लेकिन भारत सरकार से मंजूरी नहीं मिली। सीएएमसी के अध्ययन में यात्री संख्या का अनुमान लगाया गया था। माना गया कि हवाई अड्डे को होने वाले मुनाफे से नेपाल ऋण चुका लेगा, लेकिन अब तक, कोई अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू नहीं हो सकी है।
नेपाली अधिकारियों ने कथित तौर पर अनुरोध किया है कि हवाई अड्डे की वित्तीय चुनौतियों के कारण चीन ऋण को अनुदान में बदल दे। सितंबर के अंत में प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल की बीजिंग यात्रा के दौरान इस मामले पर चर्चा हुई थी। यात्रा के दौरान चीन और नेपाल ने संयुक्त बयान जारी किया। दोनों देशों ने पोखरा हवाई अड्डे के पूरा होने और संचालन को स्वीकार किया। हालांकि, दोनों देशों के बयान में ऋण माफी की योजना का कोई उल्लेख नहीं था।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल के पोखरा हवाई अड्डे का निर्माण मुख्य रूप से चीनी कंपनियों ने किया है। पैसे लगाने के अलावा बाकी कामों में भी चीन की अहम भूमिका रही है। इस कारण काम की गुणवत्ता, निगरानी में हेराफेरी और नेपाल पर कर्ज के बोझ को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। इसके अतिरिक्त, चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के साथ हवाई अड्डे के जुड़ाव की घोषणा से भारत के साथ राजनयिक तनाव बढ़ गया है। इस कारण पोखरा हवाई अड्डे से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन चुनौतीपूर्ण हो गया है।
द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पोखरा हवाईअड्डा चीन के बुनियादी ढांचे के विकास मॉडल और इसे अपनाने से होने वाले नुकसान का स्पष्ट उदाहरण है। वित्तीय स्थिरता और पारदर्शिता के बारे में चिंताओं को उजागर करने के साथ-साथ इस एयरपोर्ट के कारण क्षेत्र में भूराजनीतिक प्रतिद्वंद्विता भी बढ़ने की आशंका है।