नवंबर में बढ़ गया औद्योगिक उत्पादन PMI, मांग में नहीं हुआ कोई सुधार
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नवंबर महीने में उत्पादन पीएमआई में थोड़ा सा सुधार देखने को मिला, लेकिन मांग में किसी तरह का कोई सुधार देखने को नहीं मिला है। आईएचएस मार्कीट इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई इंडेक्स नवंबर में 51.2 रहा। यह अक्तूबर में 50.6 रहा था, जो दो सालों का सबसे निचला स्तर था। 50 से नीचे का इंडेक्स गिरावट की ओर और इससे ज्यादा का इंडेक्स तेजी की ओर इशारा करता है।
फैक्टरियों को नहीं मिल रहे हैं नए ऑडर्स
हालांकि इसके बावजूद फैक्टरियों को किसी तरह के नए ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं, जिससे उत्पादन से लेकर के निर्यात पर भी असर देखने को मिल रहा है। सर्वे के मुताबिक नवंबर में कई सारे नए उत्पाद लॉन्च हुए और मांग भी देखने को मिली, लेकिन यह उतना नहीं था, जितने की उम्मीद की जा रही थी। अर्थव्यवस्था में छाई सुस्ती की वजह से ऐसा देखने को मिला है।
कंपनियों ने लोगों को नौकरी से निकाला
इस दौरान कंपनियों ने भी लोगों को नौकरी से निकाल दिया, जो पिछले डेढ़ सालों में पहली बार हुआ था। महंगाई के मामले में थोड़ा बहुत उछाल देखने को मिला है। आईएचएस मार्किट की प्रमुख अर्थशास्त्री पॉलियाना डे लीमा ने कहा कि पीएमआई डाटा अभी भी भारत में औद्योगिक सेक्टर में छाई सुस्ती की ओर इशारा कर रहा है। मांग कम होने से इसका रोजगार, व्यापार और उत्पादन तक पर असर दिखाई देने लगता है।
400 कंपनियों में किया गया सर्वे
इस डाटा को तैयार करने के लिए चार सौ कंपनियों में सर्वे किया गया था। इन कंपनियों को आठ कैटेगिरी में बांटा गया, जिनमें बेसिक मेटल, केमिकल्स एंड प्लास्टिक, इलेक्ट्रीकल एंड ऑप्टिकल, फूड एंड ड्रिंक, मेकेनिकल इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल एंड क्लॉथिंग, टिंबर व पेपर और ट्रांसपोर्ट शामिल था। रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी 2017 से लगातार उत्पादन में कमी देखने को मिल रही है।
बिजली की खपत में 12.4 फीसदी की कमी
कोर सेक्टर इंडेक्स के अनुसार औद्योगिक उत्पादन घटने से बिजली की मांग में बड़ी कमी देखने को मिली है। पिछले महीने यह खपत सितंबर के -3.7 फीसदी के मुकाबले इस बार -12.4 फीसदी हो गई। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, सबसे तगड़ा झटका कोयला क्षेत्र को लगा है जिसमें उत्पादन में 17.6 फीसदी की कमी दर्ज की गई। वहीं, कच्चे तेल के उत्पादन में 5.1 फीसदी और प्राकृतिक गैस में 5.7 फीसदी की कमी आई। वहीं सीमेंट के उत्पादन में 7.7 फीसदी, इस्पात में 1.6 फीसदी और विद्युत में 12.4 फीसदी की कमी दर्ज की गई।
एकमात्र उर्वरक क्षेत्र के उत्पादन में सालाना आधार पर 11.8 फीसदी की बढ़त देखने को मिली। वहीं रिफाइनरी उत्पादों में महज 0.4 फीसदी वृद्धि रही, जबकि बीते साल समान महीने में 1.3 फीसदी की बढ़ोतरी रही थी।
यह होते हैं कोर सेक्टर की इंडस्ट्री
कोर सेक्टर में मुख्यतः आठ इंडस्ट्री शामिल होती हैं। यह हैं कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, स्टील, सीमेंट, बिजली, फर्टिलाइजर और रिफाइनरी उत्पाद। आईआईपी की गणना में इनका योगदान करीब 40.27 फीसदी रहता है। वैश्विक मोर्चे पर बिगड़ती स्थितियों के बीच निजी निवेश और उपभोक्ता मांग में सुस्ती से भारत की आर्थिक वृद्धि दर जून तिमाही में कम होकर पांच फीसदी पर आ गई है। यह पिछले छह साल की सबसे कम वृद्धि दर है।