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अच्छी खबर: त्योहारी सीजन में खरीदारी के लिए दोगुने ग्राहक तैयार, ऑनलाइन शॉपिंग और डिजिटल भुगतान पर सभी का जोर

Fri, 01 Oct 2021 03:24 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Fri, 01 Oct 2021 03:24 PM IST
सार

लोकल सर्किल के एक सर्वे में कहा गया है कि मई के महीने में केवल 30 फीसदी उपभोक्ता त्योहारी सीजन में खऱीदारी की योजना बना रहे थे, जबकि सितंबर महीने में 60 फीसदी उपभोक्ताओं ने कहा कि वे आने वाले त्योहारी सीजन में घरेलू उपभोग के लिए खरीदारी करेंगे। इस प्रकार खरीदारी के लिए तैयार उपभोक्ताओं की संख्या में 100 फीसदी का सुधार आया है...

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LocalCircles survey revealed, in September 60 percent consumers said that they would buy for home consumption in the coming festive season
शॉपिंग - फोटो : file photo

विस्तार

अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक और अच्छी खबर है। मई महीने की तुलना में दोगुने ग्राहक आगामी त्योहारी सीजन में खरीदारी करने के लिए तैयार हैं। मई में केवल 30 फीसदी ग्राहक ही खरीदारी करने की योजना बना रहे थे, जबकि सितंबर महीने में यह आंकड़ा दोगुना बढ़कर 60 फीसदी हो गया है। कुल खरीदारी में बड़ा हिस्सा ऑनलाइन बाजार के हिस्से जाने वाला है तो दुकानों की रिटेल खरीद को कुल खरीद का लगभग 48 फीसदी हिस्सा मिलने वाला है। सामानों की खरीद में स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक्स और त्योहारी सीजन के उपहार सबसे ऊपर रहने वाले हैं। आर्थिक विशेषज्ञ इसे अर्थव्यवस्था के सुधरते संकेत के रूप में देख रहे हैं।

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लोकल सर्किल के एक सर्वे में कहा गया है कि मई के महीने में केवल 30 फीसदी उपभोक्ता त्योहारी सीजन में खऱीदारी की योजना बना रहे थे, जबकि सितंबर महीने में 60 फीसदी उपभोक्ताओं ने कहा कि वे आने वाले त्योहारी सीजन में घरेलू उपभोग के लिए खरीदारी करेंगे। इस प्रकार खरीदारी के लिए तैयार उपभोक्ताओं की संख्या में 100 फीसदी का सुधार आया है।
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खरीदारी के लिए तैयार कुल उपभोक्ताओं में आधे से कुछ ज्यादा 52 फीसदी ने कहा कि वे यह खरीदारी ऑनलाइन बाजार से करेंगे, जबकि 48 फीसदी उपभोक्ता बाजार में जाकर चीजें पसंदकर खऱीदारी करने की तैयारी कर रहे हैं। खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं में 55 फीसदी ने कहा कि वे स्मार्टफोन या कोई इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने की योजना बना रहे हैं तो 67 फीसदी उपभोक्ताओं ने कहा कि वे कपड़े और फैशन से जुड़े उत्पाद खरीदेंगे।
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दीपावली के सीजन में दिए जाने वाले उपहारों के कारण ड्राइफ्रूट या मिठाइयों की खरीद में भी उछाल आएगा। लगभग 72 फीसदी उपभोक्ता ड्राईफ्रूट, चॉकलेट या मिठाइयां खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। 48 फीसदी उपभोक्ताओं ने कहा कि वे अपने प्रियजनों के लिए ऑनलाइन सामान खरीदेंगे तो 42 फीसदी उपभोक्ता अपने आसपास की दुकानों से उपहारों की खरीद करेंगे।

दो-तिहाई डिजिटल पेमेंट

ऑनलाइन खरीदारी और डिजिटल पेमेंट अब सामान्य ट्रेंड बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। लगभग 66 फीसदी उपभक्ताओं ने कहा है कि वे खरीद के लिए ऑनलाइन माध्यम या डिजिटल माध्यम से भुगतान करेंगे। यह सर्वे देश के 396 जिलों में 1.15 लाख उपभोक्ताओं और 38 हजार घरों में लोगों से बातचीत कर तैयार किया गया है। इसमें 67 फीसदी पुरुष और 37 फीसदी महिलाएं शामिल थीं।

हर मानक दिखा रहे अर्थव्यवस्था में तेजी

आर्थिक विशेषज्ञ और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने अमर उजाला से कहा कि अर्थव्यवस्था के हर बड़े मानक सुधार का संकेत दे रहे हैं। अर्थव्यवस्था के अग्रिम सेक्टर के उद्योगों में 11.2 फीसदी की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी वृद्धि हो रही है। केंद्र का जीएसटी कलेक्शन हर महीने एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा दर्ज किया जा रहा है। 81 फीसदी कामकाजी श्रमिकों का वेतन कोरोना पूर्व काल की स्थिति में आ गया है। बजटीय घाटा लगातार कम हो रहा है। ये संकेत बता रहे हैं कि अर्थव्यवस्था बेहतर स्थिति में आ रही है।

भाजपा नेता ने कहा कि अब तक खुदरा सामानों की बिक्री, मांग में कमी और रोजगार के मोर्चे पर अपेक्षित सुधार न होना चिंता का कारण बना हुआ था। लेकिन केंद्र और राज्य सरकारों ने अपने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की है और निर्माण कार्यों में तेजी आने से रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो रही है। इससे शहरी क्षेत्र के उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता में सुधार आया है।

वहीं, कृषि उत्पादों के निर्यात में बढ़ोतरी और फसलों की खरीद से किसानों के हाथ में पैसा पहुंचा है। केंद्र सरकार के द्वारा चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं से भी ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आर्थिक क्षमता सुधरी है। इन सब प्रयासों का सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहा है कि लोगों की खरीद क्षमता में सुधार आ रहा है और बाजार में मांग में बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने कहा कि आगे आने वाले दिनों में यह गति बनी रहने की उम्मीद है।

भरोसेमंद नहीं आंकड़े

दिल्ली विश्वविद्यालय के राजधानी कॉलेज में अर्थव्यवस्था के प्रोफेसर डॉ. आभास कुमार ने अमर उजाला से कहा कि इन आंकड़ों पर बहुत भरोसा नहीं किया जा सकता। तकनीकी जानकारी न रखने वाला व्यक्ति भी बाजार में निकलकर देख सकता है कि लोगों के कामकाज में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है और दुकानों में खरीद अभी कोरोना पूर्व के काल में नहीं आया है। ऐसे में अर्थव्यवस्था के बहुत तेज सुधार के दावे सही नहीं लगते।

प्रो. आभास कुमार के अनुसार, ज्यादातर मानकों के मामले में सरकार कोरोना काल से आज के आंकड़ों की तुलना कर अर्थव्यवस्था के बेहतर होने की बात कह रही है जो भ्रामक सूचना है। कोरोना काल में देश की अर्थव्यवस्था एक तिहाई कामकाज के भरोसे चल रही थी। दो तिहाई कामकाज पूरी तरह से ठप था और अर्थव्यवस्था में रिकॉर्ड गिरावट हुई थी। इसलिए उस स्थिति से तुलना कर आज बेहतरी का दावा करना उचित नहीं है।

हालांकि, यह सही है कि केंद्र-राज्य सरकारों ने अपने-अपने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते जारी किए हैं, इससे इनकी खरीद क्षमता बढ़ी है और ये आने वाले त्योहारी सीजन में खरीदारी कर बाजार को एक गति देने का काम कर सकते हैं। लेकिन पूरे देश की आबादी में बेहद सीमित हिस्सा रखने वाला सरकारी नौकरी पेशा वर्ग इतनी बड़ी क्षमता नहीं रखता, जिससे उसके आधार पर पूरे देश की अर्थव्यवस्था में सुधार आने का दावा किया जा सके।

बाजार के कामकाज में सुधार तो हुआ है लेकिन अभी भी यह 50-60 फीसदी तक ही वापस आया है। बेरोजगारी अभी भी चिंताजनक स्तर पर बनी हुई है और हर चीजों की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि आम उपभोक्ताओं की कमर तोड़ रही है। ऐसे में अर्थव्यवस्था ठीक हो गई है और लोगों की क्रय क्षमता वापस आ गई है, इस मनोवैज्ञानिक स्तर तक पहुंचने के लिए अभी इंतजार करना होगा।

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