बजट 2019: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को साकार करने का रोडमैप आर्थिक सर्वे में हुआ साफ
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न्यू इंडिया के नारे पर प्रचंड बहुमत के साथ दूसरी बार प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी के सबसे बड़े सपने को साकार करने का रोडमैप आर्थिक सर्वे में साफ हो गया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को संसद में 2018-19 की आर्थिक समीक्षा पेश करते हुए देश को समृद्धि के सातवें आसमान पर पहुंचाने का ब्लूप्रिंट पेश किया। आर्थिक सर्वे में मौजूदा वित्त वर्ष में विकास दर सात फीसदी रहने का अनुमान जताते हुए कहा गया है कि 2024-25 तक पांच हजार अरब डॉलर की आर्थिक महाशक्ति बनाने के लिए विकास दर लगातार आठ फीसदी रखनी होगी। वैश्विक अनुभवों का जिक्र करते हुए बताया गया है कि ऐसी वृद्धि दर बचत, निजी निवेश, एफडीआई और निर्यात के अच्छे चक्त्रस् से ही बनाई जा सकती है। साथ ही डेटा के जनहित में उपयोग, 5जी, इलेक्ट्रिक वाहन, न्यायिक सुधार तथा श्रम कानूनों में बदलाव की जरूरत बताई गई है।
पिछले 12 महीनों की आर्थिक तस्वीर पर आधारित सर्वे रिपोर्ट राज्यसभा में पेश करते हुए पहली महिला केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमण ने बताया कि 2019 के पहले तीन महीनों में विकास दर 5.8 फीसदी रही। यह पांच वर्ष में सबसे कम है। इसकी वजह चुनाव के चलते राजनीतिक अनिश्चितता और जीएसटी में अपेक्षा से कम कर संग्रह रही।
विकास दर सात फीसदी रहने का अनुमान
हालांकि 2019-20 में विकास दर सात फीसदी रहने का अनुमान है। ऐसा होने पर भारत चीन को (6.4 फीसदी) पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे तेज विकास दर वाला देश बन जाएगा। यह इसलिए बेहतरी का संकेत है, क्योंकि पिछले वर्ष यह 6.8 फीसदी थी। आर्थिक सर्वे में 2018-19 में राजकोषीय घाटा 3.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। अंतरिम बजट में भी घाटा 3.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। 2018-19 में राजकोषीय घाटा 5.8 फीसदी था, जो कि इसके पहले के वित्तीय वर्ष में 6.4 फीसदी था।
शुभ संकेत
- इस वित्त वर्ष में कच्चे तेल के दाम गिरेंगे
- राजकोषीय घाटा 5.8 प्रतिशत पर रहेगा
- आयात वृद्धि 15.4 और निर्यात वृद्धि 12.5 प्रतिशत रहने का अनुमान
- खाद्यान्न उत्पादन 28.34 करोड़ टन रहने का अनुमान
- प्रत्यक्ष कर संग्रह में 13 फीसदी वृद्धि हुई। कारपोरेट टैक्स संग्रह भी सुधार।
- निजी निवेश दर निचले स्तर पर लेकिन सुधार के संकेत हैं। 2020 में तेजी आएगी।
निवेश बढ़ाकर ही मिलेगी मंजिल
आर्थिक समीक्षा पेश होने के बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) केवी सुब्रमणियन ने कहा, पांच वर्ष में अर्थव्यवस्था में स्थायित्व के लिए बहुत कुछ किया गया। जब दुनियाभर की आर्थिक सुस्ती के हालात दिख रहे हैं, भारतीय अर्थव्यवस्था में तेज विकास दर कायम है और इसमें वृद्िध के ही संकेत हैं। मुद्रस्फीति की दर काबू में है। निवेश और बचत दर में बृद्िध हो रही है, इससे उत्पादन बढ़ेगा। उत्पादन बढ़ने से रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। उन्होंने कहा कि चीन सहित दुनिया के अधिकांश विकसित देश निजी निवेश को बढ़ावा देकर और घरेलू बचत के उपयोग से ही ?विकास के शिखर पर पहुंचे। हमने भी आर्थिक सर्वे में यही रोडमैप दिया है।
डाटा : नागरिकों का नागरिकों के डाटा का उपयोग
आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि डिजिटल गतिविधियों से सृजित हो रहे नागरिकों के डेटा को, नागरिकों के लिए उपयोग करना सरकार का लक्ष्य बताया है। डेटा जमा करने और उसके भंडारण की आधुनिक तकनीक होने से इसका समाज की बेहतरी के लिए उपयोग होना चाहिए। सर्वे के अनुसार निजता के लिए बने कानूनी ढांचे में डेटा को सार्वजनिक हित में उपयोग किया जा सकता है। सरकार के पास पहले ही प्रशासकीय, सर्वे, संस्थागत और नागरिकों के लेन-देन से जुड़ा डेटा भारी मात्रा में है।
5 जी से होंगे बड़े बदलाव
आर्थिक सर्वे में कहा गया कि 5जी तकनीक से डिजिटल दुनिया में बड़े बदलाव होंगे। सरकार की योजना 2020 तक देश को 5जी के लिए तैयार करने की है। 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी इसी साल हो सकती है। 5जी के जरिये उपभोक्ताओं को बड़े उत्पादन का लाभ मिल सकेगा और आम लोगों को घर बैठे सेवाएं मिलेंगी। चिकित्सा, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ, शिक्षा, मनोरंजन जैसे क्षेत्रों में फायदा मिलेगा।
इलेक्ट्रिक वाहन ही भविष्य
आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि परिवहन का भविष्य बिजली से चलने वाले वाहन ही हैं। इनका चलन बढ़ाने और इन्हें चार्ज करने के लिए एक जैसे मानक और वाहनों की कीमत घटाने की दिशा में नीतिगत प्रयास जरूरी हैं। देश में फिलहाल 0.06 फीसदी ही इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चल रहे हैं। चीन में यह आंकड़ा दो और नॉर्वे में 39 फीसदी है। उम्मीद जताई गई है कि भारत इलेकिट्रक वाहन निर्माण का हब बन सकता है। 2018 में देश में बैट्री चलित 54,800 दोपहिया वाहन बेचे गए, जबकि 2017 में यह आंकड़ा मात्र दो हजार था।
श्रम सुधार से खुलेंगे रोजगार के द्वार
बेरोजगारी से निपटने के लिए आर्थिक सर्वे में श्रम सुधारों पर जोर दिया गया है। सर्वे में कहा गया है कि जो राज्य श्रम कानूनों के मामले में अड़ियल रुख अपनाते हैं वहां पूंजी निवेश और रोजगार सृजन दोनों खराब है। 2007 से 2014 के बीच किसी राज्य ने श्रम कानूनों में सुधार नहीं किया। 2014 में राजस्थान पहला राज्य बना जिसने बदलाव किया और फायदा दिखा। सर्वे में कहा गया है कि भौगोलिक क्षेत्र और श्रमिकों की कार्यक्षमता के हिसाब से न्यूनतम वेतन के लिए चार स्लैब हों।
छोटी कंपनियों को बड़ा बनाने की जरूरत
नए रोजगार पैदा करने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) से जुड़ी नीतियों में बदलाव की जरूरत है। छोटी एमएसएमई फर्म जो छोटी ही बनी रहतीं हैं, की जगह बड़ी कंपनी बनने की क्षमता रखने वाली कंपनियों के लिए नई नीतियों की जरूरत।
शीर्ष 10 करदाताओं के नाम पर हो स्कूल, अस्पताल-सड़क
सर्वे में ईमानदारी से कर देने वालों को प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया गया है। कहा गया है कि जिले के 10 शीर्ष करदाताओं को सम्मानित करना चाहिए। इन्हें एयरपोर्ट पर बोर्डिंग का विशेषाधिकार, इमीग्रेशन काउंटर पर स्पेशल डिप्लोमेटिक लाइन जैसी सुविधा दी जाए। पिछले एक दशक में सबसे ज्यादा कर जमा वालों के नाम पर महत्वपूर्ण इमारतों, सड़क, स्कूल, अस्पताल और एयरपोर्ट के नाम रखे जाने की सिफारिश है। ऐसे करदाताओं के लिए विशेष क्लब बनाने का सुझाव है। निर्माण परियोजनाओं में ‘टैक्स मनी एट वर्क’ के बोर्ड भी लगाने की बात कही गई है।
चिंता : 2050 में गंभीर समस्या होगा जल संकट
आर्थिक सर्वेक्षण में जल संकट की तरफ गंभीर इशारा किया गया है। कहा गया है कि 2050 में भारत में पानी की कमी बड़ी समस्या होगी। जलवायु परिवर्तन पर भी चिंता दिखाई गई है। कहा गया है कि भारत के 2020 तक 20-25 प्रतिशत तक कार्बन उत्सर्जन कम करने की घोषणा को देखते हुए क्लाइमेंट चेंज एक्शन प्रोग्राम को कुल 290 करोड़ की लागत से 2014 में लांच किया गया।
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कारोबारी सुगमता के लिए न्यायिक सुधार जरूरी
आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि अनुबंध का प्रवर्तन कारोबार सुगमता रैंकिंग में सुधार के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा है। सबसे ज्यादा वाणिज्यिक विवाद निचली अदालतों में लंबित हैं। सीईए सुब्रमणियन ने कहा कि मुकदमों का बोझ घटाने के लिए निवेश बढ़ाने और तकनीक के इस्तेमाल की जरूरत है।
रिटायरमेंट की उम्र बढ़ानी होगी
- उम्रदराज होती आबादी के लिए तैयारी करनी होगी। स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश बढ़ाने और चरणबद्ध तरीके से सेवानिवृति आयु बढ़ाने की जरूरत।
- कामकाजी आयु वर्ग की आबादी हर साल करीब 97 लाख बढ़ने का अनुमान है जबकि वर्ष 2030 से कामकाजी आयु वर्ग के लोगों की संख्या हर साल 42 लाख बढ़ने का अनुमान है।
- देश में विदेशी मुद्रा ऊंडार अभी सर्वोच्च स्तर पर है। 2018-19 में विदेशी मुद्रा भंडार 412.5 अरब डालर रहने का अनुमान है।