Tariffs: भारत ने स्टील के आयात पर लगाया 12 फीसदी अस्थायी टैरिफ, 200 दिनों तक रहेगा लागू
भारत ने कुछ इस्पात उत्पादों पर 12 फीसदी अस्थायी टैरिफ लगाया है। यह टैरिफ 200 दिनों के लिए लगाया गया है। वित्त मंत्रालय ने कहा, इस अधिसूचना के तहत लगाया गया सुरक्षा शुल्क इस अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से दो सौ दिनों की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा।
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भारत ने बेलगाम आयात को रोकने के लिए कुछ इस्पात उत्पादों पर 12 फीसदी अस्थायी टैरिफ लगाया है। इस टैरिफ को स्थानीय रूप से सुरक्षा शुल्क के रूप में जाना जाता है। सरकार ने इस संबंध में सोमवार को अधिसूचना भी जारी कर दी। इस फैसले पर केंद्रीय इस्पात मंत्री एच डी कुमारस्वामी ने सोमवार को कहा कि कुछ इस्पात उत्पादों के आयात पर 12 प्रतिशत रक्षोपाय शुल्क लगाने के सरकार के फैसले से घरेलू उत्पादकों, मुख्य रूप से एसएमई को राहत मिलेगी, जिन्हें बढ़ते आयात के कारण भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
दुनिया में कच्चे स्टील के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक भारत ने कहा कि सोमवार से प्रभावी यह टैरिफ 200 दिनों के लिए लगाया गया है। वित्त मंत्रालय ने कहा, इस अधिसूचना के तहत लगाया गया सुरक्षा शुल्क इस अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से दो सौ दिनों की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा (जब तक कि इसे पहले ही रद्द, प्रतिस्थापित या संशोधित नहीं कर दिया जाता है)।
अप्रैल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से विभिन्न देशों के खिलाफ व्यापक शुल्क लगाए जाने के बाद भारत की तरफ से स्टील पर शुल्क में वृद्धि पहला बड़ा व्यापारिक नीतिगत कदम है। भारत के टैरिफ मुख्य रूप से चीन पर लक्षित हैं जो 2024-25 में दक्षिण कोरिया के बाद भारत को इस्पात का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक था। सरकार के अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, भारत ने लगातार दूसरे साल वित्त वर्ष 2024-25 में 95 लाख टन तैयार स्टील का आयात किया, जो नौ वर्ष में सर्वाधिक है। सरकार से भारत के स्टील उत्पादकों ने बेलगाम आयात पर लगाम लगाने की मांग की थी।
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घरेलू उत्पादकों को मिलेगी राहत
केंद्रीय इस्पात मंत्री एच डी कुमारस्वामी ने कहा कि इस कदम से घरेलू उत्पादकों, खासकर छोटे और मध्यम स्तर के उद्यमों को राहत मिलेगी, जिन्हें बढ़ते आयात से भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है। रक्षोपाय शुल्क बाजार में स्थिरता बहाल करने और घरेलू उद्योग के विश्वास को मजबूत करने में मदद करेगा। इस्पात मंत्रालय के बयान के अनुसार, मंत्री ने कहा कि यह उपाय घरेलू इस्पात विनिर्माताओं को आयात बढ़ने के प्रतिकूल प्रभाव से बचाने और बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए समय पर उठाया गया आवश्यक कदम है। उन्होंने कहा कि इस्पात मंत्रालय यह सुनिश्चित करने के लिए सभी पक्षों के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है कि घरेलू इस्पात क्षेत्र मजबूत, आत्मनिर्भर और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बना रहे।
भारतीय इस्पात संघ के अध्यक्ष नवीन जिंदल ने बयान में कहा, ‘‘हम सरकार के कुछ इस्पात उत्पादों पर 12 प्रतिशत का रक्षोपाय शुल्क लगाने के फैसले का स्वागत करते हैं। यह महत्वपूर्ण कदम भारतीय विनिर्माताओं को अनुचित निर्यात से संरक्षण देगा, घरेलू उत्पादन बढ़ाने में मदद करेगा और मजबूत आत्मनिर्भर भारत की ओर हमारे कदम को आगे बढ़ाएगा। हम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का उनके दूरदृष्टि वाले नेतृत्व और इस्पात क्षेत्र को समर्थन के लिए आभार जताते हैं।’’