फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   IMF Warns: High Oil Prices May Persist Until 2027, Global Economy Under Pressure

आईएमएफ: '2027 तक ऊंची रहेंगी तेल कीमतें, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा', जॉर्जीवा को क्या चिंता?

Wed, 07 Oct 2026 07:14 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 07 Oct 2026 07:14 PM IST
सार

आईएमएफ की एमडी ने चेतावनी दी है कि खाड़ी युद्ध खत्म होने पर भी 2027 तक तेल की कीमतें ऊंची रहेंगी, जिससे वैश्विक महंगाई और आर्थिक वृद्धि पर दबाव बढ़ेगा। जानें इसके कारण और प्रभाव।

विज्ञापन
IMF Warns: High Oil Prices May Persist Until 2027, Global Economy Under Pressure
आईएमएफ चीफ को किस बात की आशंका? - फोटो : amarujala.com

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने बुधवार को एक बड़ी चेतावनी जारी की है। आईएमएफ के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में युद्ध समाप्त होने के बावजूद ऊर्जा की ऊंची कीमतें 2027 तक बनी रह सकती हैं। यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा कर रही है।

विज्ञापन


आईएमएफ ने बताया कि कच्चे तेल की कीमत करीब 100 डॉलर प्रति बैरल पर स्थिर है। शोधन क्षमता और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर दबाव बढ़ रहा है। इससे महंगाई में वृद्धि हो रही है और वैश्विक आर्थिक वृद्धि प्रभावित हो रही है। आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि अब तक ऊर्जा संकट का असर सीमित रहा है। यह अधिक दक्षता, विविध ईंधन स्रोतों और रणनीतिक भंडार के कारण संभव हुआ है।

विज्ञापन

ऊर्जा कीमतें क्यों बनी रहेंगी ऊंची?

क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने सिंगापुर में कहा कि खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति बहाल होने की अनिश्चितता है। इसी कारण तेल की कीमतें करीब 100 डॉलर प्रति बैरल पर बनी हुई हैं। इसमें परिवहन की ऊंची लागत और अन्य कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। दबाव केवल कच्चे तेल तक सीमित नहीं है। वैश्विक स्तर पर शोधन क्षमता की संरचनात्मक कमी है। इसके चलते क्रैक स्प्रेड लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। इसका परिणाम डीजल और अन्य शोधित पेट्रोलियम उत्पादों की रिकॉर्ड खुदरा कीमतों के रूप में सामने आया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

प्राकृतिक गैस आपूर्ति पर क्या है असर?

खाड़ी क्षेत्र से प्राकृतिक गैस की आपूर्ति भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पर खतरा बना हुआ है। इस कारण एलएनजी के परिवहन के विकल्प सीमित हो गए हैं। जॉर्जीवा ने बताया कि इसका दुनिया के अलग-अलग हिस्सों पर अलग-अलग असर पड़ रहा है। एशिया और यूरोप विशेष रूप से इस स्थिति से प्रभावित हैं। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले से ही महंगाई और कमजोर आर्थिक वृद्धि का सामना कर रही है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या होगा प्रभाव?

ऊर्जा की ऊंची लागत का असर उर्वरकों, खाद्य पदार्थों और प्रमुख औद्योगिक कच्चे माल की कीमतों पर पड़ता है। अल नीनो भी खाद्य सुरक्षा पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है। इस स्थिति से महंगाई बढ़ने के साथ आर्थिक वृद्धि पर भी दबाव पड़ता है। आने वाले महीनों में दबाव और बढ़ सकता है। उत्तरी गोलार्ध में ठंड बढ़ने से ऊर्जा की मांग बढ़ेगी। देश अपने ऊर्जा भंडार को फिर से भरने का प्रयास करेंगे। ऊर्जा की ऊंची कीमतों से महंगाई, ब्याज दरों और प्रमुख सरकारी बॉन्ड प्रतिफल पर ऊपर की ओर दबाव पड़ता है। अमेरिका, जर्मनी और जापान की 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड प्रतिफल इस साल काफी बढ़ी हैं। ये क्रमशः 2007, 2009 और 1996 के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर हैं। आईएमएफ के अनुसार, ऊर्जा संकट उन तीन प्रमुख ताकतों में से एक है जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं। अन्य दो ताकतें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का तेजी से विस्तार और सरकारी कर्ज का रिकॉर्ड स्तर हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed