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GST Collection: मार्च में 1.78 करोड़ रुपये का जीएसटी कलेक्शन, सालाना आधार पर 11.5% बढ़ा आंकड़ा

Mon, 01 Apr 2024 04:39 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Mon, 01 Apr 2024 04:39 PM IST
सार

GST Collection: वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए सकल जीएसटी संग्रह 20.14 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 11.7 प्रतिशत अधिक है।

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GST collection grows 11.5 pc year-on-year to second highest ever at Rs 1.78 lakh crore in March
अक्टूबर में कुल जीएसटी संग्रह 1,30,127 करोड़ रुपये रहा है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

घरेलू कारोबारी लेनदेन में 17.6 फीसदी की उल्लेखनीय वृद्धि के दम पर मार्च, 2024 में जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 11.5 फीसदी बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। यह अब तक का दूसरा सर्वाधिक कर संग्रह है। इसके साथ ही, वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान जीएसटी के रूप में सरकार की कमाई सालाना आधार पर 11.7 फीसदी बढ़कर 20.18 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई। 

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वित्त मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष के दौरान औसत मासिक सकल जीएसटी संग्रह बढ़कर 1.68 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। यह  2022-23 में 1.50 लाख करोड़ से अधिक था। इसके अलावा, मार्च, 2024 तक रिफंड के बाद शुद्ध जीएसटी राजस्व 18.01 लाख करोड़ रुपये रहा। यह एक साल पहले की समान अवधि से 13.4 फीसदी अधिक है।
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मंत्रालय ने कहा, 2023-24 में जीएसटी संग्रह ने लगातार मजबूत प्रदर्शन दिखाया है। इस दौरान 20.18 लाख करोड़ का कुल जीएसटी संग्रह मील का पत्थर है। विशेषज्ञों ने कहा, मासिक संग्रह में दहाई अंक की वृद्धि अर्थव्यवस्था की जुझारू क्षमता को दर्शाती है।

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वित्तीय वर्ष 2023-24 में कुल 20.14 लाख करोड़ रुपये का जीएसटी संग्रह हुआ

अप्रैल 2023 से मार्च 2024 के वित्तीय वर्ष के लिए सकल जीएसटी संग्रह 20.14 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 11.7 प्रतिशत अधिक है।  वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए औसत मासिक सकल संग्रह ₹1.68 लाख करोड़ रहा, जो पिछले वित्तीय वर्ष के ₹1.5 लाख करोड़ से अधिक है। 


मार्च 2024 के लिए सकल वस्तु और सेवा कर जीएसटी राजस्व सालाना आधार पर 11.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1.78 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह जीएसटी संग्रह का अब तक का दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। मंत्रालय के अनुसार कुल जीएसटी संग्रह में यह इजाफा घरेलू लेनदेन से जीएसटी संग्रह में 17.6 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि के कारण हुआ है।

अप्रैल 2023 में सबसे ज्यादा 1.87 लाख करोड़ रुपये का जीएसटी कलेक्शन किया गया

अप्रैल 2023 में अब तक का सबसे अधिक जीएसटी संग्रह 1.87 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। मार्च 2024 के लिए रिफंड का जीएसटी राजस्व शुद्ध 1.65 लाख करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में 18.4 प्रतिशत अधिक है।

विनिवेश से सरकार ने जुटाए 16,507 करोड़
सरकार एक बार फिर विनिवेश लक्ष्य से चूक गई है। केंद्र ने 2023-24 में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में अल्पांश हिस्सेदारी बेचकर सिर्फ 16,507 करोड़ रुपये ही जुटाए हैं। यह राशि सरकार के संशोधित अनुमान से कम है। इस अवधि में बिक्री पेशकश (ओएफएस) के जरिये केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के 10 उद्यमों (सीपीएसई) में हिस्सेदारी बेची गई। सरकार ने बजट में 2023-24 के लिए विनिवेश से 51,000 करोड़ रुपये जुटाने का अनुमान जताया था। निवेश एवं लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) की वेबसाइट के मुताबिक, 31 मार्च, 2024 के अंत में ओएफएस और कर्मचारियों को शेयर बिक्री के जरिये 2023-24 का वास्तविक संग्रह 16,507.29 करोड़ रुपये था।

कोल इंडिया से मिले 4,186 करोड़
सरकार को कोल इंडिया में हिस्सेदारी बेचने से 4,186 करोड़ रुपये मिले। एनएचपीसी और एनएलसी इंडिया में शेयर बिक्री से क्रमशः 2,488 करोड़ व 2,129 करोड़ रुपये मिले। इरेडा के आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) से 858 करोड़ रुपये जुटाए गए। सरकार ने 2023-24 में आरवीएनएल, एसजेवीएन, इरकॉन इंटरनेशनल और हुडको में भी अपनी हिस्सेदारी बेची है। 

2017-18 में रिकॉर्ड कमाई
सरकार ऐतिहासिक रूप से वित्त वर्ष 2018-19 और 2017-18 को छोड़कर बजट में निर्धारित विनिवेश लक्ष्यों से चूकती रही है। केंद्र को विनिवेश से सबसे ज्यादा 2017-18 में 1,00,056 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी, जो एक लाख करोड़ रुपये के बजट लक्ष्य से ज्यादा है। 2018-19 में विनिवेश से 84,972 करोड़ जुटाए गए थे, जो बजट लक्ष्य 80,000 करोड़ से ज्यादा है।

यूपीआई : 19.7 लाख करोड़ का लेनदेन

  • यूपीआई से लेनदेन मार्च में पहली बार 19.78 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। संख्या के लिहाज से कुल 13.44 अरब लेनदेन हुए हैं। एक साल पहले समान महीने की तुलना में यह मूल्य के लिहाज से 40 फीसदी और संख्या के हिसाब से 55 फीसदी अधिक है।
  • 2023-24 में यूपीआई से लेनदेन 131 अरब रहा, जो एक साल पहले 84 अरब था। इस दौरान लेनदेन का मूल्य 139 लाख करोड़ से बढ़कर 199.89 लाख करोड़ रुपये हो गया।
  • फास्टैग लेनदेन मूल्य के लिहाज से मार्च में 17 फीसदी बढ़कर 5,939 करोड़ रुपये रहा है। मार्च में आधार से लेनदेन मामूली घटकर 27,996 करोड़ रुपये रह गया है।

बिजली खपत : बढ़कर 129.9 अरब यूनिट

  • देश में बिजली खपत मार्च, 2024 में सालाना आधार पर 1.4 फीसदी बढ़कर 129.89 अरब यूनिट पहुंच गई। खपत मार्च, 2023 में 128.12 अरब यूनिट और मार्च, 2022 में 128.47 अरब यूनिट रही थी।
  •  सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, किसी भी एक दिन में बिजली की सबसे अधिक मांग पिछले माह बढ़कर 221.70 गीगावॉट पहुंच गई। यह आंकड़ा मार्च, 2023 में 208.92 गीगावॉट और मार्च, 2022 में 199.43 गीगावॉट रहा था।
  • बिजली मंत्रालय ने गर्मियों में करीब 260 गीगावॉट की सर्वाधिक मांग का अनुमान लगाया है।
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