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Shaktikanta Das: आरबीआई गवर्नर को भरोसा, दूसरी छमाही में देश की विकास दर अप्रैल-सितंबर से बेहतर रहेगी

Fri, 06 Dec 2024 02:38 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 06 Dec 2024 02:38 PM IST
सार

Shaktikanta Das: भारत ने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने विकास अनुमान को पहले के 7.2 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया।

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Growth in second half to be better than Apr-Sep, says RBI Governor
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास, बीच में, और डिप्टी गवर्नर। - फोटो : PTI

विस्तार

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को संपन्न एमपीसी की बैठक के बाद भरोसा जताया कि वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में वृद्धि दर अप्रैल-सितंबर की अवधि के मुकाबले बेहतर रहेगी। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2025 के लिए जीडीपी वृद्धि अनुमान को घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है।

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विकास दर में यह कमी दूसरी तिमाही में जीडीपी के 5.4 प्रतिशत रहने के बाद आई है, जो पिछली सात तिमाहियों में सबसे कम है। यह पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में दर्ज 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर से भी कम है।
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भारत ने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने विकास अनुमान को पहले के 7.2 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया।
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दास ने कहा कि आगे बढ़ते हुए, दूसरी छमाही चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही से बेहतर दिख रही है। दूसरी छमाही के लिए बेहतर अनुमान स्वस्थ खरीफ फसल उत्पादन, उच्च जलाशय स्तर और बेहतर रबी बुवाई पर आधारित है।

इसके अलावा, औद्योगिक गतिविधि सामान्य होने और पिछली तिमाही के निचले स्तरों से उबरने की उम्मीद है। मानसून से संबंधित व्यवधानों के बाद खनन और बिजली क्षेत्र के भी सामान्य होने की उम्मीद है। मुद्रास्फीति के संबंध में दास ने कहा कि सतत विकास के हित में इसे नीचे लाना होगा।

उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, "घोड़े (मुद्रास्फीति) ने भागने का बहादुरी भरा प्रयास किया है, हमारा प्रयास है कि उसे कड़ी लगाम पर रखा जाए... इसमें जल्दबाजी में कोई प्रतिक्रिया करने की गुंजाइश नहीं है। कोई भी कार्रवाई करने से पहले हमें और सबूतों की आवश्यकता है और कार्रवाई समय पर होनी चाहिए।"


उन्होंने कहा कि मौद्रिक नीति समिति मुद्रास्फीति और विकास के बीच संतुलन बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो हाल ही में बिगड़ गया था। उन्होंने कहा कि आरबीआई मुद्रास्फीति और विकास के बीच संतुलन बहाल करने के लिए परिस्थितियां बनाने के लिए अपने विभिन्न नीतिगत साधनों का उपयोग करेगा।

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