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दवा पेटेंट पर कसेगी लगाम? अदालतों के फैसलों को नई गाइडलाइन में शामिल करेगा आईपीओ, जानें पूरा मामला

Sun, 13 Sep 2026 01:26 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sun, 13 Sep 2026 01:26 PM IST
सार

भारतीय पेटेंट कार्यालय ने फार्मास्यूटिकल और बायोटेक्नोलॉजी पेटेंट आवेदनों की जांच के लिए नई मसौदा गाइडलाइन प्रस्तावित की है। इसका लक्ष्य अदालतों की विकसित होती कानूनी व्याख्याओं को शामिल करते हुए पेटेंट जांच में गुणवत्ता, एकरूपता और स्पष्टता बढ़ाना है।

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IPO to incorporate court rulings into new guidelines  Will curbs be tightened on drug patents
दवाएं - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारतीय पेटेंट कार्यालय ने फार्मास्यूटिकल पेटेंट आवेदनों की जांच से जुड़ी मौजूदा गाइडलाइन को अपडेट करने का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य पेटेंट आवेदनों की जांच में गुणवत्ता, एकरूपता और निरंतरता बढ़ाना है। इसके लिए कार्यालय ने फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में पेटेंट आवेदनों की जांच से संबंधित मसौदा दिशानिर्देश जारी किए हैं। IPO ने कहा है कि अदालतों के फैसलों के जरिए पेटेंट कानूनों की व्याख्या लगातार विकसित हो रही है और इन्हें भी नई गाइडलाइन में शामिल किया जाएगा।

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पेटेंट व्यवस्था में गुणवत्ता और एकरूपता पर जोर
भारतीय पेटेंट कार्यालय के मुताबिक, देश में फार्मास्यूटिकल पेटेंटिंग बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय है। किसी गलत या अनुचित पेटेंट का बोझ अंततः समाज पर पड़ सकता है, जबकि बेहतर पेटेंट नवाचार और तकनीकी विकास को बढ़ावा देने के लिए जरूरी हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए IPO लगातार अपने आंतरिक संसाधनों को मजबूत कर रहा है, कामकाज के मॉड्यूल में बदलाव कर रहा है और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े इंटरफेस को भी बेहतर बना रहा है। कार्यालय का कहना है कि फार्मा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में जांच के मानकों में गुणवत्ता, स्थिरता और एकरूपता लाना इस पहल का प्रमुख लक्ष्य है।
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अदालतों के फैसलों को गाइडलाइन में किया जाएगा शामिल
IPO ने मसौदे में कहा है कि फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में उत्पाद पेटेंट से जुड़े कई मुद्दों पर अब अदालतों के फैसलों के माध्यम से स्थिति अधिक स्पष्ट हो रही है। ऐसे में पेटेंट आवेदनों की जांच के लिए जारी दिशानिर्देशों को अपडेट करना जरूरी हो गया है, ताकि न्यायिक फैसलों में सामने आए विश्लेषण और कानूनी व्याख्याओं को जांच प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जा सके। 4 सितंबर की तारीख वाले मसौदे के अनुसार, नई गाइडलाइन का मकसद पेटेंट जांच के मानकों को बेहतर करना और तकनीकी अधिकारियों के बीच सामंजस्यपूर्ण एवं समान प्रक्रिया सुनिश्चित करना है।
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भारत की 'फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड' भूमिका का भी जिक्र
पेटेंट कार्यालय ने इस बदलाव के महत्व को भारत की वैश्विक फार्मास्यूटिकल भूमिका से भी जोड़ा है। मसौदे में कहा गया है कि भारत दुनिया की 'फार्मेसी' के रूप में अपनी पहचान बना चुका है, इसलिए यहां दवाओं से जुड़े पेटेंट का असर केवल देश की जनता तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर भी पड़ता है। मौजूदा दिशा-निर्देशों को इस उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है कि पेटेंट परीक्षक और नियंत्रक आवेदनों की जांच करते समय लगातार एक जैसे और स्पष्ट मानकों का पालन कर सकें।

बायोटेक पेटेंट के लिए भी जारी हुए मसौदा दिशानिर्देश
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले भारतीय पेटेंट कार्यालय ने जैव-प्रौद्योगिकी यानी बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र में पेटेंट आवेदनों की जांच के लिए भी मसौदा दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसमें नवीनता, स्पष्टता, औद्योगिक उपयोगिता, आविष्कार की गैर-स्पष्टता और पर्याप्त खुलासा जैसे अहम मुद्दों को रेखांकित किया गया है। इसके अलावा नैतिक और सामाजिक चिंताओं, पर्यावरणीय सुरक्षा, आंशिक जीन अनुक्रमों के एक्सप्रेस्ड सीक्वेंस टैग, कृषि पशुओं की क्लोनिंग, स्टेम सेल और जीन डायग्नोस्टिक्स से जुड़े पेटेंट मामलों का भी उल्लेख किया गया है। कार्यालय के अनुसार, इन विषयों की जटिलता पेटेंट परीक्षकों और आवेदकों दोनों के लिए चुनौती पेश करती है।


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एक जैसी और पारदर्शी जांच प्रक्रिया बनाने पर जोर
IPO ने कहा है कि बायोटेक्नोलॉजी और इससे जुड़े क्षेत्रों में पेटेंट आवेदनों की जांच के लिए समान और लगातार लागू होने वाली प्रक्रिया तैयार करने की तत्काल जरूरत है। प्रस्तावित गाइडलाइन का उद्देश्य पेटेंट अधिनियम, 1970 (संशोधित) के तहत काम करने वाले परीक्षकों और नियंत्रकों को स्पष्ट दिशा देना है, ताकि अलग-अलग मामलों में जांच के मानक अनावश्यक रूप से अलग न हों। दोनों क्षेत्रों के लिए तैयार मसौदे का व्यापक उद्देश्य पेटेंट प्रणाली में गुणवत्ता और विश्वसनीयता बढ़ाना तथा आवेदनों की जांच में समानता और निरंतरता सुनिश्चित करना है।

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