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Gold Import Decline: सोना आयात घटा, निर्यात ने भरी उड़ान; पांच माह में सबसे नीचे आया व्यापार घाटा
Tue, 16 Dec 2025 04:30 AM IST
हिमांशु चंदेल
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Tue, 16 Dec 2025 04:30 AM IST
सार
India Trade Deficit: नवंबर 2025 में इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के मजबूत निर्यात तथा सोना और कच्चा तेल आयात घटने से भारत का व्यापार घाटा घटकर पांच महीने के निचले स्तर पर आ गया। वहीं, निर्यात 19.37 फीसदी बढ़कर 38.13 अरब डॉलर पहुंचा।
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निर्यात
- फोटो : Istock
विस्तार
देश की विदेशी व्यापार स्थिति में नवंबर 2025 में बड़ी राहत देखने को मिली है। इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के मजबूत निर्यात तथा सोना, कच्चा तेल और कोयले के आयात में आई तेज गिरावट से व्यापार घाटा घटकर पांच महीने के निचले स्तर पर आ गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, नवंबर में वस्तु निर्यात सालाना आधार पर 19.37 फीसदी बढ़कर 38.13 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो बीते छह महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है।
नवंबर में निर्यात में आई यह तेजी अक्तूबर में आई गिरावट के बाद मजबूत वापसी को दर्शाती है। इसी अवधि में आयात में मामूली कमी दर्ज की गई, जिससे व्यापार घाटा घटकर 24.53 अरब डॉलर रह गया। इससे पहले जून में यह 18.78 अरब डॉलर था, जबकि अक्तूबर में यह बढ़कर रिकॉर्ड 41.68 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सुधार वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय निर्यातकों के बेहतर प्रदर्शन को दिखाता है।
सोना और तेल आयात में बड़ी गिरावट
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर में कुल आयात सालाना आधार पर 1.88 फीसदी घटकर 62.66 अरब डॉलर रहा। इसकी सबसे बड़ी वजह सोने के आयात में भारी गिरावट रही। नवंबर में सोने का आयात 59.15 फीसदी घटकर करीब 4 अरब डॉलर रह गया। इसके अलावा कच्चे तेल का आयात भी 11.27 फीसदी घटकर 14.11 अरब डॉलर पर आ गया। कोयले के आयात में भी कमी दर्ज की गई, जिससे आयात बिल पर दबाव कम हुआ।
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इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक निर्यात ने संभाला मोर्चा
टैरिफ संबंधी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद इंजीनियरिंग वस्तुओं के निर्यात में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई। नवंबर में यह 23.7 फीसदी बढ़कर लगभग 11.01 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो एक साल पहले 8.9 अरब डॉलर था। पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी 11.65 फीसदी की वृद्धि के साथ 3.93 अरब डॉलर रहा। इसके अलावा चाय, कॉफी, काजू, ऑयल मिल, डेयरी, हैंडीक्राफ्ट, समुद्री और चमड़ा उत्पादों के निर्यात में भी अच्छी तेजी देखी गई।
कुछ क्षेत्रों में गिरावट भी दर्ज
हालांकि सभी क्षेत्रों में तस्वीर एक जैसी नहीं रही। नवंबर में चावल, तिलहन, कारपेट और प्लास्टिक जैसे कुछ उत्पादों के निर्यात में गिरावट दर्ज की गई। अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मांग में उतार-चढ़ाव और कुछ बाजारों में कीमतों का दबाव इसकी वजह रहा। इसके बावजूद कुल निर्यात में आई मजबूती ने इन कमजोरियों की भरपाई कर दी।
आठ महीने में 562 अरब डॉलर के पार पहुंचा निर्यात
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि नवंबर निर्यात के लिहाज से बेहतर महीना रहा और इससे अक्तूबर में हुए नुकसान की भरपाई हो गई है। चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों, यानी अप्रैल से नवंबर के बीच, देश का कुल निर्यात 562.13 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के 533.16 अरब डॉलर से 5.83 फीसदी अधिक है। इसी अवधि में सेवाओं का निर्यात बढ़कर 270 अरब डॉलर पहुंच गया, जो एक साल पहले 248.56 अरब डॉलर था।
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नवंबर में निर्यात में आई यह तेजी अक्तूबर में आई गिरावट के बाद मजबूत वापसी को दर्शाती है। इसी अवधि में आयात में मामूली कमी दर्ज की गई, जिससे व्यापार घाटा घटकर 24.53 अरब डॉलर रह गया। इससे पहले जून में यह 18.78 अरब डॉलर था, जबकि अक्तूबर में यह बढ़कर रिकॉर्ड 41.68 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सुधार वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय निर्यातकों के बेहतर प्रदर्शन को दिखाता है।
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सोना और तेल आयात में बड़ी गिरावट
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर में कुल आयात सालाना आधार पर 1.88 फीसदी घटकर 62.66 अरब डॉलर रहा। इसकी सबसे बड़ी वजह सोने के आयात में भारी गिरावट रही। नवंबर में सोने का आयात 59.15 फीसदी घटकर करीब 4 अरब डॉलर रह गया। इसके अलावा कच्चे तेल का आयात भी 11.27 फीसदी घटकर 14.11 अरब डॉलर पर आ गया। कोयले के आयात में भी कमी दर्ज की गई, जिससे आयात बिल पर दबाव कम हुआ।
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इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक निर्यात ने संभाला मोर्चा
टैरिफ संबंधी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद इंजीनियरिंग वस्तुओं के निर्यात में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई। नवंबर में यह 23.7 फीसदी बढ़कर लगभग 11.01 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो एक साल पहले 8.9 अरब डॉलर था। पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी 11.65 फीसदी की वृद्धि के साथ 3.93 अरब डॉलर रहा। इसके अलावा चाय, कॉफी, काजू, ऑयल मिल, डेयरी, हैंडीक्राफ्ट, समुद्री और चमड़ा उत्पादों के निर्यात में भी अच्छी तेजी देखी गई।
कुछ क्षेत्रों में गिरावट भी दर्ज
हालांकि सभी क्षेत्रों में तस्वीर एक जैसी नहीं रही। नवंबर में चावल, तिलहन, कारपेट और प्लास्टिक जैसे कुछ उत्पादों के निर्यात में गिरावट दर्ज की गई। अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मांग में उतार-चढ़ाव और कुछ बाजारों में कीमतों का दबाव इसकी वजह रहा। इसके बावजूद कुल निर्यात में आई मजबूती ने इन कमजोरियों की भरपाई कर दी।
आठ महीने में 562 अरब डॉलर के पार पहुंचा निर्यात
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि नवंबर निर्यात के लिहाज से बेहतर महीना रहा और इससे अक्तूबर में हुए नुकसान की भरपाई हो गई है। चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों, यानी अप्रैल से नवंबर के बीच, देश का कुल निर्यात 562.13 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के 533.16 अरब डॉलर से 5.83 फीसदी अधिक है। इसी अवधि में सेवाओं का निर्यात बढ़कर 270 अरब डॉलर पहुंच गया, जो एक साल पहले 248.56 अरब डॉलर था।
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