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Gig Workers: सालाना ₹5 लाख से भी कम कमा पाते हैं 12 घंटे से अधिक काम करने वाले गिग वर्कर्स, रिपोर्ट में दावा

Wed, 12 Feb 2025 06:37 PM IST
नविता स्वरूप बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: नविता स्वरूप Updated Wed, 12 Feb 2025 06:37 PM IST
सार

Gig Workers: ऑनलाइल डिलवरी की होड़ वर्तमान समय में जिस तेजी से बढ़ रही है, उसको देखते हुए डिलिवरी करने वाले गिग कर्मचारियों की कमाई उस तेजी से नहीं बढ़ पा रही है। टीमलीज डिजिटल स्टॉफिग फर्म की एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है देश में 97.6 प्रतिशत गिग कर्मचारी साल भर में 5 लाख रुपये से कम कमाते हैं।

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Gig workers earn less than Rs 5 lakh and work more than 12 hours
गिग अर्थव्यवस्था (प्रतीकात्मक)। - फोटो : एएनआई

विस्तार

ऑनलाइल डिलवरी की होड़ वर्तमान समय में जिस तेजी से बढ़ रही है, उसको देखते हुए डिलिवरी करने वाले गिग कर्मचारियों की कमाई उस तेजी से नहीं बढ़ पा रही है। टीमलीज डिजिटल स्टॉफिग फर्म की एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में 97.6 प्रतिशत गिग कर्मचारी साल भर में 5 लाख रुपये से कम कमाते हैं। इसमें से तीन चौथाई से अधिक यानी 77.6 प्रतिशत गिग कर्मचारी प्रति वर्ष 2.5 लाख रुपये से भी कम कमा पाते हैं। कुल गिग वर्कर्स में लगभग 20 प्रतिशत सालाना 2.5 से 5 लाख रुपये के बीच ही कमाते हैं। हालांकि यह कर्मचारियों पर निर्भर करता है कि वे कितने घंटे काम करें।

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कमाई कम होने का क्या है कारण?

रिपोर्ट के अनुसार अच्छी कमाई करने के लिए गिग 85 प्रतिशत कर्मचारियों को रोजना आठ घंटे काम करना पड़ता है, जबकि ऐसा देखा गया है कि लगभग 21 प्रतिशत गिग कर्मचारी 12 घंटे से अधिक काम करते हैं। इस लिहाज से उन्हें हफ्ते में करीब 100-100 घंटे काम करना पड़ा है, लेकिन उस लिहाज से मेहनताना नहीं मिल पाता। कमाई कम होने की बड़ी वजह से स्विगी और जोमैटो जैसे प्लेटफॉर्मों द्वारा दिया जाने वाला भुगतान पिछले कुछ सालों में कम हुआ है। दूसरा प्रति ऑर्डर पर कर्मचारियों को मिलने वाला कमिशन पहले 35 रुपये था, जो अब 10 से 15 रुपये प्रति ऑर्डर हो गया है। तीसरा कारण डिलीवरी जो पहले 4 किलोमीटर होता था उसे बढ़ाकर 8 से 10 किलोमीटर कर दिया गया है। कर्मचारियों ने उनके कमीशन में गड़बड़ी और मनमानी कटौती की भी शिकायत की है, जिसकी वजह से उनकी कमाई कम हो रही है। 

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तेजी से बढ़ रही है गिग कर्मचारियों की संख्या

नौकरी में मनचाहे काम के घंटों को तय करने की वजह और नौकरियों की कमी की वजह से देश में गिग कर्मचारियों की संख्या में तेजी वृद्धि हुई है। क्विक कॉमर्स, फूड डिलीवरी और ई कॉमर्स जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में गिग कर्मचारियों की संख्या बढ़ी है, जो कुल गिग कर्मचारियों का लगभग 40 प्रतिशत है। भारत में मौजूदा समय में लगभग 10 मिलियन गिग कर्मचारी है, जो साल 2020-21 में 7.7 मिलियन से लगभग 30 प्रतिशत अधिक है। आनेवाले सालों में इसमें और वृद्धि होने की संभावना है, क्योंकि जिस तरह से शहरीकरण बढ़ रहा है, उसे देखते हुए टियर 1, टियर 2 शहरों में इसकी मांग बढ़ेगी।

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गिग कर्मचारियों की अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग कमाई

रिपोर्ट के अनुसार गिग कर्मचारी की कैटेगरी अथवा क्षेत्र है, उस पर उनकी कमाई निर्भर करती है। टीमलीज के आंकड़ों के अनुसार डिजिटल मार्केटिंग या सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट क्षेत्र के गिग कर्मचारियों को उनके अनुभव के आधार पर 30,000 से एक लाख रुपये प्रति महा तक कमा सकते हैं। उसकी तुलना में ई-कॉमर्स में काम करने वाले गिग कर्मचारी 18,000 से 40,000 रुपये प्रति महीना कमाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार डिलीवरी एग्जीक्यूटिव डार्क स्टोर संचालकों से बेहत स्थिति में काम करते हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि संविदा र्कमचारी अक्सर 15,000 से 30,000 रुपये महीना कमाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार स्विगी, जोमैटो, जेप्टो और फिल्पकार्ट जैसी बड़ी डिलीवरी फ्लीट और वेयरहाउस से काम करने वाली कंपनियां सबसे अधिक गिग कर्मचारियों को नियुक्त करती हैं। यह कंपनियां विशेषरूप से कर्मचारियों के लिए एक प्रोत्साहन मॉडल पर करती है, जिसमें भुगतान डिलीवरी की संख्या, काम के घंटों से जुड़ा होता है। न्यूनतम ऑर्डर के लिए एक सीमा तय की जाती है, उस लक्ष्य को पूरा करने के बाद ही गिग कर्मचारी को अतरिक्त भुगतान मिलता है।

बजट 2025 में सरकार ने गिग वर्कर्स के लिए किया ये एलान

रिपोर्ट के अनुसार काफी समय से गिग कर्मचारियों के काम के घंटों और अनेकों परिस्थितियों में काम करने की वजह से कंपनियां उन्हें दुर्घटना बीमा और मृत्यु तथा स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए बीमा कवर भी उपलब्ध करवा रही हैं। सरकार ने भी हाल ही में गिग कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई योजनाएं शुरू की हैं, जिसमें कर्मचारी भविष्य निधि संगठन  (ईपीएफओ) और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) में शामिल किया जा रहा है।  2025 के बजट में एक करोड़ गिग कर्मचारियों को पहचान कार्ड देने और आरोग्य योजना में की सुविधा देने की घोषणा की गई है।

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