टाटा संस में उत्तराधिकार की रेस: नरेंद्रन और सौरभ सबसे आगे; क्या एनएसई के सीईओ आशीष साबित होंगे 'डार्क हॉर्स'?
एन चंद्रशेखरन की ओर से पद छोड़ने के एलान के बाद टाटा संस के अगले चेयरमैन की रेस बेहद दिलचस्प हो चुकी है। टीवी नरेंद्रन, सौरभ अग्रवाल और बाहरी डार्क हॉर्स आशीष चौहान की दावेदारी के कयास लग रहे हैं। किसकी क्या खूबी है, 275 अरब डॉलर से अधिक के इस विशाल साम्राज्य के सामने खड़ी बड़ी रणनीतिक चुनौतियां क्या हैं? आइए सबकुछ समझते हैं विस्तार से।
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विस्तार
भारतीय कारॅपोरेट जगत के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित समूहों में से एक, टाटा ग्रुप इस समय एक बड़े रणनीतिक चौराहे पर खड़ा है। लगभग 275 अरब डॉलर से अधिक के विशालकाय साम्राज्य की होल्डिंग कंपनी, टाटा संस ने अपने अगले चेयरमैन की तलाश को बेहद तेज कर दिया है। दरअसल, मौजूदा चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल फरवरी 2027 की शुरुआत में समाप्त होने जा रहा है। चंद्रशेखरन, जिन्होंने साल 2017 में टाटा संस की कमान संभाली थी और जो वर्तमान में अपना दूसरा पांच साल का कार्यकाल पूरा कर रहे हैं, उन्होंने हाल ही में यह स्पष्ट कर दिया है कि वे 20 फरवरी 2027 को अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद पुनर्नियुक्ति की मांग नहीं करेंगे।
इस महत्वपूर्ण घोषणा के बाद, टाटा संस के बोर्ड और समूह को नियंत्रित करने वाले टाटा ट्रस्ट्स ने नए उत्तराधिकारी की खोज के लिए एक औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह उत्तराधिकार प्रक्रिया इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि साल 2024 में दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा के निधन के बाद नोएल टाटा ने टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन के रूप में बागडोर संभाली है। अब नए नेतृत्व का चयन न केवल समूह के भविष्य की व्यावसायिक दिशा तय करेगा, बल्कि टाटा के पारंपरिक मूल्यों और व्यावसायिक आक्रामकता के बीच संतुलन भी स्थापित करेगा।
उत्तराधिकार की इस बड़ी रेस में कौन से तीन मुख्य नाम सबसे आगे हैं?
पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि टाटा संस ने अपने नए चेयरमैन के रूप में चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी की खोज को तीन प्रमुख कॉर्पोरेट दिग्गजों तक सीमित कर दिया है। इन तीन नामों में दो अंदरूनी (इंटरनल) उम्मीदवार हैं और एक बाहरी उम्मीदवार है, जो 'डार्क हॉर्स' यानी अप्रत्याशित विकल्प के रूप में उभरकर सामने आए हैं:
- टीवी नरेंद्रन: टाटा स्टील के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक (एमडी), जो अंदरूनी उम्मीदवारों में सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।
- सौरभ अग्रवाल: टाटा संस के कार्यकारी निदेशक और समूह के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ), जो पूंजी आवंटन और रणनीतिक निवेश के विशेषज्ञ हैं।
- आशीष चौहान: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के प्रबंध निदेशक और सीईओ, जो अपनी मजबूत तकनीकी और नियामक समझ के कारण बाहरी 'डार्क हॉर्स' के रूप में इस रेस में तेजी से उभरे हैं।
इन तीनों के अतिरिक्त कुछ अन्य नाम भी चर्चाओं में आए हैं, जिनमें खुद नोएल टाटा (जो प्रक्रिया पूरी न होने की स्थिति में अंतरिम चेयरमैन बन सकते हैं), टाटा संस की ग्रुप चीफ डिजिटल ऑफिसर आरती सुब्रमण्यन, टाटा मोटर्स के सीईओ शैलेश चंद्र और टाटा पावर के सीईओ प्रवीर सिन्हा शामिल हैं। हालांकि, मुख्य मुकाबला नरेंद्रन, अग्रवाल और चौहान के बीच ही केंद्रित माना जा रहा है।
क्या डार्क हॉर्स आशीष चौहान की तकनीकी और नियामक समझ उन्हें सबसे आगे खड़ा करेगी?
टाटा संस की चेयरमैनशिप के लिए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के प्रमुख आशीष चौहान का नाम सबसे चौंकाने वाला और दिलचस्प माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, वे एक अप्रत्याशित लेकिन बेहद मजबूत विकल्प साबित हो सकते हैं। आशीष चौहान का प्रोफाइल पारंपरिक टाटा क्रेडेंशियल्स से काफी अलग है। वे टेक्नोलॉजी, कैपिटल मार्केट्स, फाइनेंशियल सर्विसेज और बड़े संस्थानों के निर्माण के क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता रखते हैं।
चौहान ने आईआईटी बॉम्बे से स्नातक किया है और उनके पास आईआईएम कलकत्ता से पोस्ट ग्रेजुएट मैनेजमेंट डिग्री है। उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज और आईडीबीआई बैंक में भी काम किया है। वह 1990 के दशक में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की स्थापना करने वाले शुरुआती अधिकारियों में शामिल थे। इसके बाद उन्होंने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के एमडी और सीईओ के रूप में कार्य किया और 2022 में फिर से एनएसई के प्रमुख के रूप में वापस आए।
बीएसई में रहते हुए उन्होंने एक ब्रोकर-संचालित एक्सचेंज को एक पेशेवर रूप से प्रबंधित कॉर्पोरेट संस्थान में बदला। वर्तमान में वे एनएसई को एक कठिन दौर से निकालते हुए इसके 30,000 करोड़ रुपये के विशाल आईपीओ की तैयारी कर रहे हैं, जो भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ होने जा रहा है। इस आईपीओ के बाद एनएसई का मूल्य लगभग पांच लाख करोड़ रुपये आंका जाएगा, जो इसे बाजार पूंजीकरण के लिहाज से भारत की शीर्ष 10 मूल्यवान कंपनियों में शामिल कर देगा।
चौहान को एक शांत और योजनाबद्ध तरीके से काम करने वाले 'कॉर्पोरेट ट्रबलशूटर' के रूप में जाना जाता है, जो बिना किसी आक्रामक सार्वजनिक मुद्रा के कठिन परिस्थितियों को संभालते हैं। उन्हें तकनीकी बदलावों, नियामक और नीतिगत वातावरण की बहुत गहरी समझ है। हालांकि, टाटा संस का चेयरमैन बनना एक बेहद मांग वाली भूमिका है। चौहान को वित्तीय बाजारों के एक विशेष नियामक दायरे से निकलकर 30 से अधिक विविध व्यवसायों और 10 लाख से अधिक कर्मचारियों वाले एक विशाल वैश्विक साम्राज्य का संचालन करना होगा।
क्या टाटा स्टील के दिग्गज टीवी नरेंद्रन का तीन दशकों का अनुभव उन्हें स्वाभाविक उत्तराधिकारी बनाता है?
टाटा समूह के भीतर से टी वी नरेंद्रन का नाम शुरुआती चर्चाओं से ही सबसे प्रमुखता से लिया जा रहा है। वे समूह के सबसे मजबूत और अनुभवी इंटरनल ऑपरेटिंग उम्मीदवार हैं।
नरेंद्रन साल 1988 से ही टाटा स्टील के साथ जुड़े हुए हैं। उन्होंने समूह में तीन दशक से अधिक का समय बिताया है और पिछले एक दशक से अधिक समय से इस विशाल स्टील निर्माता कंपनी का नेतृत्व सीईओ और एमडी के रूप में कर रहे हैं। नरेंद्रन ने टाटा स्टील को वैश्विक कमोडिटी साइकिल के उतार-चढ़ाव, भारी पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) और विशेष रूप से यूरोप में मुश्किल ऑपरेशन्स के दौर से निकाला है। यूरोप के ये ऑपरेशन्स पूर्ववर्ती टाटा संस के चेयरमैनों के लिए हमेशा से एक बड़ी सिरदर्दी रहे हैं।
नरेंद्रन ने कंपनी के जैविक और अजैविक विस्तार का नेतृत्व किया है और वे वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन के चेयरमैन तथा भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष जैसे बड़े संस्थागत पदों पर भी रह चुके हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नरेंद्रन उन दो चुनिंदा ऑपरेटिंग सीईओ में से एक हैं (दूसरे टाटा पावर के प्रवीर सिन्हा हैं), जिनसे टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा नियमित रूप से सलाह-मशविरा करते हैं।
नरेंद्रन के पास पारंपरिक टाटा विरासत और संस्कृति का गहरा ज्ञान है, लेकिन उनका पूरा करियर मुख्य रूप से टाटा स्टील के भीतर ही बीता है। होल्डिंग कंपनी के स्तर पर काम करने और वित्तीय निवेश निर्णयों (कैपिटल आवंटन) में उनका अनुभव अपेक्षाकृत कम है। साथ ही, वे टाटा एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेज (टीएएस) के कैडर से नहीं आते हैं। उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती एक एकल भारी उद्योग (स्टील) चलाने के अपने अनुभव को आईटी, विमानन, खुदरा और आधुनिक विनिर्माण जैसे बेहद विविध पोर्टफोलियो के प्रबंधन में बदलने की होगी।
क्या सौरभ अग्रवाल हैं रणनीतिक निवेश और पूंजी आवंटन के अचूक विकल्प?
यदि टाटा संस वित्तीय कौशल, रणनीति और समूह के निवेश ढांचे की गहरी समझ रखने वाले किसी व्यक्ति को चुनना चाहती है, तो ग्रुप सीएफओ सौरभ अग्रवाल सबसे सटीक अंदरूनी विकल्प बनकर उभरते हैं।
वे साल 2017 में एन चंद्रशेखरन के तहत ग्रुप सीएफओ के रूप में टाटा संस में शामिल हुए थे। वर्तमान में वे कार्यकारी निदेशक और ग्रुप सीएफओ हैं। उनकी जिम्मेदारियां केवल पारंपरिक सीएफओ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे पूरे समूह में पूंजी आवंटन, निवेश प्रबंधन निर्णयों और पोर्टफोलियो अनुकूलन का मुख्य कार्य संभालते हैं।
आईआईटी रुड़की से स्नातक और आईआईएम कलकत्ता से पीजीडीएम करने वाले अग्रवाल ने साल 1995 में फाइनेंस और निवेश बैंकिंग में अपना करियर शुरू किया था। वे डीएसपी मेरिल लिंच में निवेश बैंकिंग के प्रमुख, स्टैंडर्ड चार्टर्ड में भारत और दक्षिण एशिया के कॉर्पोरेट फाइनेंस प्रमुख और आदित्य बिड़ला ग्रुप में रणनीति के वरिष्ठ पद पर रह चुके हैं।
टाटा समूह में आने से पहले भी उन्होंने एक निवेश बैंकर के रूप में टाटा के कई महत्वपूर्ण सौदों में सलाह दी थी। वर्तमान में वे टाटा स्टील, वोल्टास और टाटा डिजिटल सहित कई बड़ी कंपनियों के बोर्ड में शामिल हैं। इसके साथ ही वे टाटा कैपिटल, टाटा प्ले, टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस, टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस, टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी, टाटा 1एमजी और बिगबास्केट जैसी कंपनियों के बोर्ड की अध्यक्षता करते हैं।
मौजूदा समय में टाटा संस एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहां भारी पूंजीगत आवश्यकताओं की जरूरत है। ऐसे में यह निर्णय लेना बहुत जटिल है कि समूह के विभिन्न व्यवसायों में कहां और किस तरह पूंजी को तैनात किया जाए। अग्रवाल की वित्तीय बाजार की बाहरी समझ और टाटा समूह के निवेश ढांचे की आंतरिक जानकारी उन्हें इस भूमिका के लिए बेहद प्रासंगिक बनाती है।
अगले चेयरमैन के सामने समूह के भीतर कौन सी बड़ी रणनीतिक चुनौतियां होंगी?
एन चंद्रशेखरन का जाना टाटा समूह के लिए एक बेहद नाजुक समय पर हो रहा है, क्योंकि समूह इस समय अपने इतिहास के सबसे बड़े निवेश चक्रों (इन्वेस्टमेंट साइकिल्स) के बीच में है। अगले चेयरमैन को लगभग 16.24 लाख करोड़ रुपये के राजस्व (रेवेन्यू) वाले इस विशाल समूह की बागडोर संभालनी होगी और कई बड़े रणनीतिक मोर्चों पर फैसले लेने होंगे:
- एयर इंडिया का संकट और विस्तार: एयर इंडिया को सरकार से अधिग्रहित करने के बाद इसका पुनर्निर्माण किया जा रहा है। इसे वैश्विक स्तर की एयरलाइन बनाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता है। नए विमानों की खरीद के लिए आवश्यक पूंजी जुटाना और वैश्विक विमान पट्टादाताओं (लेसरों) का विश्वास हासिल करना नए चेयरमैन के लिए सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक होगा।
- डिजिटल और नए जमाने के व्यवसाय: टाटा डिजिटल के घाटे में चल रहे ऑपरेशन्स को मुनाफे में लाने के लिए कड़े और दूरदर्शी रणनीतिक फैसलों की आवश्यकता होगी।
- सेमीकंडक्टर और ईवी सेक्टर: समूह इस समय सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण परियोजनाओं और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (ईवी) में बड़े निवेश कर रहा है, जिन्हें समय पर पूरा करना होगा।
- टीसीएस का तकनीकी परिवर्तन: समूह की सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनी और टाटा संस के बाजार मूल्य में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखने वाली टीसीएस इस समय तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों के दौर से गुजर रही है, जहां उसे अपनी बढ़त बनाए रखनी होगी।
- टाटा संस का आईपीओ: टाटा संस की सार्वजनिक लिस्टिंग का लंबे समय से लंबित सवाल और शेयरधारकों से जुड़े कॉर्पोरेट गवर्नेंस के मुद्दों को हल करना भी प्राथमिकता होगी। साथ ही, अल्पसंख्यक शेयरधारक शापूरजी पलोनजी (एसपी) ग्रुप के वित्तीय दबावों को भी संभालना होगा।
इस पूरी उत्तराधिकार प्रक्रिया में नोएल टाटा और टाटा ट्रस्ट्स की क्या भूमिका है?
इस पूरी चयन प्रक्रिया के केंद्र में नोएल टाटा हैं, जो टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन होने के साथ-साथ टाटा संस के बोर्ड में गैर-कार्यकारी निदेशक भी हैं। साल 2024 में रतन टाटा के निधन के बाद समूह के भीतर नोएल टाटा का प्रभाव काफी बढ़ गया है। टाटा संस पर नियंत्रण रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स की इस उत्तराधिकार प्रक्रिया में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका रहने वाली है।
सूत्रों के अनुसार, नोएल टाटा ने शॉर्टलिस्ट किए गए इन उम्मीदवारों के नामों के बारे में देश के शीर्ष सरकारी नेतृत्व को भी अवगत करा दिया है। इन नामों पर बोर्ड और ट्रस्ट के स्तर पर पूरी गहनता से विचार-विमर्श किए जाने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। नया चेयरमैन जो भी बनेगा, उसे नोएल टाटा और टाटा संस के बोर्ड के साथ मिलकर काम करना होगा ताकि व्यावसायिक विस्तार के साथ-साथ टाटा समूह के पारंपरिक मूल्यों और परोपकारी लोकाचार (फिलांथ्रोपिक ईथोस) को भी बनाए रखा जा सके।
अंतिम फैसला किस दिशा में इशारा करेगा?
टाटा संस के अगले चेयरमैन की तलाश अब अपने अंतिम दौर में पहुंचने वाली है, और चयन समिति आने वाले महीनों में इस प्रक्रिया को और तेज करेगी ताकि नया चेयरमैन फरवरी 2027 में एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल की समाप्ति के बाद सुचारू रूप से कार्यभार संभाल सके।
संक्षेप में कहें तो टीवी नरेंद्रन समूह को एक मजबूत आंतरिक निरंतरता और तीन दशकों का गहरा परिचालन अनुभव प्रदान करते हैं। वहीं, सौरभ अग्रवाल निवेश बैंकिंग की पृष्ठभूमि के साथ पूंजी आवंटन और जटिल वित्तीय निर्णयों के लिए एक अचूक रणनीतिक विकल्प हैं। दूसरी तरफ, बाहरी उम्मीदवार के रूप में आशीष चौहान का अप्रत्याशित नाम प्रौद्योगिकी, वित्तीय बाजारों, संस्थागत निर्माण और सरकारी नीतिगत नियामक वातावरण की अनूठी जुगलबंदी के कारण सामने आ सकता है। उनकी ये खूबिनयां उन्हें इस उत्तराधिकार की जंग का सबसे बड़ा 'डार्क हॉर्स' बनाती है। इस त्रिकोणीय मुकाबले में अंतिम चयन जो भी होगा, वह आने वाले दशक में टाटा संस की भविष्य की दिशा तय करेगा।