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फॉक्सवैगन का बड़ा फैसला: भारत में 12% कर्मचारियों की होगी छुट्टी, क्या मंदी की आहट से सहमी जर्मन कार कंपनी?

Fri, 04 Sep 2026 04:50 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 04 Sep 2026 04:50 PM IST
सार

फॉक्सवैगन इंडिया ने लागत में कटौती और पुनर्गठन के तहत भारत में अपने 12% कार्यबल को बाहर करने का फैसला किया है। जानिए जेएसडब्ल्यू के साथ हुए सौदे और इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़ा पूरा गणित। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

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Volkswagen India Accelerates Restructuring: 12% Workforce Cut Planned by 2027 to Lower Costs
Volkswagen India Layoffs - फोटो : amarujala.com

विस्तार

वैश्विक मंदी और ऑटो सेक्टर में बढ़ते दबाव के बीच जर्मनी की दिग्गज कार निर्माता कंपनी फॉक्सवैगन ने भारतीय बाजार में एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। कंपनी अपने भारतीय परिचालन में बड़ा फेरबदल करते हुए अपने कुल कार्यबल में करीब 12 प्रतिशत की कटौती करने की तैयारी में है। भारत जैसे तेजी से बढ़ते ऑटोमोबाइल बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने और नई निवेश योजनाओं से पहले लागत घटाने के उद्देश्य से कंपनी अपनी तीन-वर्षीय पुनर्गठन योजना को तेजी से आगे बढ़ा रही है।

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छंटनी का यह पूरा प्लान क्या है?

स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने इस पुनर्गठन की शुरुआत साल 2025 में की थी, लेकिन अब इसके टाइमटेबल को और कड़ा कर दिया गया है। कंपनी सूत्रों के अनुसार, अब नौकरियों में यह कटौती वर्ष 2027 तक कई त्वरित चरणों में पूरी की जाएगी। इस योजना के तहत कंपनी के व्हाइट-कॉलर (दफ्तर में काम करने वाले) और शॉप-फ्लोर (फैक्ट्री में काम करने वाले) दोनों ही विभागों से कुछ सौ नौकरियां खत्म होने की आशंका है।

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इस बड़े बदलाव के पीछे मुख्य वित्तीय कारण क्या हैं?

फॉक्सवैगन भारतीय बाजार में अपनी अगली पीढ़ी के वाहनों को उतारने की तैयारी कर रही है, जिसमें एक नया इलेक्ट्रिक मॉडल (ईवी) भी शामिल है। इस नए निवेश चक्र की शुरुआत से पहले कंपनी एक बेहद हल्के और कम लागत वाले आधार के साथ बाजार में उतरना चाहती है। भारत में दो दशकों की उपस्थिति के बावजूद कंपनी को अपेक्षित पैमाना हासिल करने में काफी संघर्ष करना पड़ा है। इस छंटनी योजना के जरिए कंपनी का लक्ष्य अपने भारतीय परिचालन में दहाई मिलियन डॉलर की बचत करना है, ताकि वित्तीय स्थिति को मजबूत किया जा सके।

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कंपनी के शीर्ष प्रबंधन का इस पर क्या रुख है?

इस पुनर्गठन पर बोलते हुए स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (एमडी और सीईओ) पीयूष अरोड़ा ने कहा, "हालांकि हम अपने कार्यबल से जुड़े अनुमानित आंकड़ों पर कोई टिप्पणी नहीं करते हैं, लेकिन व्यावसायिक इकाइयों में परिचालन को बेहतर करने के हमारे प्रयास तेजी पकड़ रहे हैं।" उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में कंपनी अपनी स्थानीय इंजीनियरिंग टीम का विस्तार करेगी और भारत को समूह के एक प्रमुख विनिर्माण, इंजीनियरिंग और निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए निवेश को और गहरा करेगी।

वैश्विक स्तर पर फॉक्सवैगन किस बड़े संकट से जूझ रही है?

भारतीय बाजार में की जा रही यह कटौती फॉक्सवैगन के उस व्यापक वैश्विक पुनर्गठन का हिस्सा नहीं है जिसे समूह के वैश्विक सीईओ ओलिवर ब्लूम चला रहे हैं। हालांकि, दोनों ही योजनाएं इस बात को रेखांकित करती हैं कि वैश्विक स्तर पर कंपनी भारी दबाव में है। वैश्विक स्तर पर कंपनी अपने बेड़े से 50,000 अतिरिक्त नौकरियां कम करने, साल 2035 तक अपने वाहन मॉडल की संख्या आधी करने और वर्ष 2027-2031 के पूंजीगत खर्च को 16 प्रतिशत तक कम करने की योजना पर काम कर रही है। ऑटो सेक्टर में मांग की सुस्त रफ्तार, महंगे ईवी निवेश और चीनी निर्माताओं से बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने कंपनी को लागत कटौती के लिए मजबूर किया है।

भारत में जेएसडब्ल्यू ग्रुप के साथ सौदे की क्या तैयारी है?

इस लागत कटौती के बीच फॉक्सवैगन भारत में अपनी हिस्सेदारी के पुनर्गठन पर भी विचार कर रही है। जर्मन कार निर्माता कंपनी भारत के अरबपति उद्योगपति सज्जन जिंदल के जेएसडब्ल्यू ग्रुप के साथ एक बड़े सौदे के बेहद करीब पहुंच चुकी है। इस सौदे के तहत जेएसडब्ल्यू ग्रुप को फॉक्सवैगन के भारतीय व्यवसाय में नियंत्रण हिस्सेदारी मिल सकती है, जिससे कंपनी में नई पूंजी आने का रास्ता साफ होगा। यह कदम फॉक्सवैगन को घरेलू बाजार में मारुति सुजुकी, हुंडई, टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी स्थापित दिग्गज कंपनियों का मुकाबला करने के लिए आर्थिक मजबूती प्रदान करेगा।

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