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खाद्य तेल हुआ सस्ता: सरकार ने घटाया आयात शुल्क, कंपनियों को एमआरपी कम करने के मिले निर्देश
Thu, 12 Jun 2025 06:38 AM IST
शुभम कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शुभम कुमार
Updated Thu, 12 Jun 2025 06:38 AM IST
सार
सरकार ने कच्चे सूरजमुखी, सोया और पाम तेल पर सीमा शुल्क 20% से घटाकर 10% कर दिया है। इससे खाद्य तेल सस्ता होने की उम्मीद है। विभाग ने कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि वे तुरंत एमआरपी घटाएं और उपभोक्ताओं को इसका लाभ पहुंचाएं। कीमतों की साप्ताहिक रिपोर्ट भी मांगी गई है।
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खाद्य तेल
- फोटो : FreePik
विस्तार
खाद्य तेलों के मूल सीमा शुल्क यानी बीसीडी में 50 फीसदी की कटौती की गई है। कच्चे सूरजमुखी, सोयाबीन और पाम ऑयल पर शुल्क को 20 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया है। इस फैसले के चलते कच्चे और रिफाइंड खाद्य तेलों के बीच आयात शुल्क में अंतर 8.75% से 19.25% हो गया है। सरकार ने आदेश किया है कि जितना जल्द हो सके, कंपनियां इसका फायदा ग्राहकों को दें।
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव की अध्यक्षता में प्रमुख खाद्य तेल उद्योग संघों और उद्योग हितधारकों के साथ बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में उन्हें शुल्क कटौती का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया। विभाग ने बयान में कहा, वितरकों के लिए मूल्य और अधिकतम खुदरा मूल्य दोनों को समायोजित किया जाए।
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खाद्य विभाग ने तेल एसोसिएशनों को दी सलाह
विभाग ने तेल एसोसिएशनों से कहा, वे तत्काल मूल्य कटौती लागू करने की सलाह दें। साथ ही, ब्रांडवार अपडेट एमआरपी शीट साप्ताहिक आधार पर विभाग के साथ साझा करें। मंत्रालय ने खाद्य तेल उद्योग के साथ एमआरपी की रिपोर्टिंग के लिए एक प्रारूप साझा किया है। इसमें जोर दिया कि आपूर्ति शृंखला के जरिये समय पर लाभ पहुंचाना आवश्यक है, ताकि उपभोक्ताओं को खुदरा कीमतों में भी इसी तरह की कमी हो सके।
31 मई को हुई थी कटौती
सरकार ने 31 मई को पाम तेल, कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्क में 50 फीसदी की कटौती कर इसे 20 से 10 फीसदी पर ला दिया था। अधिकारियों ने कहा, 19.25 प्रतिशत शुल्क का अंतर घरेलू रिफाइनिंग क्षमता उपयोग को प्रोत्साहित करने और रिफाइंड तेलों के आयात को कम करने में मदद करेगा।
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एक साल में 25% तक बढ़े दाम
खाना पकाने वाले तेलों की कीमतें एक साल में 25 फीसदी से तक बढ़ी हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार, वनस्पति तेल का भाव बुधवार को 155 रुपये लीटर था, जो एक साल पहले 126 रुपये था। इसी तरह सोया तेल की कीमत 123 से बढ़कर 147 रुपये, सूरजमुखी तेल का दाम 123 से बढ़कर 160 रुपये लीटर, पाम तेल का भाव 100 से बढ़कर 132 रुपये और सरसों तेल की कीमत 138 से बढ़कर 172 रुपये पर पहुंच गई। हालांकि, कुछ शहरों में इनकी कीमतें इससे भी ज्यादा हैं। हालांकि, हाल के महीनों में इनमें 17 फीसदी तक तेजी आई थी।
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खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव की अध्यक्षता में प्रमुख खाद्य तेल उद्योग संघों और उद्योग हितधारकों के साथ बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में उन्हें शुल्क कटौती का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया। विभाग ने बयान में कहा, वितरकों के लिए मूल्य और अधिकतम खुदरा मूल्य दोनों को समायोजित किया जाए।
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खाद्य विभाग ने तेल एसोसिएशनों को दी सलाह
विभाग ने तेल एसोसिएशनों से कहा, वे तत्काल मूल्य कटौती लागू करने की सलाह दें। साथ ही, ब्रांडवार अपडेट एमआरपी शीट साप्ताहिक आधार पर विभाग के साथ साझा करें। मंत्रालय ने खाद्य तेल उद्योग के साथ एमआरपी की रिपोर्टिंग के लिए एक प्रारूप साझा किया है। इसमें जोर दिया कि आपूर्ति शृंखला के जरिये समय पर लाभ पहुंचाना आवश्यक है, ताकि उपभोक्ताओं को खुदरा कीमतों में भी इसी तरह की कमी हो सके।
31 मई को हुई थी कटौती
सरकार ने 31 मई को पाम तेल, कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्क में 50 फीसदी की कटौती कर इसे 20 से 10 फीसदी पर ला दिया था। अधिकारियों ने कहा, 19.25 प्रतिशत शुल्क का अंतर घरेलू रिफाइनिंग क्षमता उपयोग को प्रोत्साहित करने और रिफाइंड तेलों के आयात को कम करने में मदद करेगा।
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एक साल में 25% तक बढ़े दाम
खाना पकाने वाले तेलों की कीमतें एक साल में 25 फीसदी से तक बढ़ी हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार, वनस्पति तेल का भाव बुधवार को 155 रुपये लीटर था, जो एक साल पहले 126 रुपये था। इसी तरह सोया तेल की कीमत 123 से बढ़कर 147 रुपये, सूरजमुखी तेल का दाम 123 से बढ़कर 160 रुपये लीटर, पाम तेल का भाव 100 से बढ़कर 132 रुपये और सरसों तेल की कीमत 138 से बढ़कर 172 रुपये पर पहुंच गई। हालांकि, कुछ शहरों में इनकी कीमतें इससे भी ज्यादा हैं। हालांकि, हाल के महीनों में इनमें 17 फीसदी तक तेजी आई थी।