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ED: ईडी ने जेपी इन्फ्राटेक के एमडी मनोज गौड़ को किया गिरफ्तार, धनशोधन से जुड़े मामले में हुई कार्रवाई

Thu, 13 Nov 2025 11:10 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Thu, 13 Nov 2025 11:10 AM IST
सार

ED Action: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रियल एस्टेट कंपनी जेपी इन्फ्राटेक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक (एमडी) मनोज गौड़ को धन शोधन से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया है। यह मामला कथित रूप से घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी से जुड़ा है। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।

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ED arrests Jaypee Infratech MD Manoj Gaur in money laundering case news and updates
ईडी। - फोटो : ANI

विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रियल एस्टेट कंपनी जेपी इन्फ्राटेक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक (एमडी) मनोज गौड़ को धन शोधन से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया है। यह मामला कथित रूप से घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी से जुड़ा है। आधिकारिक सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि गौड़ को धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया गया है। इसके बाद दिल्ली की एक अदालत ने गौड़ को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की पांच दिन की हिरासत में भेज दिया।

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उन्होंने कहा कि जांच घर खरीदारों के साथ कथित धोखाधड़ी से संबंधित है, जिसमें कंपनी और उसके अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। एजेंसी ने घर खरीदारों के साथ 14,599 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी से जुड़े धन शोधन मामले की जांच के सिलसिले में यह कार्रवाई की है। 

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घर खरीदारों से मिली राशि को अलग-अलग ट्रस्टों में भेज दिया गया

एजेंसी ने आरोप लगाया है कि घर खरीदारों से एकत्रित धनराशि को विभिन्न ट्रस्टों में स्थानांतरित कर दिया गया। इससे परियोजनाएं अधूरी रह गईं और निवेशकों के साथ धोखाधड़ी हुई। ईडी के अुनसार गौर जेपी सेवा संस्थान (जेएसएस) के प्रबंध ट्रस्टी हैं, इसे डायवर्टेड फंड का कुछ हिस्सा मिला था। अधिकारियों ने बताया कि उनके खिलाफ जांच घर खरीदारों के साथ कथित धोखाधड़ी के मामले से संबंधित है।

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जांच एजेंसी ने बताया- किस आधार पर शुरू हुई जेपी समूह के खिलाफ जांच

एजेंसी ने एक बयान में कहा, "ईडी ने जेपी विशटाउन और जेपी ग्रीन्स परियोजनाओं के घर खरीदारों की दायर की गई शिकायतों के आधार पर दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर जेपी समूह के खिलाफ जांच शुरू की। इसमें कंपनी और उसके प्रमोटरों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात का आरोप लगाया गया था।"


इसमें आरोप लगाया गया है कि आवासीय परियोजनाओं के निर्माण और पूरा करने के लिए हजारों घर खरीदारों से एकत्रित धनराशि को निर्माण के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए डायवर्ट कर दिया गया, जिससे घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी हुई और उनकी परियोजनाएं अधूरी रह गईं।

घर खरीदारों से ली गई बड़ी रकम गैर-निर्माण कार्यों के लिए डायवर्ट किया गया

बयान में कहा गया है, "ईडी की जांच से पता चला है कि जेएएल और जेआईएल की ओर से घर खरीदारों से एकत्र किए गए लगभग 14,599 करोड़ रुपये (एनसीएलटी की ओर से स्वीकार किए गए दावों के अनुसार) में से बड़ी रकम को गैर-निर्माण उद्देश्यों के लिए डायवर्ट किया गया और जेपी सेवा संस्थान (जेएसएस), मेसर्स जेपी हेल्थकेयर लिमिटेड (जेएचएल) और मेसर्स जेपी स्पोर्ट्स इंटरनेशनल लिमिटेड (जेएसआईएल) सहित संबंधित समूह संस्थाओं और ट्रस्टों को दे दिया गया।"



ईडी ने 23 मई को दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और मुंबई में 15 स्थानों पर तलाशी ली थी। इसमें जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड और जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड के कार्यालय और परिसर शामिल थे। बयान में कहा गया है, "तलाशी के दौरान, ईडी ने बड़ी मात्रा में वित्तीय और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए, साथ ही धन शोधन और धन के हेरफेर के अपराध को प्रमाणित करने वाले दस्तावेज भी जब्त किए।" एजेंसी ने आरोप लगाया कि ईडी की जांच से जेपी समूह और उससे संबद्ध संस्थाओं के बीच लेनदेन के जटिल जाल के माध्यम से धन के हेर-फेर की योजना बनाने और उसे क्रियान्वित करने में गौर की केंद्रीय भूमिका स्थापित हुई है।

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