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Tax: डिजिटल तकनीक ने बदल दी भारत की कर प्रणाली, रिफंड में 474% बढ़ोतरी; अब सिर्फ 17 दिन में मिल रहा पैसा

Sun, 13 Jul 2025 05:40 PM IST
निर्मल कांत बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 13 Jul 2025 05:40 PM IST
सार

Tax: डिजिटल तकनीक ने भारत की कर प्रणाली को ज्यादा पारदर्शी और तेज बना दिया है, जिससे करदाताओं को रिफंड पहले से कहीं जल्दी और ज्यादा मिल रहा है। पिछले दस वर्षों में कर वापसी (रिफंड) में 474% की वृद्धि हुई है, जबकि औसतन रिफंड जारी होने का समय 93 दिन से घटकर सिर्फ 17 दिन रह गया है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने यह जानकारी दी।

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Digital infrastructure transforms India's tax administration, refunds surge 474 per cent
Tax टैक्स new - फोटो : istock

विस्तार

डिजिटल तकनीक ने भारत की कर प्रणाली को पूरी तरह बदल दिया है, जिससे कर वापसी (रिफंड) में 474 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि पिछले दस वर्षों में भारत की कर प्रणाली में बड़ा बदलाव आया है। कर वापसी की रफ्तार कर संग्रह से करीब दोगुनी तेजी से बढ़ी है।

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सूत्रों ने बताया कि 2013-14 से 2024-25 के बीच करदाताओं को रिफंड मिला है, उसमें 474 फीसदी की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। यह राशि 83,008 करोड़ रुपये से बढ़कर 4,76,743 करोड़ रुपये हो गई है।
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इसी अवधि में सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह में 24 फीसदी की वृद्धि हुई है, जो 7,21,604 करोड़ रुपये से बढ़कर 27,02,974 करोड़ रुपये हो गई है। सबसे खास बात यह है कि कर वापसी की प्रक्रिया की गति में भी काफी सुधार हुआ है। 2013 में कर वापसी मिलने में औसतन 93 दिन लगते थे, जो 2024 में घटकर केवल 17 दिन रह गए हैं। यह 81 फीसदी की कमी को दर्शाता है, जो डिजिटल आधुनिकीकरण की सफलता का प्रमाण है।   

इस बदलाव के पीछे कर प्रक्रियाओं का पूरी तरह से डिजिटल होना है। ऑनलाइन फाइलिंग प्रणाली, बिना मुलाकात के असेसमेंट और स्वचालित कर वापसी की प्रक्रिया ने उन पुरानी अड़चनों को खत्म कर दिया है, जो पहले करदाताओं को सेवाओं में देरी का कारण बनती थीं। 


केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया,  प्री-फिल्ड रिटर्न, रियल-टाइम टीडीएस समायोजन और ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली जैसी डिजिटल तकनीक ने करदाताओं को सेवाएं देने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। 

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करदाताओं की संख्या में भी काफी वृद्धि हुई है। 2013 में 3.8 करोड़ आयकर रिटर्न दाखिल किए गए थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 8.89 करोड़ हो गई है। यह 133 फीसदी की बढ़ोतरी दर्शाती है। रिफंड का अनुपात भी कुल कर संग्रह की तुलना में काफी बढ़ा है। 2013-14 में यह अनुपात 11.5 फीसदी था, जो 2024-25 में बढ़कर 17.6 फीसदी हो गया है। एक वरिष्ठ आयकर अधिकारी ने बताया, रिफंड में यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि लोग अब ज्यादा स्वेच्छा से कर का भुगतान कर रहे हैं और अग्रिम कर भुगतान की व्यवस्था भी मजबूत हो रही है। 

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